अनाज की बर्बादी गरीबों से चोरी करने के बराबर है, 406 करोड़ की अनाज बर्बादी को लेकर राहुल का केंद्र पर हमला

संसदीय समिति की रिपोर्ट में हुआ खुलासा, तीन सालों में सरकारी भंडारों में 406 करोड़ के अनाज की हुई बर्बादी, 1.39 करोड़ रुपए का अनाज चोरी हुआ

Updated: Aug 12, 2021, 10:39 AM IST

अनाज की बर्बादी गरीबों से चोरी करने के बराबर है, 406 करोड़ की अनाज बर्बादी को लेकर राहुल का केंद्र पर हमला

नई दिल्ली। बीते तीन सालों में 406 करोड़ के अनाज की हुई बर्बादी पर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि अनाज की बर्बादी गरीब से चोरी करने जैसा ही है। राहुल गांधी ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से यह टिप्पणी की है। 

संसदीय स्थाई समिति द्वारा हाल ही में पेश एक आंकड़े से सरकारी भंडारों में अनाज की बर्बादी का खुलासा हुआ है। संसदीय स्थाई समिति की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले तीन सालों में सरकार द्वारा उपार्जित अनाज में 406 करोड़ के मूल्य के अनाज की बर्बादी हुई। इतना ही नहीं इसी अवधि में 1.39 करोड़ के अनाज की चोरी भी हुई। 

अंग्रेजी के एक प्रमुख अख़बार ने अनाज की बर्बादी के संबंध में अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जितनी अनाज की बर्बादी हुई है। उससे कम से कम देश के 17 लाख लोगों के लिए साल की एक चौथाई अवधि के लिए भोजन की पर्याप्त व्यवस्था हो सकती थी। लेकिन सरकारी लापरवाही के कारण इतने बड़े स्तर पर अनाज की बर्बादी हुई। 

इस अवधि में हुई अनाज की बर्बादी सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य से भी अधिक रही है। 2019-20 में केंद्र सरकार ने अनाज को उपार्जित करने की प्रक्रिया में अधिकतम 0.07 फ़ीसदी तक अनाज की बर्बादी का लक्ष्य निर्धारित किया था। लेकिन यह बर्बादी 0.10 फीसदी तक रही। प्रतिशत में यह नुकसान भले ही कम प्रतीत हो रहा हो, लेकिन चूंकि सरकार बड़ी मात्रा में अनाज उपार्जित करती हैं, लिहाज़ा नुकसान का आंकड़ा भी अधिक है।

उदाहरण के तौर पर 2019-20 में सरकारी भंडारों में करीब 1 लाख टन गेहूं की बर्बादी हुई। जबकि 2020-21 में भी गेहूं की बर्बादी इसी के आसपास रही। 2020 के ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 107 देशों में 94वें स्थान पर है। एक तरफ सड़क और फुटपाथ पर हजारों की संख्या में भूख से तड़पते लोगों की भयावह तस्वीर है, तो वहीं दूसरी तरफ इतनी बड़ी मात्रा में अनाज सरकारी लापरवाही की भेंट चढ़ रहा है।