UPSC में पेपर लीक नहीं होता, NTA को उनसे सीखने की जरूरत: सुप्रीम कोर्ट
देशभर में 3 मई को NEET-UG परीक्षा हुई थी। 7 मई की शाम पेपर लीक की खबर सामने आई थी। 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई। 21 जून को री-एग्जाम होगा।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी (NEET-UG) में हुई गड़बड़ी को लेकर एनटीए (NTA) को कड़ी फटकार लगाई है। इसे लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से कड़े सवाल भी पूछे गए। सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए से पूछा कि ये गड़बड़ी कैसे हुई? इस दौरान सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि कोर्ट के निर्देश के मुताबिक हलफनामा दाखिल कर दिया गया है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की तरफ से डॉ. राधाकृष्णन से भी सवाल किए गए, जिनकी अध्यक्षता में एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई थी।
इस सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि हमें अपने देश के युवाओं को निराश नहीं करना चाहिए। यह उनके लिए बहुत बड़ा मानसिक तनाव है, क्योंकि इस परीक्षा के पीछे उनका बहुत सारा समय और भावनाएं दांव पर लगी होती हैं। सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि एक्सर्ट कमेटी के जो भी सुझाव और सिफारिशें थीं, उन्हें इसी साल लागू किया जाना था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए और डॉ. राधाकृष्णन से सवाल करते हुए पूछा कि आप शुरू से ही इस एक्सपर्ट कमेटी का हिस्सा थे, तो इन नियमों को लागू करने पर कितनी निगरानी रखी गई? आखिर ये गड़बड़ी कैसे हो गई?
कोर्ट ने आगे कहा कि हाई-पॉवर कमेटी (HPC) की सिफारिशों और आपकी निगरानी के बावजूद अगर ऐसी चीज हुई है तो इसका मतलब है कि या तो सिफारिशों में ही कोई कमी थी, या फिर उनकी ठीक से निगरानी नहीं की गई। इस मामले पर जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि संबंधित मंत्रालय एक हलफनामा दाखिल करेगा। इसमें यह बताया जाएगा कि आगे से परीक्षाओं को किस तरह और किस प्रक्रिया के तहत पूरा कराया जाएगा। साथ ही, इसमें ये भी साफ करना होगा कि संस्था को ठीक तरीके से चलाने के लिए अनुभवी विशेषज्ञों की नियुक्ति और एक मजबूत सिस्टम कैसे तैयार किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारा मकसद ये सुनिश्चित करना है कि एनटीए तकनीकी और बौद्धिक दोनों रूप से इतनी मजबूत हो कि 2024 या 2026 जैसी गड़बड़ियां दोबारा न हों। कोर्ट ने 2 जुलाई से पहले हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है।




