सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा का चौथा दिन, तराना से देवाखेड़ा तक पदयात्रा करेंगे दिग्विजय सिंह
विजयादशमी के अवसर पर 20 अक्टूबर को उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर से शुरू हुई इस यात्रा में पहले दिन से ही बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।
उज्जैन। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा शुक्रवार को चौथे दिन में प्रवेश कर गई है। उज्जैन से अयोध्या तक की इस पदयात्रा के तहत दिग्विजय सिंह आज तराना से देवाखेड़ा के लिए रवाना होंगे। यात्रा के दौरान वे साधु-संतों और समर्थकों के साथ पैदल चलकर सनातन परंपरा, धार्मिक स्थलों में पारदर्शिता और लोकतंत्र में मताधिकार की रक्षा का संदेश दे रहे हैं।
आयोजकों के अनुसार शुक्रवार सुबह 8 बजे तराना स्थित आईटीआई कॉलेज, सिद्धपुर रोड से पदयात्रा शुरू होगी। यात्रा सिद्धपुर और ग्राम निपानिया होते हुए आगे बढ़ेगी। दोपहर 1 बजे भोजन और विश्राम के बाद शाम 3 बजे शंकरपुर जोड़ से पदयात्रा फिर शुरू होगी। इसके बाद यात्रा कनार्दी, गुठलाई जोड़ और देवाखेड़ा होते हुए जूनापानी जोड़ पहुंचेगी। शाम 6 बजे पदयात्रा का विश्राम होगा। यात्रियों के रात्रि भोजन और विश्राम की व्यवस्था देवाखेड़ा, जूनापानी जोड़ में की गई है। रात्रि विश्राम तराना नगर परिषद अध्यक्ष रूपेश परमार के निवास पर निर्धारित है।
विजयादशमी के अवसर पर 20 अक्टूबर को उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर से शुरू हुई इस यात्रा में पहले दिन से ही बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। यात्रा उज्जैन से ओरछा स्थित रामराजा सरकार मंदिर होते हुए अयोध्या पहुंचेगी। करीब 930 किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा के जरिए दिग्विजय सिंह धार्मिक आस्था और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर लोगों के बीच पहुंच रहे हैं। 
यात्रा के दूसरे दिन दिग्विजय सिंह ने चंदा चोरी और वोट चोरी के मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए धार्मिक स्थलों में अनियमितताओं की जांच और चुनाव में बैलेट पेपर से मतदान की मांग उठाई थी। उन्होंने कहा था कि चंदा चोरी करने वालों को पकड़कर जेल भेजा जाना चाहिए और ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाने चाहिए।
दिग्विजय सिंह की इस यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य मंदिरों में श्रद्धालुओं के दान और चढ़ावे की व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा धार्मिक संस्थाओं से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग उठाना है। इसके साथ ही लोकतंत्र में मताधिकार की रक्षा का मुद्दा भी यात्रा के केंद्र में है। दिग्विजय सिंह का कहना है कि धर्म और आस्था से जुड़ी संस्थाओं में लोगों के विश्वास को बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और ईमानदारी जरूरी है। सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के माध्यम से दिग्विजय सिंह उज्जैन से अयोध्या तक पैदल चलकर इन मुद्दों को जनसंवाद के जरिए लोगों तक पहुंचा रहे हैं।




