दतिया विधानसभा उपचुनाव: पीतांबरा माई के दरबार पहुंचे दिग्विजय सिंह, जनता से घनश्याम सिंह को जिताने की अपील की

दतिया उपचुनाव को लेकर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह शांत, परिपक्व और जनसेवा के लिए समर्पित हैं। जबकि नरोत्तम मिश्रा की पहचान आतंक, अन्याय और अत्याचार है।

Updated: Jul 13, 2026, 03:05 PM IST

दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर मध्य प्रदेश की सियासत गर्म है। सोमवार को कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर घनश्याम सिंह और बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी दोनों ने अपना नामांकन दाखिल किया। कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन कार्यक्रम में शामिल होने दतिया पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मां पीताम्बरा का दर्शन कर प्रदेशवासियों के खुशहाली की कामना की। साथ ही जनता से कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में मतदान करने की अपील भी की।

नामांकन भरने के उपरांत दतिया कलेक्ट्रेट से सभी कांग्रेस नेता रिंग रोड स्थित भैरव मंदिर के पास पहुंचे।
यहां घनश्याम सिंह के समर्थन में पार्टी नेताओं ने कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित किया। दतिया उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है। सपा का कहना है कि हम इंडिया गठबंधन धर्म का पालन कर रहे हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव ने कहा कि घनश्याम सिंह बहुमत से जीतेंगे। इंडिया गठबंधन दतिया में भ्रष्टाचार खत्म करने का काम करेगा।

दतिया उपचुनाव को लेकर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने मीडिया से कहा कि कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह शांत, परिपक्व और जनसेवा के लिए समर्पित हैं। जबकि नरोत्तम मिश्रा की पहचान आतंक, अन्याय और अत्याचार है। पीतांबरा पीठ में दर्शन के उपरांत पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि माई की कृपा बनी रहे। इसके बाद जब मीडियाकर्मियों ने उनसे राजनीतिक सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि यहां भाजपा-कांग्रेस की बात मत करो। माई के दरबार में सब एक हैं।

अयोध्या से जुड़े सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी चंदा चोरों को बचाने में जुटे हैं। उन्होंने कहा, 'चंपत राय सबसे बड़ा चोर है, डकैत है। इन्हें गिरफ्तार करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट को जो करना है, वह करे। हम तो अपनी लड़ाई लड़ेंगे।' बीजेपी में अंदरूनी मतभेद के सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि अगर आज किसी ने पीएम नरेंद्र मोदी को चुनौती देने की हिम्मत की है, तो वे नरोत्तम मिश्रा के कार्यकर्ता ही हैं। जहां कोई पीएम मोदी के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोल सकता, वहीं यहां के कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ नारे लगाए। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव की मां के लिए भी अपशब्द कहे। इन सबके बावजूद, अगर वे इसे अंदरूनी कलह नहीं मानते, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है।