Indore : मैट्रिक पास कर भारती ने बेघर मां-बाप को दिलाया आशियाना

जिला प्रशासन ने ही हटा दी थी फुटपाथ के सामने की भारती के परिवार की झोपड़ी

Publish: Jul-09, 2020, 11:43 PM IST

Indore : मैट्रिक पास कर भारती ने बेघर मां-बाप को दिलाया आशियाना

इंदौर। फुटपाथ पर पढ़ाई कर 10वीं में 68 प्रतिशत अंक लाने वाली बच्ची भारती और उसके परिवार वालों को छत नसीब हुई है। भारती अपने परिवार के साथ मध्यप्रदेश के इंदौर में शिवाजी नगर स्थित फुटपाथ पर सालों से रह रही थी जहां पर उन्होंने स्ट्रीट लाइट की रोशनी में पढ़ाई की है। भारती बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखती है। उसके पिता मजदूरी करते हैं वहीं मां आस पड़ोस में बर्तन धोती हैं। परिवार की कमाई इतनी भी नहीं है कि वह कहीं किराए पर कमरा लेकर रह सकें। इंदौर नगर निगम ने जिलाधिकारी के निर्देश के बाद भारती खांडेकर को फ्लैट गिफ्ट किया है। 

आमतौर पर मां-बाप बच्चों को आशियाना देते हैं लेकिन इंदौर का यह मामला अपने आप में अनूठा है। जब मीडिया के माध्यम से यह बात सामने आई कि भारती जिसने फुटपाथ पर रहकर स्ट्रीट लाइट की रोशनी में पढ़ाई की है तब बाल संरक्षण आयोग ने कलेक्टर को चिट्ठी लिखकर भारती को आवास उपलब्ध करवाने को कहा था। इसके बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भूरी टेकरी पर बना फ्लैट नंबर 307 भारती के परिवार को मिला। उसे निगम अफसरों ने किताबें व ड्रेस भी दी है। भारती ने कहा, पहली बार अपने घर की छत देखकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मेरा सपना है कि मैं आईएएस बनूं और दूसरों की मदद करूं।

प्रशासन ने ही उजाड़े थे घर

बता दें कि पूर्व में फुटपाथ के सामने भारती के परिवार वालों की एक झोपड़ी थी। इस झोपड़ी को जिला प्रशासन ने ही उजाड़ दिया था। भारती के पिता दशरथ खांडेकर ने मीडिया से बताया है कि सरकारी योजना के तहत झोपड़ियों को तोड़े जाने के बाद कुछ को तो पक्के घर मिले थे लेकिन दो सालों से हमारी सुनवाई नहीं हुई थी। 

रात एक बजे तक पढ़ती हैं भारती

दशरथ बताते हैं कि सुबह मैं मजदूरी पर और पत्नी स्कूल में झाड़ू-पोंछा करने चली जाती है। भारती दोनों छोटे भाइयों को संभालती है। फिर रात 1 बजे तक पढ़ती है। मैं और पत्नी जागकर उसकी रखवाली करते हैं। बता दें कि भारती का परिवार पिछले 15 सालों से वहीं रह रहा है। नगर निगम की तरफ फ्लैट और फ्री पढ़ाई के लिए भारती ने प्रशासन का धन्यवाद किया है और उन्होंने बताया है कि वह आईएएस अधिकारी बनना चाहती हैं।