राजगढ़ में नेशनल हाईवे पर तेज रफ्तार ट्रक ने गौवंशों को कुचला, 15 गाय-बछड़ों की मौत

राजगढ़ में NH-52 पर तेज रफ्तार ट्रक सड़क पर बैठे गोवंश के झुंड पर चढ़ गया। हादसे में एक बछड़े सहित 15 गायों की मौत और दो घायल हो गए।

Updated: Jul 26, 2026, 01:03 PM IST

राजगढ़। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में रविवार देर रात राष्ट्रीय राजमार्ग-52 (NH-52) पर टोल टैक्स के पास एक तेज रफ्तार ट्रक सड़क पर बैठे गोवंश के झुंड पर चढ़ गया। इस भीषण हादसे में एक बछड़े सहित 15 गायों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दो अन्य गोवंश गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना के बाद ट्रक चालक वाहन लेकर फरार हो गया लेकिन पुलिस ने पीछा कर उसे गिरफ्तार कर ट्रक जब्त कर लिया।

हादसे की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में गोसेवक और गोरक्षक मौके पर पहुंच गए। सड़क पर कई स्थानों पर गोवंश के शव पड़े होने से कुछ समय के लिए हाईवे पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गोसेवकों ने पुलिस को सूचना देने के साथ ही राजगढ़ की ओर बैरिकेड लगाकर ट्रक को रोकने की तैयारी की। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चालक को पकड़ लिया।

ब्यावरा थाना प्रभारी मंजू मखेनिया ने बताया कि हादसे का शिकार हुए ट्रक में तमिलनाडु से लोहे के सरिए लादकर पंजाब ले जाए जा रहे थे। चालक के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम और लापरवाही व खतरनाक तरीके से वाहन चलाने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

घटना के बाद पुलिस और गोसेवकों ने भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए संयुक्त अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इसके तहत सड़कों पर घूमने वाले गोवंश के सींगों पर रेडियम लगाया जाएगा। ताकि रात के समय वाहन चालकों को वे दूर से दिखाई दे सकें और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो।

टोल कर्मचारियों ने पुलिस को बताया कि आसपास के कई गांवों से लोग निराश्रित गोवंश को हाईवे के किनारे छोड़ जाते हैं। रात के समय यही पशु सड़क पर बैठ जाते हैं और तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आ जाते हैं। उनके अनुसार, यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि खरीफ सीजन में बुवाई के बाद किसान फसलों को नुकसान से बचाने के लिए आवारा गोवंश को गांव से बाहर निकाल देते हैं। भोजन और सुरक्षित स्थान की तलाश में ये पशु रात के समय राष्ट्रीय राजमार्ग और शहर की सड़कों पर बैठ जाते हैं। जिससे न केवल उनकी जान जोखिम में पड़ती है बल्कि सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है।

लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि जिले में 153 सरकारी और गैर-सरकारी गोशालाएं होने के बावजूद बड़ी संख्या में निराश्रित गोवंश सड़कों पर क्यों घूम रहा है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन गांवों से गोवंश को गोशालाओं तक पहुंचाने की प्रभावी व्यवस्था करे और गोशालाओं की क्षमता बढ़ाई जाए तो ऐसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। उनका यह भी कहना है कि यह समस्या केवल NH-52 तक सीमित नहीं है बल्कि खिलचीपुर, ब्यावरा, राजगढ़ और जिले के अन्य प्रमुख मार्गों पर भी रात में बड़ी संख्या में गोवंश सड़क पर बैठा दिखाई देता है।

पशु विभाग के उप संचालक डॉ. दयाराम अहिरवार ने बताया कि जिले की अधिकांश गोशालाओं की क्षमता सीमित है। जिसके कारण सभी निराश्रित गोवंश को वहां रखना संभव नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि सड़कों और खुले क्षेत्रों में घूम रहे पशुओं को पकड़कर सुरक्षित तरीके से गोशालाओं तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती है।

उन्होंने बताया कि बारिश के मौसम में जमीन गीली होने के कारण गोवंश सूखी जगह की तलाश में सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर आकर बैठ जाते हैं। जिससे हादसों का खतरा बढ़ जाता है। विभाग नगर पालिका के सहयोग से निराश्रित गोवंश को चरणबद्ध तरीके से गोशालाओं तक पहुंचाने की योजना पर काम कर रहा है। इस संबंध में कलेक्टर ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश भी दिए हैं। साथ ही हाईवे किनारे फेंसिंग कराने की दिशा में भी कार्रवाई प्रस्तावित है।

डॉ. अहिरवार के अनुसार, जिले की गोशालाओं में इस समय लगभग 17 से 18 हजार गोवंश संरक्षित हैं। जबकि, केवल राजगढ़ से कुरावर के बीच ही करीब 1 से 2 हजार निराश्रित गोवंश सड़कों और आसपास के इलाकों में घूम रहे हैं। इन्हें चरणबद्ध तरीके से गोशालाओं में शिफ्ट करने की योजना तैयार की जा रही है।