दम घुटने से हुई नरेंद्र गिरी की मौत, गले पर मिला V का निशान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा

महंत नरेंद्र गिरी को बाघम्बरी मठ में दी गई भू समाधि, 13 अखाड़ों के प्रतिनिधि रहे मौजूद, डॉक्टरों ने उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी है, सूत्रों के मुताबिक दम घुटने से उनकी मौत हुई है, उनके गले पर V का निशान भी देखा गया है

Updated: Sep 22, 2021, 04:28 PM IST

दम घुटने से हुई नरेंद्र गिरी की मौत, गले पर मिला V का निशान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा

प्रयागराज। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। मीडिया सूत्रों के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला है कि नरेंद्र गिरी की मौत दम घुटने से हुई है। बताया जा रहा है कि उनके गले पर V का निशाना भी देखा गया है। फिलहाल डॉक्टरों ने उनकी विसरा रिपोर्ट सुरक्षित रखी है।

जानकारी के मुताबिक पांच डॉक्टरों की टीम ने तकरीबन दो घंटे तक उनका पोस्टमार्टम किया। इस दौरान पूरे पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी की गई। पोस्‍टमार्टम के तत्काल बाद रिपोर्ट को लिफाफे में सीलबंद कर दिया गया। यह रिपोर्ट पुलिस के उच्‍चाधिकारियों को सौंप दी गई है। पुलिस सूत्रों से ही मीडिया को यह जानकारी मिली है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने से मौत होने की बात सामने आया है।

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बताया जा रहा है कि डॉक्टरों ने आगे की जांच के लिए विसरा रिपोर्ट सुरक्षित रखी है। नरेंद्र गिरी की संदिग्ध मौत की गुत्थी समय के साथ सुलझने के बजाय उलझती जा रही है। हालांकि, मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी की टीम लगातार नरेंद्र गिरी के सहयोगियों से पूछताछ कर रही है। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही एसआईटी अपनी जांच को आगे बढ़ाएगी।

उधर बुधवार दोपहर महंत नरेंद्र गिरी को बाघम्बरी मठ में भू-समाधि दी गई। इस दौरान 13 मठों के प्रतिनिधि और कई नेता मंत्री मौजूद रहे। नरेंद्र गिरी के आखिरी दर्शन के लिए उनके शिष्यों का प्रयागराज में हुजूम उमड़ पड़ा है। बता दें कि सोमवार शाम लगभग 5:30 बजे संदिग्ध परिस्थितियों में महंत नरेंद्र गिरी की मौत हो गई थी। वे अपने कमरे में फांसी के फंदे पर लटके पाए गए थे। 

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पुलिस इसे आत्महत्या करार चुकी है और उसी के एंगल से जांच भी की जा रही है। पुलिस ने मौके से एक सुसाइड नोट भी बरामद की है। बताया जा रहा है कि सुसाइड नोट में नरेंद्र गिरी ने अपने विवादित शिष्य आनंद गिरी और दो अन्य को जिम्मेदार बताया है। 7 पन्ने के इस नोट में उन्होंने लिखा है कि आनंद गिरी उनका एक एडीटेड तस्वीर वायरल करने वाला है, जिसमें उन्हें लड़कियों के साथ गलत अवस्था मे दिखाया जाएगा। 

हालांकि, इस सुसाइड नोट को लेकर भी कई तरह की बातें सामने आ रही हैं। नरेंद्र गिरी के करीबियों का दावा है कि वे लिखना नहीं जानते थे, महज वे हस्ताक्षर करना जानते थे। ऐसे में उन्होंने 7 पन्ने का नोट लिखा है ये संभव नहीं है। इससे उन्होंने आत्महत्या की है यह दलील खारिज हो जाती है। आशंका है कि उनकी हत्या की गई हो। हालांकि, उनके संभावित उत्तराधिकारी महंत बलवीर गिरि ने दावा किया था कि सुसाइड नोट पर लिखावट नरेंद्र गिरि की ही है। हालांकि, आज वे अपनी बात से पलट गए, जिसके बाद वे भी सवालों के घेरे में हैं।

SIT ने इस मामले में आनंद गिरी को गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि आनंद गिरी से लगातार 12 घंटे पूछताछ की गई है। हालांकि, महंत की मौत से जुड़ी कोई जानकारी पुलिस के हाथ नहीं लगी। बता दें कि आनंद गिरी वही शिष्य हैं जिन्हें विदेशों में घूमने, महंगे कपड़े, महंगे फोन और भोगविलास का जीवन पसंद है। इन्हीं कारणों से उन्हें बाघम्बरी मठ से निष्कासित भी किया गया था। 

अशोक चोटिया से आनंद गिरी बनने का सफर

आनंद गिरी का असली नाम अशोक चोटिया है और वे भीलवाड़ा के सरेरी गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता रामेश्वर चोटिया के मुताबिक 25 साल पहले आनंद गिरि जब सातवीं में पढ़ते थे तब घर से बिना बताए भाग गए थे। करीब 12 साल की उम्र में उन्होंने हरिद्वार के मठ में शरण लिया था। इसके बाद वे नरेंद्र गिरी के पास चले गए। नरेंद्र गिरी ने उन्हें अपना शिष्य और अपना उत्तराधिकारी भी बनाया था। हालांकि, दोनों में विवाद बढ़ने के बाद आनंद को बाघम्बरी मठ से निकाल दिया गया। 

आनंद गिरी का विवादों से पुराना नाता रहा है। उनकी प्राइवेट जेट की तस्वीर काफी विवादों में रहा है जिसमें उनके सामने शीशे की ग्लास में शराब जैसी पदार्थ रखी थी। हालांकि, बवाल बढ़ने पर उन्होंने इसे सेव का जूस बताया था। वे दुनियाभर में घूमने के भी शौकीन माने जाते हैं। आनंद पर ऑस्ट्रेलिया में दो महिलाओं के साथ अभद्रता के भी आरोप लगे, हालांकि, बाद में नरेंद्र गिरी के हस्तक्षेप से उन्हें छुड़ाया गया।