ज्ञानेश कुमार वोट चोरी और नोट चोरी दोनों में शामिल, दिग्विजय सिंह ने CEC के राम मंदिर ट्रस्ट से संबद्धता पर उठाए सवाल

दिग्विजय सिंह ने राम जन्मभूमि ट्रस्ट को भंग कर मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी रामालय ट्रस्ट को सौंपने की मांग की। उन्होंने कहा कि इसमें विभिन्न पीठों के शंकराचार्य, रामानंद संप्रदाय के संत, निर्मोही अखाड़े और गोरखनाथ मठ के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए।

Updated: Oct 17, 2026, 04:13 PM IST

इंदौर। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सिंह ने कहा कि ज्ञानेश कुमार वोट चोरी और नोट चोरी दोनों में शामिल हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने CEC के राम मंदिर ट्रस्ट से संबद्धता पर सवाल उठाए। उन्होंने राम मंदिर निर्माण में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए दावा किया कि 2 करोड़ रुपए की जमीन अगले ही दिन राम जन्मभूमि ट्रस्ट को 18 करोड़ रुपए में बेची गई।

इंदौर प्रेस क्लब में शनिवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुए दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर ट्रस्ट के जमीन सौदों, चंदे और निर्माण कार्यों की जांच की मांग की। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर भी सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार राम मंदिर निर्माण से जुड़े ट्रस्ट के ट्रस्टी भी रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण और जमीन की खरीद में कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार लोगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

दिग्विजय सिंह ने ट्रस्ट की भूमिका और कामकाज की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर प्रबंधन में धार्मिक परंपराओं से जुड़े प्रतिनिधियों को उचित स्थान दिया जाना चाहिए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि मंदिर निर्माण पूरा होने से पहले ही चुनावी लाभ के उद्देश्य से प्राण-प्रतिष्ठा कराई गई। उन्होंने धार्मिक कर्मकांडों और यजमान की परंपरा का हवाला देते हुए आयोजन पर आपत्ति जताई। सिंह ने मांग की कि राम मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों और मठों की आय-व्यय व्यवस्था का नियमित स्वतंत्र ऑडिट हो, चंदे और चढ़ावे का हिसाब सार्वजनिक किया जाए और जमीन की खरीद तथा निर्माण कार्यों में पारदर्शिता रखी जाए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने SIR को लेकर आरोप लगाया कि कुछ राज्यों में मतदाता सूची से नाम काटने में गड़बड़ी हुई और राजनीतिक आधार पर मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई। उन्होंने मध्य प्रदेश के 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले भोपाल की नरेला विधानसभा के एक मतदान केंद्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने दावा किया कि एक ही पते पर कई मतदाताओं के नाम दर्ज थे, जबकि जांच में उनमें से कुछ ही लोग वहां रहते मिले।

पूर्व मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका जताई और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका और राष्ट्रपति को ऑनलाइन याचिका के माध्यम से ज्ञापन देने के अभियान का भी जिक्र किया। उन्होंने अभियान से जुड़ने के लिए 8982121282 पर मिस्ड कॉल करने की अपील की।

दिग्विजय सिंह ने बताया कि राष्ट्रपति के नाम तैयार डिजिटल याचिका में कथित वोट चोरी और चंदा चोरी के मामलों में जवाबदेही तय करने, राम जन्मभूमि ट्रस्ट के कामकाज की जांच और धार्मिक संस्थानों की वित्तीय व्यवस्था पारदर्शी बनाने की मांगें शामिल हैं। उन्होंने राम जन्मभूमि ट्रस्ट को भंग कर मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी ‘रामालय ट्रस्ट’ को सौंपने की मांग की। उनके प्रस्ताव के मुताबिक, इसमें विभिन्न पीठों के शंकराचार्य, रामानंद संप्रदाय के संत, निर्मोही अखाड़े और गोरखनाथ मठ के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए।