भोपाल: सिर मुंडवाने के बाद भाजपा कार्यालय के बाहर ओबीसी वर्ग के चयनित शिक्षकों ने दिया धरना

प्रदेश भर के ओबीसी चयनित शिक्षक सोमवार से राजधानी में जुटे हैं, कल लोक शिक्षण संचालनालय के समक्ष दिया था धरना, आज भाजपा कार्यालय के बाहर जुटे

Updated: Mar 22, 2022, 04:20 PM IST

भोपाल: सिर मुंडवाने के बाद भाजपा कार्यालय के बाहर ओबीसी वर्ग के चयनित शिक्षकों ने दिया धरना

भोपाल। पिछले तीन वर्षों से नियुक्ति का इंतजार कर रहे ओबीसी वर्ग के चयनित शिक्षकों का सब्र का बांध टूट गया है। वे शीघ्र नियुक्‍ति की मांग को लेकर दो दिन से भोपाल में डटे हुए हैं। मंगलवार को चयनित शिक्षकों ने बीजेपी कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। यहां से पुलिस ने उन्हें किसी तरह हटाया। इसके पहले कल ही चयनित शिक्षकों ने सिर मुंडवाकर विरोध प्रदर्शन किया था।

दरअसल, मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया फिर से शुरू हो गई है, लेकिन वेटिंग लिस्ट वाले OBC के चयनित उम्मीदवारों को स्कूल शिक्षा विभाग ने ऑफर लेटर नहीं दिए हैं। होली से दो दिन पहले वेटिंग लिस्ट में शामिल 1776 चयनित शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिए गए थे लेकिन इसमें 11 विषयों के ओबीसी अभ्यर्थी वंचित रह गए। 

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इसी बात से आक्रोशित ओबीसी वर्ग के चयनित शिक्षक सोमवार को राजधानी में लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआइ) के समक्ष जुटे और धरना प्रदर्शन किया। सोमवार की रात 10 बजे धरना प्रदर्शन पुलिस प्रशासन के आश्वासन के बाद खत्म किया था। पुलिस प्रशासन ने मंगलवार को मुख्यमंत्री से उन्हें मिलाने का आश्वासन दिया था। सोमवार को धरने के दौरान 10 चयनित शिक्षकों ने मुंडन कराकर शासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया था।

प्रशासन द्वारा मिले आश्वासन के मुताबिक मंगलवार को जब चयनित शिक्षकों की सीएम चौहान से मुलाकात नहीं हुई तो वे बीजेपी दफ्तर के बाहर जमा हो गए। यहां उन्होंने धरना प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू कर दी। यहां भारी संख्या में मौजूद पुलिस बल ने उन्हें किसी तरह हटाया। चयनित शिक्षक बीजेपी दफ्तर के बाहर ही ज्ञापण देकर वहां से वापस लौटे। 

OBC चयनित शिक्षक संघ का कहना है कि 16 मार्च को स्‍कूल शिक्षा विभाग ने जो आदेश जारी किया, उसमें किसी भी विषय में ओबीसी अभ्यर्थियों की नियुक्ति नहीं जारी की गई। अत: पांच विषय में 600 अभ्यर्थी होल्ड से प्रभावित हैं और 11 विषयों में 1400 अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित हैं। इस तरह कुल दो हजार अभ्यर्थियों के नियुक्ति पत्र रुके हुए हैं। जिसमें ज्यादातर अभ्यर्थी आर्थिक तंगी और मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं।