छात्रों पर बर्बर हमले के जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो, राहुल गांधी ने गृहमंत्री अमित शाह को लिखा पत्र

हमारे छात्र एक निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे थे। उनकी बात सुनने के बजाय, सुरक्षा बलों ने उन पर अंधाधुंध बल का प्रयोग किया, जिसमें घातक हथियारों और आंसू गैस का इस्तेमाल भी शामिल था: राहुल गांधी

Updated: Jul 26, 2026, 03:49 PM IST

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 20 जुलाई को दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और पेलेट गन के इस्तेमाल की आलोचना की है। उन्होंने गृह मंत्री को पत्र लिखकर इस हिंसा की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

गृहमंत्री शाह को संबोधित पत्र में राहुल गांधी ने लिखा है कि, '20 जुलाई, 2026 को दिल्ली में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बर्बर हमले किए गए, उसी की जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए मैं यह पत्र लिख रहा हूँ। हमारे छात्र एक निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे थे। उनकी बात सुनने के बजाय, सुरक्षा बलों ने उन पर अंधाधुंध बल का प्रयोग किया, जिसमें घातक हथियारों और आंसू गैस का इस्तेमाल भी शामिल था।'

राहुल गांधी ने आगे लिखा कि सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। महिला छात्रों पर पुलिसकर्मियों ने हमला किया, जिसमें जानबूझकर उनके निजी अंगों को भी निशाना बनाया गया। सबसे चौंकाने वाली बात घातक पेलेट गन का इस्तेमाल है। मीडिया और सोशल मीडिया की रिपोर्टों से साफ है कि कई लोग छर्रे से बुरी तरह से घायल हुए हैं, जिनमें एक पत्रकार भी शामिल है। मैं 19 साल के छात्र साहिल लोचब से मिला, जो अभी बहुत दर्द में है और पेलेट गन के छर्रे लगने के कारण उसकी एक आंख की रोशनी जाने का भी खतरा है।

राहुल गांधी ने गृहमंत्री शाह से पूछा कि गृह मंत्री के तौर पर, क्या आपने छात्रों के खिलाफ पेलेट गन समेत घातक बल के इस्तेमाल को मंजूरी दी थी? अगर नहीं, तो किसने दी? जो लोग सादे कपड़ों में छात्रों को लाठियों से पीटते हुए दिखे, क्या वे पुलिसकर्मी हैं या वालंटियर्स? उनकी तैनाती की अनुमति किसने दी?

राहुल गांधी ने आगे लिखा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन किसी भी लोकतंत्र की बुनियाद है। ये सरकार की जिम्मेदारी है कि वो प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा करे और बातचीत के ज़रिए उनकी शिकायतों का समाधान करे। इस तरह की क्रूर और बर्बर हिंसा लोकतंत्र की हर मर्यादा को तोड़ती है और देश को आक्रोशित करती है। देश का भविष्य- हमारे युवा और छात्र, आज जवाब और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। उनकी आवाज़ हर हाल में सुनी जाएगी।