भीमा कोरेगांव केस में गिरफ्तार एक्टिविस्टों के ख़िलाफ़ प्लांट किए गए फ़र्ज़ी सबूत, फ़ोरेंसिक रिपोर्ट में खुलासा

वॉशिंगटन पोस्ट में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ अमेरिकी फ़ॉरेंसिंक फ़र्म आर्सेनल ने पाया है कि रोना विल्सन के लैपटॉप में मिले जिन पत्रों को मुख्य सबूत माना गया, वो लैपटॉप को हैक करके प्लांट किए गए थे

Updated: Feb 10, 2021, 09:21 PM IST

भीमा कोरेगांव केस में गिरफ्तार एक्टिविस्टों के ख़िलाफ़ प्लांट किए गए फ़र्ज़ी सबूत, फ़ोरेंसिक रिपोर्ट में खुलासा
Photo Courtesy : The washington post

नई दिल्ली। भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ्तार एक्टिविस्ट्स और बुद्धिजीवियों के खिलाफ जिन दस्तावेजों को मुख्य सबूत माना गया है, वे दरअसल प्लांटेड थे। इन दस्तावेजों को एक्टिविस्ट रोना विल्सन के लैपटॉप को हैक करके उसके एक हिडेन फोल्डर में प्लांट किया गया था। ये खुलासा जानेमाने अमेरिकी अखबार द वाशिंगटन पोस्ट ने अपनी एक रिपोर्ट में किया है। अखबार के मुताबिक विल्सन के लैपटॉप में सबूत प्लांट किए जाने की बात फोरेंसिक जांच करने वाली अमेरिकी फर्म आर्सेनल की जांच में प्रमाणित हुई है।  

वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी डिजिटल फॉरेंसिक फर्म आर्सेनल कंसल्टिंग की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि साइबर हमलावरों ने एक्टिविस्ट रोना विल्सन की गिरफ्तारी से पहले उनके लैपटॉप में एक विशेष मालवेयर के जरिए घुसपैठ की। इसके बाद उनके लैपटॉप में तकरीबन 10 ऐसे फर्जी सुबूत डाले जिससे यह साबित हो सके कि उनका लिंक माओवादियों और आतंकवादियों से था। इसी तरह के सबूत दूसरे आरोपियों के लैपटॉप और कंप्यूटर में भी प्लांट किए गए। ऐसा करते समय कई बार एक ही सर्वर औऱ आईपी एड्रेस का इस्तेमाल भी किया गया। 

वॉशिंगटन पोस्ट की इस रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने जिस पत्र के आधार पर विल्सन पर माओवादियों के साथ लिंक होने और कथित आतंकियों और माओवादियों से हथियार मंगाने के बारे में बात करने का आरोप लगाया था, वह इन्हीं प्लांटेड दस्तावेजों में शामिल था। इन्हीं पत्रों के आधार पर प्रतिबंधित समूहों के साथ मिलकर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रचे जाने का आरोप भी लगाया गया था।

वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में साइबर अटैक करने वाले अपराधी की पहचान तो नहीं दी गई है, लेकिन यह जरूर बताया है कि इस साजिश के एकमात्र शिकार विल्सन ही नहीं थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई अन्य हाई प्रोफाइल मामलों में भी आरोपियों के खिलाफ झूठे सुबूत प्लांट करने के लिए इस तरह के कारनामे किए गए हैं।

अखबार के मुताबिक डिजिटल फॉरेंसिक फर्म आर्सेनल की रिपोर्ट में कहा गया है की तेलुगू कवि और मामले के सह-आरोपी वरवर राव के अकॉउंट का उपयोग करके किसी व्यक्ति ने विल्सन को कई संदिग्ध ईमेल भेजे। इनमें से एक ईमेल खोलने पर उनके लैपटॉप में मैलवेयर डाउनलोड हो गया, जिसके जरिए हैकर ने विल्सन के लैपटॉप को एक्सेस किया और उसमें फर्जी सबूत प्लांट किए।

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी फर्म की फॉरेंसिक जांच में यह बात सामने आई है कि हैकर ने विल्सन के लैपटॉप में एक गुप्त फोल्डर बनाया जिसमें 10 फर्जी दस्तावेज प्लांट गए थे। यह सभी पात्र माइक्रोसॉफ्ट वर्ड के जिस नए वर्जन का उपयोग करके बनाए गए थे, वह विल्सन के लैपटॉप में था ही नहीं। जांच में यह भी पता चला है कि गुप्त फोल्डर में प्लांट किए गए उन दस्तावेजों को विल्सन के लैपटॉप पर एक बार भी खोला नहीं गया था। 

क्या है भीमा कोरेगांव का मामला

दरअसल, हर साल जब 1 जनवरी को दलित समुदाय के लोग भीमा कोरेगांव में जमा होते है। वो यहां 'विजय स्तम्भ' के सामने सम्मान प्रकट करते हैं। इसी जश्न के दौरान साल 2018 में दलितों और मराठों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। पुलिस का आरोप है कि यहां हिंसा भड़काने में सामाजिक कार्यकर्ताओं का हाथ है। इस मामले में वरवर राव, सुधा भारद्वाज, रोना विल्सन और अरुण फरेरा, गौतम नवलखा और वेरनॉन गोन्जाल्विस जैसे एक्टिविस्टों और बुद्धिजीवियों को आरोपी बनाया गया है। खास बात यह है कि उद्धव ठाकरे सरकार के आने के बाद इस मामले की जांच एनआईए को सौंप दी गई। अब इस रिपोर्ट से पता चल रहा है कि जिन दस्तावेजों की बदौलत इन सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ देशद्रोह समेत कई संगीन धाराओं में मामले दर्ज किए, वे दरअसल फर्जी और प्लांटेड थे। रिपोर्ट के मुताबिक विल्सन के वकीलों ने इस फॉरेंसिक रिपोर्ट को बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर अपनी उस याचिका में भी शामिल किया है, जिसमें अदालत ने नए तथ्यों की रौशनी में केस को खारिज करने की दरख्वास्त की गई है।