नई पीढ़ी को आदेश न दें, बातचीत करें, हम मनमानी नहीं कर सकते, RSS चीफ ने इशारों में दी PM मोदी को नसीहत

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि नई पीढ़ी केवल आदेश नहीं मानती, बल्कि हर बात का तर्क चाहती है। उन्होंने युवाओं के साथ संवाद, अपनापन और सही उदाहरण पेश करने पर जोर दिया।

Updated: Jul 25, 2026, 02:03 PM IST

नई दिल्ली। नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर मंतर एवं देश के बाकी हिस्सों में जारी प्रदर्शनों के बीच RSS प्रमुख मोहन भागवत ने नई पीढ़ी को लेकर बड़ा संदेश दिया है। भागवत ने शनिवार को दिल्ली में कहा कि आज की नई पीढ़ी बहुत सारे सवाल पूछती है। हमें आदेश देने की बजाय उनसे बातचीत करनी चाहिए।

मोहन भागवत शनिवार को विश्व मांगल्य सभा द्वारा 'युगानुकूल मातृत्व' विषय पर आयोजित प्रबोधन बैठक के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज के युवाओं का स्वभाव पहले की पीढ़ी से अलग है। नई पीढ़ी का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि पहले के समय में माता-पिता की बात बिना किसी सवाल के मान ली जाती थी। 

उन्होंने कहा, 'जब हम छोटे थे तो माता-पिता जो कहते थे, वही अंतिम होता था। कोई बहस नहीं होती थी। श्रद्धा थी और प्रतिक्रिया भी नहीं होती थी। लेकिन अब समय बदल गया है। नई पीढ़ी सवाल पूछती है और उन्हें हर बात का तर्क बताना पड़ता है।' बता दें कि उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में पेपर लीक के मुद्दे को लेकर GenZ में नाराजगी देखने को मिल रही है। 

भागवत ने कहा कि आज का माहौल भौतिक साधनों और प्रचार से काफी प्रभावित है। ऐसे में युवाओं को भ्रम और गलत सूचनाओं से बाहर निकालने की जरूरत है। भागवत ने कहा, 'नई पीढ़ी को बहुत अपनापन देने की जरूरत है, उन्हें समय देने की जरूरत है और सबसे ज्यादा संवाद की जरूरत है। आज डिक्टेशन नहीं, डिस्कशन की जरूरत है। ऑर्डर नहीं, कॉन्शसनेस (जागरूकता) की जरूरत है।'

RSS प्रमुख ने कहा कि आज परिवारों में आपसी बातचीत पहले की तुलना में काफी कम हो गई है। उनका मानना है कि बच्चों और युवाओं के साथ नियमित संवाद ही उन्हें सही दिशा दे सकता है। भागवत ने कहा कि केवल आदेश देने से बात नहीं बनेगी, बल्कि परिवार और समाज को युवाओं के साथ समय बिताना होगा और उनकी बात भी सुननी होगी।

एक अन्य सवाल के जवाब में मोहन भागवत ने कहा कि नई पीढ़ी को लेकर यह धारणा सही नहीं है कि वह पूरी तरह भटक गई है। उन्होंने कहा, 'अगर समाज में लोग अपने जीवन से अच्छे और प्रमाणिक उदाहरण पेश करेंगे, तो उसका असर नई पीढ़ी पर जरूर पड़ेगा। नई पीढ़ी को सही आदर्श नहीं मिलते। जहां उन्हें अच्छे और सच्चे उदाहरण मिलते हैं, वहां वे समाज के लिए अपना जीवन तक समर्पित कर देते हैं।'