MP: सागर में जहरीली शराब से 50 मौतों का दावा, सपा ने लगाए पोस्टमार्टम नहीं होने के आरोप
समाजवादी पार्टी ने मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि सागर कलेक्टर, एसपी और बंडा एसडीएम समेत उन सभी अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब से हो रही मौतों का सिलसिला नहीं थम रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सागर में जहरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या 22 हो गई है। हालांकि, प्रशासन द्वारा मौत का असली आंकड़ा अबतक नहीं बताया जा रहा है। उधर, विपक्षी दलों ने जहरीली शराब से 50 से अधिक मौतों का दावा किया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के बाद अब समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव ने भी कहा है कि जहरीली शराब से 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। यादव का दावा है कि उनकी पार्टी ने पिछले पांच महीनों में छह बार ज्ञापन देकर बंडा में अवैध और जहरीली शराब की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन प्रशासन ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
डॉ. यादव ने सागर में पत्रकारों को ज्ञापनों की प्रतियां दिखाते हुए कहा कि अप्रैल से ही प्रशासन को बंडा क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार की जानकारी दी जा रही थी। ज्ञापनों के जरिए चेतावनी दी गई थी कि यह शराब लोगों के जीवन के लिए खतरा बन रही है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद समय रहते कार्रवाई नहीं की गई। अब बंडा में हुई मौतों के बाद पार्टी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
सपा प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि जहरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या 50 तक पहुंच चुकी है, जबकि प्रशासन की ओर से 22 मौतों की पुष्टि की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम कराए बिना अंतिम संस्कार कराया जा रहा है, जिससे मौतों का वास्तविक आंकड़ा सामने नहीं आ पा रहा है।
समाजवादी पार्टी ने मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि सागर कलेक्टर, एसपी और बंडा एसडीएम समेत उन सभी अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए, जिन तक अवैध शराब की बिक्री की शिकायतें पहुंची थीं। सपा ने कहा कि यदि ज्ञापनों पर समय रहते कार्रवाई की जाती और अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगती तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी। पार्टी ने प्रशासन से जवाब मांगा है कि बार-बार चेतावनी मिलने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं की गई।




