नहाय खाय के साथ आज से शुरू हुआ लोकआस्था का महापर्व छठ, 36 घंटे का होता है निर्जला व्रत

चार दिवसीय छठ पूजा महापर्व की शुरुआत आज 28 अक्टूबर को नहाय खाय से हो रही है। भगवान सूर्य और छठी माता को समर्पित महापर्व छठ हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है।

Updated: Oct 28, 2022, 09:46 AM IST

नहाय खाय के साथ आज से शुरू हुआ लोकआस्था का महापर्व छठ, 36 घंटे का होता है निर्जला व्रत
Photo Courtesy: Newstrack.com

पटना। नहाय खाय के साथ लोकआस्था के महापर्व छठ की शुरुआत आज से हो रही है। आज छठ व्रती शुद्ध जल स्नान कर नए वस्त्र धारण कर पूजा के बाद चना, दाल, कद्दू की सब्जी का सेवन करेंगे। हिंदू पंचांग के मुताबिक, हर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का दिन नहाय-खाय का होता है।

नहाय खाय के दिन छठ व्रती सिर्फ एक ही बार खाना खाते हैं। इस दौरान तैयार किए गए भोजन में सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं लहसुन और प्याज खाने की मनाही रहती है। इसके अलावा बैंगन आदि सब्जियों को भी नहाय-खाय के दिन खाने में शामिल नहीं किया जाता।

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नहाय-खाय के दिन भोजन करने के बाद व्रती अगले दिन शाम को खरना पूजा करने के बाद भोजन करती हैं। इस पूजा में महिलाएं शाम के समय लकड़ी के चूल्हे पर गुड़ की खीर बनाकर उसे प्रसाद के तौर पर खाती हैं और इसी के साथ व्रती महिलाओं का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है। 

मान्यता है कि खरना पूजा के बाद ही घर में देवी षष्ठी (छठी मईया) का आगमन हो जाता है। छठ पूजा का तीसरा दिन काफी खास माना जाता है। इस दिन शाम को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। छठ पूजा के चौथे दिन व्रती द्वारा उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता। फिर पारण करने के बाद छठ पर्व का समापन होता है।