गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित: काशी में गंगा घाट पर लगे पोस्टर, विधानसभा चुनाव से पहले ध्रुवीकरण शुरू

प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से हुई ध्रुवीकरण की शुरुआत, विभिन्न गंगा घाटों पर लगे गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध के पोस्टर, हिंदुत्वादी संगठनों की धमकी, गंगा घाट से दूर रहें वरना हम...

Updated: Jan 08, 2022, 12:36 PM IST

गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित: काशी में गंगा घाट पर लगे पोस्टर, विधानसभा चुनाव से पहले ध्रुवीकरण शुरू

वाराणसी। विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति शुरू हो गई है। ध्रुवीकरण की शुरुआत देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से हुई है। यहां के गंगा घाटों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध के पोस्टर लगाए गए हैं। हिंदुत्ववादी संगठनों ने गैर हिंदुओं को चेतावनी देते हुए कहा है कि वे गंगा घाट से दूर रहें वरना हम दूर कर देंगे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक वाराणसी के अस्सी घाट, दशाश्वमेध घाट, मणिकर्णिका घाट, रामघाट समेत सभी घाटों पर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल से जुड़े लोगों द्वारा धमकी भरे लहजे में पोस्टर लगाए गए हैं। इनमें लिखा गया है कि गैर हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित। साथ ही यह भी लिखा गया है कि यह निवेदन नहीं चेतावनी है। 

बजरंग दल के काशी महानगर संयोजक निखिल त्रिपाठी ने इस संबंध में कहा कि, 'अब हिंदू समाज को अपनी ताकत दिखाते हुए धर्म और समाज की रक्षा के लिए स्वयं आगे आना होगा। सब कुछ सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। ये पोस्टर नहीं चेतावनी है। चेतावनी उन लोगों के लिए है जो गंगा घाटों को पिकनिक स्पॉट समझते हैं। यहां से वे दूर रहें। यदि दूर नहीं रहेंगे तो बजरंग दल उन्हें दूर कर देगा।

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विश्व हिंदू परिषद काशी महानगर के मंत्री राजन गुप्ता ने कहा कि यह पोस्टर गैर सनातन धर्मियों के लिए एक संदेश है। गंगा के घाट सनातन धर्म के प्रतीक हैं। हमारी सनातन संस्कृति के प्रतीकों से गैर हिंदू दूर रहें। यह कोई घूमने-फिरने की जगह नहीं है। जिन्हें सनातन धर्म में आस्था है सिर्फ वे ही यहां आएंगे। सनातन धर्म में जिनकी आस्था नहीं है हम उन्हें यहां से खदेड़ने का काम करेंगे। ये घाट सभी लोगों का नहीं है। यहां मुसलमानों और ईसाइयों के लिए कोई जगह नहीं है।

मामले पर स्थानीय पुलिस ने कहा है कि जांच की जा रही है। काशी जोन के अपर पुलिस उपायुक्त राजेश पांडेय ने कहा कि, 'यह घटना हमारे संज्ञान में है। पुलिस सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए लगी हुई है। पोस्टर चिपकाने वालों की पहचान की जा रही है। उनके खिलाफ सख़्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।' हैरानी की बात ये है कि पोस्टर चिपकाने वालों की पहचान सार्वजनिक है बावजूद खबर लिखे जाने तक पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया है।

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मामला तूल पकडने के बाद विश्व हिंदू परिषद ने कहा है कि इस घटना से हमारा कोई लेना देना नहीं है। वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा है कि इस तरह की घटनाएं नहीं होनी चाहिए। हम जांच करेंगे और संबंधित लोगों के खिलाफ एक्शन लेंगे। वीडियो में जो दो लोग खुद को वीएचपी कार्यकर्ता बता रहे हैं उनकी पहचान नहीं हो सकी है।