तालिबान अफगानिस्तान की राजधानी काबुल को 90 दिनों में अपने कब्जे में ले सकता है 

यूरोपीय संघ के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इस्लामिक चरमपंथी अफगानिस्तान के 65 फीसदी हिस्से को अपने नियंत्रण में ले चुके हैं और देश की 11 प्रांतीय राजधानियों तक पहुंच चुके हैं 

Updated: Aug 12, 2021, 09:03 AM IST

तालिबान अफगानिस्तान की राजधानी काबुल को 90 दिनों में अपने कब्जे में ले सकता है 


नई दिल्ली 
अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने अमेरिका के ख़ुफ़िया विभाग को जानकारी दी है कि तालिबान लड़ाके बहुत जल्द अफगानिस्तान की राजधानी काबुल को 30 दिनों के भीतर दुनिया से अलग थलग कर  सकते हैं। सम्भावना ये भी है कि 90 दिनों के अंदर काबुल पर तालिबान का कब्जा हो जाए। अधिकारी ने नाम नहीं छपने की शर्त पर रायटर से बात करते हुए कहा कि अमेरिकी नेतृत्व वाली विदेशी सेना के अफगानिस्तान से लौटने का तालिबान पूरा फायदा उठा रहा है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि काबुल कितने दिनों तक अपने को बचाये रख सकता है। अधिकारी ने यह भी कहा कि हालांकि ये पहले से तय निष्कर्ष नहीं है। अब देखना ये है कि अफगान सुरक्षा बल तालिबान का कितना विरोध करते हैं, अगर उन्होंने तालिबान की ताकतों का मुंहतोड़ जवाब दिया तो स्थिति पलट भी सकती है।  
उधर, यूरोपीय संघ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस्लामिक चरमपंथी अफगानिस्तान के 65 फीसदी हिस्से को अपने कब्जे में ले चुके हैं और देश की 11 प्रांतीय राजधानियों तक वो पहुंच चुके हैं या इन राजधानियों को अपने कब्जे में ले लेने की धमकी दी है।  उत्तर पूर्वी प्रान्त बदख्शां की राजधानी फैजाबाद को बुधवार को तालिबानी अपने नियंत्रण में ले लिए। तालिबान के कब्जे में आने वाली ये आठवीं प्रांतीय राजधानी है। 
कंधार शहर में लगातार राकेट से हमले हो रहे हैं।  यहां लड़ाई बहुत तेज हो गई है। शहर में यहां वहां अफगान सुरक्षा बलों के शव बिखरे पड़े हैं, घायल तालिबान लड़ाके भी चिकित्सा सहायता की गुहार लगा रहे हैं।  एक पश्चिमी सुरक्षा सूत्र के अनुसार काबुल के सभी प्रवेश द्वार बंद हो गए हैं। हिंसा के चलते बहुत से नागरिक यहां से पलायन कर चुके हैं। डर इस बात का भी है कि राजनयिक क्वार्टरों में घुसकर कोई आत्मघाती हमला न कर दे। इसलिए मौका मिलने पर लोग जल्दी से जल्दी यहां से भाग रहे हैं। 5 विदेशी सुरक्षा अधिकारियों ने रायटर को बताया कि कई देश यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके कर्मचारी काबुल से जल्दी से जल्दी लौट जाएं। अंतर्राष्ट्रीय एयरलाइन्स को भी कर्मचारियों को निकलने के लिए कहा जा रहा है। 
दरअसल विदेशी सेना के लौटने के साथ ही तालिबान के हौंसले बुलंद हो गए हैं और वो अमेरिका समर्थित अफगानिस्तान की सरकार को हराना चाह्ता है, ताकि सख्त इस्लामिक  कानूनों को देश में दुबारा लागू किया जा सके। हाल के दिनों में तालिबानी ताकतों ने जिस तेजी से हमले किये हैं उसने अफगानिस्तान की सरकार और उनके सहयोगियों  को झकझोर दिया है। इस बीच अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता निड प्राइस ने कहा है कि तालिबान के ये हमले 2020 के समझौते के खिलाफ हैं। प्राइस ने कहा कि 2020 में तालिबान ने एक शांति समझौते पर बातचीत करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की थी, जिसके जरिए स्थाई और व्यापक युद्ध विराम लागू  हो सके पर अब वो इससे पीछे हट रहा है। प्राइस ने ये भी कहा कि प्रांतीय राजधानियों पर हमला करना और बेगुनाह नागरिकों को निशाना बनाना समझौते की भावना के विपरीत है। हालाँकि तालिबान ने नागरिकों को निशाना बनाये जाने से इंकार किया है। प्राइस ने ये भी कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका अफगानिस्तान में शांति समझौते  के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहमति बनाने के लिए काम कर रहा है। दोहा शांति वार्ता में आये गतिरोध को तोड़ने की भी कोशिश चल रही है। 
इस बीच उत्तर के सबसे बड़े शहर मजार ए शरीफ की रक्षा के लिए अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी वहां पहुंचे हैं ताकि वहां के बड़े सरदारों के साथ बैठक की जा सके क्योंकि  तालिबान इसके काफी करीब पहुंच चुका है। बदख्शां के प्रांतीय परिषद के सदस्य जवाद मुजादीदी ने कहा है कि फैज़ाबाद के पतन के साथ ही उत्तर पूर्व का पूरा इलाका तालिबान के नियंत्रण में आ गया है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि अफगानिस्तान से अपनी सेनाओं को वापस बुलाने के अपने फैसले पर उन्हें कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने अफगान नेताओं से अपनी मातृभूमि के लिए लड़ने का आग्रह किया है। वाइट हाउस के प्रेस सचिव के अनुसार अमेरिका, अफगानिस्तान की बिगड़ती  सुरक्षा स्थितियों पर नजर बनाये हुए है।  31 अगस्त तक अमेरिकी सेना की वापसी से पहले अफगानी सुरक्षा बलों को अमेरिकी सेना का सहयोग और पूरा समर्थन है।  बस जरुरत पुरजोर तरीके से तालिबान का मुकाबला करने की है।