जयपुर में दिखा मेडिकल मिरेकल, ब्रेन सर्जरी के दौरान मरीज ने किया गायत्री मंत्र का जाप बिना बेहोश किए निकाला गया ब्रेन ट्यूमर

आस्था और मार्डन साइंस का हुआ अनोखा संगम, ब्रेन सर्जरी के दौरान मरीज ने 4 घंटे तक किया गायत्री जाप, सेना के रिटायर्ड हवलदार को ट्यूमर की वजह से पड़ते थे दौरे बंद हो जाती थी आवाज, अवेक ब्रेन सर्जरी के जरिए डाक्टर्स ने बिना बेहोश किए 4 घंटे में निकाला ट्यूमर

Publish: Aug 11, 2021, 12:47 PM IST

जयपुर में दिखा मेडिकल मिरेकल, ब्रेन सर्जरी के दौरान मरीज ने किया गायत्री मंत्र का जाप बिना बेहोश किए निकाला गया ब्रेन ट्यूमर
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जयपुर। राजस्थान में एक हैरत अंगेज वाक्या सामने आया है। यहां विज्ञान और आस्था के अनोखे संगम ने मरीज की जिंदगी लौटा दी। अब इसके बारे में जानकर लोगों को हैरानी हो रही है। जयपुर के नारायणा अस्पताल में ब्रेन ट्यूमर के मरीज ने अपनी सर्जरी के दौरान गायत्री मंत्र का जाप किया। जब डाक्टर्स उसका ऑपरेशन कर रहे थे तब वह जाप करने में व्यस्त था। डाक्टर्स उसका ट्यूमर निकालते रहे इस दौरान गायत्री मंत्र का जाप करने की वहज से उसका ब्रेन एक्टिव रहा।

दरअसल यह सब उसकी सर्जरी के प्रोसीजर का ही हिस्सा था। जिसमें मरीज को बेहोश किए बिना ऑपरेशन किया जाता है। इसे अवेक ब्रेन सर्जरी कहा जाता है। यह देश के चुनिंदा अस्पतालों में एक्सपर्ट न्यूरो सर्जन्स द्वारा की जाती है।  जयपुर के नारायणा अस्पताल के सीनियर न्यूरोसर्जन डॉक्टर केके बंसल की अगुवाई में न्यूरो-सर्जरी टीम ने मरीज की सफल सर्जरी की। सेना के रिटायर्ड हवलदार रिधमल राम के ब्रेन में ट्यूमर था। 57 साल से रिधमल का ट्यूमर  रिमूव कर दिया गया है। दरअसल इस ट्यूमर की वजह से रिधमल को मिर्गी के दौरे पड़ते थे। कई बार कुछ देर के लिए उनकी आवाज बंद हो जाती थी। आवाज का आना जाना काफी बढ़ गया था। दौरे के दौरान वे चाह कर भी बोल नहीं पाते थे।

मरीज की इस तरह की अनूठी न्यूरो सर्जिकल प्रक्रिया को अवेक कैनियोटोमी या अवेक ब्रेन सर्जरी के नाम से जाना जाता है। रिपोर्ट्स की मानें तो देश में ऐसी सर्जरी कम ही देखने को मिलती है।

डाक्टर्स का कहना है कि मरीज को लो ग्रेड ब्रेन ट्यूमर था। ट्यूमर उस जगह पर था जहां से आवाज के लिए जिम्मेदार नर्वस होती हैं। स्पीच एरिया में ब्रेन ट्यूमर काफी जटिल जगह पर था। वही खतरा भी था कि कहीं सर्जरी के कारण मरीज की आवाज ना चली जाए, वहीं पैरालिसिस होने का डर भी था। कई टेस्ट और प्रोसीजर के बाद डाक्टर्स ने अवेक ब्रेन सर्जरी का फैसला लिया। इस सर्जरी के दौरान मरीज को होश में रखते हुए ऑपरेशन किया जाता है। उस दौरान उससे बातें की जाती है, उसका दिमाग एक्टिव रखने की कोशिश की जाती है।  

 यह ऑपरेशन काफी काम्पलीकेटेड था, अगर इसमें जरा सी चूक होती तो मरीज की लाइफ खराब हो सकती थी। मरीज की आवाज के साथ-साथ उसकी सुनने, समझने और रिस्पांस सिस्टम पर असर पड़ सकता था। उसका ब्रेन रिएक्ट कर रहा है, इसका पता लगाने के लिए न्यूरोलॉजिस्ट ने मरीज को एक्टिव रखा कभी वे पैर की कभी हाथ की उंगलियों को हिलाने का आदेश देते। मरीज इस दौरान पूरी तरह से तत्परता से उस पर रिस्पांस देता जा रहा था। वहीं मरीज को गायत्री मंत्र का जाप करने का आदेश दिया ताकि उसकी आवाज पर क्या असर पड़ रहा है, इस बात का अंदाजा डाक्टर्स को लग सके। जैसे-जैसे डॉक्टर कह रहे थे, मरीज रिएक्ट करता जा रहा था। सफल सर्जरी के लिए आवश्यक था कि मरीज के ट्यूमर के अलावा किसी और नर्व को नुकसान ना पहुंचे। ताकि उसे अपनी जिंदगी जीने में कोई दिक्कत ना आए।

इस सर्जरी के बारे में अस्पताल की डायरेक्टर डाक्टर माला ऐरन का कहना है कि इसमें हाई एंड माइक्रोस्कोप के उपयोग से ब्रेन एरिया को बारीकी से देखने में मदद मिली। इस तरह की सर्जरी के लिए काफी एक्सपीरियंस न्यूरो सर्जिकल टीम के साथ-साथ अन्य सुविधाओं की जरूरत होती है। नई तकनीक और अनुभवी डाक्टरों की टीम ने मरीज की सफल सर्जरी की, अब वह आसानी से अपना जीवन जी सकेगा।