उत्तर प्रदेश में बाढ़ का कहर, 23 जिलों में बिगड़े हालात, 16 हजार लोगों को किया गया रेस्क्यू, 8 की मौत
उत्तर प्रदेश में बारिश से 23 जिलों में बाढ़ जैसे हालात हैं। 16 हजार से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू किया गया, जबकि हादसों में 8 लोगों की मौत हुई है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मानसूनी बारिश और बांधों से छोड़े जा रहे पानी ने बाढ़ का संकट और बढ़ा दिया है। राज्य के 23 जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। बाढ़ के बीच राज्य में अब तक 16 हजार से ज्यादा लोगों को प्रभावित इलाकों से सुरक्षित निकाला जा चुका है। वाराणसी और चित्रकूट सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में हैं। गंगा-यमुना समेत 10 से ज्यादा नदियां उफान पर हैं, जिससे सैकड़ों गांवों का संपर्क टूट गया है और खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूब गई हैं। इस बीच आज 65 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट है, जबकि मथुरा, आगरा और कन्नौज समेत 16 जिलों में भारी बारिश हो सकती है।
हालांकि, वाराणसी में गंगा का जलस्तर अब घट रहा है, लेकिन वरुणा नदी के किनारे बाढ़ का असर अभी बना हुआ है। निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों की परेशानी बढ़ी हुई है। बिजनौर में गंगा का पानी हाईवे के ऊपर से बह रहा है। यहां बच्चों को बैलगाड़ी से स्कूल जाते हुए देखा गया। गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर बढ़कर खतरे के निशान को पार कर गया है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन अलर्ट पर है और निगरानी बढ़ाने के साथ ड्रोन से भी हालात का जायजा लिया जा रहा है।
कानपुर के मेहरबान सिंह का पुरवा, गोपालपुर और मर्दनपुर गांवों में पांडव नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इसके चलते दर्जनों घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। पानी बढ़ने के बाद स्थानीय लोग अपना सामान सुरक्षित जगहों पर ले जाने में जुटे हैं। राज्य में गंगा, यमुना, मंदाकिनी, टोंस, बेलन, सरयू, घाघरा और शारदा समेत कई नदियां उफान पर हैं। लगातार बारिश और बांधों से छोड़े जा रहे पानी के कारण बाढ़ का संकट अभी थमा नहीं है।
चित्रकूट में बाढ़ और बारिश ने गंभीर हालात पैदा कर दिए हैं। मंदाकिनी नदी में आई बाढ़ से रामघाट समेत 16 गांव जलमग्न हैं। जिले में अब तक 565 मकान गिर चुके हैं। एक दर्दनाक हादसे में 32 वर्षीय कल्लू यादव, उनके पांच वर्षीय बेटे अंश और एक वर्षीय बेटी गुड़िया की कच्चे मकान के मलबे में दबकर मौत हो गई। हादसे में उनकी पत्नी और एक बेटी गंभीर रूप से घायल हैं। 29 अगस्त को मंदाकिनी का जलस्तर 135.200 मीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। पिछले 48 घंटे से जलस्तर करीब 129 मीटर बना हुआ है, जबकि खतरे का निशान 126.500 मीटर है। रामघाट क्षेत्र में बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।
बारिश और बाढ़ से हुए हादसों में चित्रकूट, इटावा, बांदा, सीतापुर, बाराबंकी और संभल समेत कई जिलों में आठ लोगों की मौत हुई है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। इटावा में बिजली गिरने से 12वीं कक्षा के 18 वर्षीय छात्र दिव्यांश रावत की मौत हो गई। बांदा में पेड़ गिरने से बाइक सवार की जान चली गई, जबकि दो चचेरे भाई घायल हो गए। सीतापुर में कच्ची दीवार गिरने से एक महिला की मौत हुई। बाराबंकी में दीवार गिरने से ससुर की मौत हो गई और दामाद घायल हो गया। संभल में बिजली गिरने से मकान ढहने पर पांच लोग घायल हो गए, जबकि छत से गिरकर एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन ने राहत और बचाव दल तैनात किए हैं। अब तक 16 हजार से अधिक लोगों को प्रभावित इलाकों से निकालकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा चुका है। दूसरी ओर बारिश का खतरा अभी टला नहीं है। मथुरा, आगरा और कन्नौज समेत 16 जिलों में भारी बारिश की संभावना है, जबकि 65 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी है।




