पुलिसिया बर्बरता ने ली प्रॉपर्टी डीलर मनीष गुप्ता की जान, झूठा निकला गोरखपुर पुलिस का दावा

गोरखपुर पुलिस ने दावा किया था कि मनीष गुप्ता की मौत होटल के कमरे में गिरने से हुई, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि मनीष गुप्ता के सिर पर पुलिस ने डंडों से हमला किया गया, मनीष गुप्ता के चेहरे और शरीर पर भी गंभीर चोट के निशान मिले हैं

Updated: Sep 30, 2021, 10:49 AM IST

पुलिसिया बर्बरता ने ली प्रॉपर्टी डीलर मनीष गुप्ता की जान, झूठा निकला गोरखपुर पुलिस का दावा
Photo Courtesy: UP Tak

लखनऊ। कानपुर के प्रॉपर्टी डीलर मनीष गुप्ता की मौत मामले में गोरखपुर पुलिस का दावा झूठा निकला है। मृतक मनीष गुप्ता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने गोरखपुर पुलिस के दावों की पोल खोलकर रख दी है। पीएम रिपोर्ट के मुताबिक मनीष गुप्ता की जान पुलिसिया बर्बरता के कारण गई है। जबकि गोरखपुर पुलिस अब तक मनीष गुप्ता की मौत को हादसा बता रही थी। 

मनीष गुप्ता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मनीष गुप्ता के चेहरे और शरीर पर चोट के गंभीर निशान मिले हैं। पीएम रिपोर्ट में यह बात निकल कर सामने आई है कि मनीष गुप्ता के सिर पर डंडों से वार किया गया। सिर के अगले हिस्से पर चोट लगने के कारण मृतक की नाक से खून बहने लगा।

क्या है मामला 

उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले प्रॉपर्टी डीलर मनीष गुप्ता अपने दो दोस्तों हरदीप सिंह चौहान और प्रदीप सिंह चौहान के साथ गोरखपुर घूमने गए थे। सोमवार सुबह ही वे अपने दोनों दोस्तों के साथ गोरखपुर पहुंचे थे। तीनों दोस्त गोरखपुर के कृष्णा पैलेस होटल में ठहरे हुए थे। सोमवार देर रात गोरखपुर के रामगढ़ताल पुलिस थाने की पुलिस होटल में चेकिंग के नाम पर दाखिल हुई, और इसके बाद मनीष गुप्ता ने शहर के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया। 

पुलिस की कहानी 

होटल में पुलिस के दाखिल होने और अस्पताल में मनीष गुप्ता की लाश पहुंचने के बीच ही सारी कहानी बनाई गई है। पुलिस के मुताबिक जब वह होटल के कमरा नंबर 512 में दाखिल हुई तब तीन लोग उस कमरे में मौजूद थे। इस दौरान मनीष गुप्ता हड़बड़ाहट में वहां से भागने का प्रयास करने लगे, इसी दौरान वे नीचे गिर गए और चोट लगने से उनकी मौत हो गई। पुलिस ने जब तक उन्हें अस्पताल पहुंचाया तब तक वे दम तोड़ चुके थे। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 

असली घटना 

मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि पुलिस ने होटल के कमरे की झूठी घटना गढ़ी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जब पुलिस कमरे में दाखिल हुई, तब मनीष गुप्ता ने पुलिस से उलझते हुए इस बात का जवाब मांगा था कि आखिर वे चेकिंग किस बात का कर रहे हैं। क्या वे आतंकवादी हैं? मनीष गुप्ता की यही बात पुलिस को नागवार गुजरी, जिसके बाद पुलिस ने मनीष गुप्ता को पीटना शुरू कर दिया। पुलिसिया बर्बरता के कारण मनीष गुप्ता ज़ख्मी हो गए और यही उनकी मौत की वजह बनी।

बहरहाल मनीष गुप्ता के परिवार ने आखिरकार गुरुवार सुबह को उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार कर दिया। परिवार इस मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने के साथ साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करने की मांग कर रहा था। परिवार के इस मांग पर अड़े रहने के बाद कानपुर पुलिस के आला दर्जा के अधिकारियों ने इस बात का आश्वासन दिया कि वे गुरुवार को ही सीएम से उनकी मुलाकात कराएंगे, जिसके बाद परिवार मृतक की अंत्येष्टि करने पर राजी हुआ। मनीष गुप्ता की मौत मामले में तीन पुलिसकर्मियों सहित कुल 6 लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।