MP में छात्रसंघ चुनाव नहीं होने पर HC सख्त, सितंबर में चुनाव न कराने पर सरकार से मांगा जवाब

मध्य प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 2017 से छात्रसंघ चुनाव न होने पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग से पूछा है कि तय कार्यक्रम के बावजूद सितंबर में चुनाव क्यों नहीं कराए गए।

Updated: Oct 24, 2026, 12:49 PM IST

मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए जाने पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस आलोकश कोगजे और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च शिक्षा विभाग को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने पूछा कि सितंबर में चुनाव कराने के लिए तय कार्यक्रम और पहले दिए गए निर्देशों के पालन में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।

यह मामला प्रदेश में लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव नहीं होने से जुड़ा है। याचिकाकर्ता एडवोकेट आदिश टोंग्या ने जनहित याचिका में बताया कि मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में 2017 के बाद से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं। इस दौरान कई विद्यार्थियों ने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली लेकिन उन्हें कॉलेज या विश्वविद्यालय में छात्र प्रतिनिधि चुनने का मौका नहीं मिला। याचिका में सवाल उठाया गया है कि जब सरकार ने चुनाव कराने के लिए कार्यक्रम निर्धारित किया था तो उसके बावजूद प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ी। हाईकोर्ट ने अब इसी मुद्दे पर उच्च शिक्षा विभाग से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

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याचिकाकर्ता ने अपनी दलील में उच्च शिक्षा विभाग के 20 जुलाई के परिपत्र का उल्लेख किया है। इसके अनुसार, प्रदेश में सितंबर के दौरान छात्रसंघ चुनाव कराने की योजना बनाई गई थी। चुनाव से संबंधित पूरी प्रक्रिया 10 कार्यदिवसों के भीतर पूरी करने का कार्यक्रम भी निर्धारित किया गया था। हालांकि, तय अवधि में चुनाव नहीं होने के कारण सरकारी स्तर पर घोषित कार्यक्रम पर सवाल उठे हैं।

याचिका में इससे पहले हाईकोर्ट द्वारा 3 अगस्त को एक रिट याचिका में पारित आदेश का भी हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, उस समय राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया था कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के अकादमिक कैलेंडर में छात्रसंघ चुनाव को शामिल किया जाएगा। इसके बाद अदालत के समक्ष प्रस्तुत कैलेंडर में सितंबर को चुनाव के लिए निर्धारित किया गया था। अब नई जनहित याचिका में इसी आश्वासन और निर्धारित कार्यक्रम के पालन का मुद्दा उठाया गया है।

याचिकाकर्ता ने मांग की है कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुरूप कराए जाएं। याचिका में तर्क दिया गया है कि छात्रसंघ विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि चुनने, संस्थानों में शैक्षणिक और अन्य समस्याओं को सामने रखने तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर प्रदान करते हैं।

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इस संबंध में याचिका में यूनिवर्सिटी ऑफ केरल अगेनस्ट काउंसिल ऑफ प्रिंसिपल्स ऑफ कॉलेजेस, केरल एवं अन्य मामले का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a), 19(1)(b) और 19(1)(c) का हवाला देकर छात्रसंघ चुनावों को विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति, संगठन बनाने और लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़ा विषय बताया गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत से प्रदेश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रसंघ चुनाव कराने के निर्देश देने के साथ ही भविष्य में नियमित रूप से चुनाव कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। हाईकोर्ट के नोटिस के बाद उच्च शिक्षा विभाग को सितंबर के चुनाव कार्यक्रम पर की गई कार्रवाई और चुनाव नहीं हो पाने के कारणों के बारे में जवाब देना होगा। अदालत की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित है।