जापान ने बढ़ाई दुनिया की चिंता, फुकुशिमा का रेडियोएक्टिव पानी समुद्र में डालने की तैयारी

जापान ने फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट से 10 लाख टन से अधिक पानी समुद्र में छोड़ने की योजना बनाई है, चीन ने इसका कड़ा विरोध किया है, वहीं अमेरिका जापान के समर्थन में है

Updated: Apr 13, 2021, 02:09 PM IST

जापान ने बढ़ाई दुनिया की चिंता, फुकुशिमा का रेडियोएक्टिव पानी समुद्र में डालने की तैयारी
Photo Courtesy: Newyork Times

टोक्यो। जापान ने फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट से 10 लाख टन से अधिक रेडियोएक्टिव पानी समुद्र में छोड़ने की योजना बनाई है। जापान सरकार ने मंगलवार को बयान जारी कर इस बात की जानकारी दी है। जापान द्वारा इतने भारी मात्रा में दूषित पानी को समुद्र में फेंके जाने के फैसले को मछली उद्योग के लिए बड़ा झटका के रूप में देखा जा रहा है। जापान के इस ऐलान ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। चीन ने जापान के इस कदम का सख्त विरोध किया है।

जापान सरकार ने बताया है कि अगले दो साल में पानी छोड़ने का काम शुरू हो जाएगा जिसमें दशकों का समय लगेगा। जापान के फुकुशिमा स्थित न्यूक्लियर प्लांट में करीब 12.5 लाख टन दूषित पानी जमा है। साल 2011 में आई सुनामी में फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट बुरी तरह से प्रभावित हुआ था। यहां रेडियोएक्टिव एलिमेंट लीक होने लगे थे, नतीजतन हजारों की संख्या में लोगों को फुकुशिमा छोड़ना पड़ा था। उसी दौरान प्लांट को ठंडा रखने के लिए उसमें पानी छोड़े गए थे, जो अब बुरी तरह से जहरीला और दूषित हो गया है।

जापान के इस फैसले के बाद पूरी दुनिया में बहस छिड़ गई है। चीन ने तीखे तेवर अपनाते हुए इसे गैर-जिम्मेदाराना रवैया बताया है। चीन ने कहा कि यदि जापान ऐसा करता है तो हमारे पास उसके खिलाफ सख्त कदम उठाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं होगा। दक्षिण कोरिया ने भी जापान के इस योजना को पूरी तरह से गलत करार दिया है। दक्षिण कोरिया का कहना है कि इससे बड़ी संख्या में समुद्री जीवों की जान खतरे में आ सकती है।

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उधर अमेरिका ने जापान के इस निर्णय का स्वागत किया है। अमेरिका ने कहा है कि जापान ने विश्वस्तर पर स्वीकृत न्यूक्लियर सुरक्षा मानकों के अनुसार एक दृष्टिकोण अपनाया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि जापान अपने फैसले को लेकर पारदर्शी रही है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने भी जापान के फैसले का समर्थन किया है और कहा है कि इसमें कुछ भी असुरक्षित नहीं है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसा अन्य देशों में न्यूक्लियर प्लांट्स के पानी का निस्तारण किया जाता है।

जापान ने कहा है कि पानी समुद्र में छोड़ने की प्रक्रिया तभी शुरू की जाएगी जब पानी की सेफ्टी लेवल हम सुनिश्चित कर लेंगे। जापान का तत्व है कि पानी में मौजूद रेडियोएक्टिव तत्व पहले ही निकाल लिए गए हैं ऐसे में यह पानी जलीय जीवों के लिए सुरक्षित है और इससे कोई नुकसान नहीं होगा। जापान ने इस पानी साफ किया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि उसमें से खतरनाक आइसोटोप्स निकालने के लिए एक बार और फिल्टर करने की जरूरत है।