मनीषा भानवाला ने वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में जीता गोल्ड, ऐसा करने वाली बनीं पहली भारतीय महिला

हरियाणा की मनीषा भानवाला ने कजाकिस्तान में आयोजित सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में अमेरिका की एबिगेल को 8-6 से हराकर इतिहास रच दिया। वह गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनी।

Updated: Oct 31, 2026, 01:10 PM IST

भारतीय कुश्ती के इतिहास में मनीषा भानवाला ने नया अध्याय जोड़ दिया है। हरियाणा की 29 वर्षीय पहलवान ने कजाकिस्तान के अस्ताना में आयोजित सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के 59 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। शुक्रवार को खेले गए फाइनल में मनीषा ने अमेरिका की एबिगेल एलिजाबेथ नेटे को 8-6 से हराया। खास बात यह रही कि मुकाबले में एक समय 0-6 से पिछड़ने के बावजूद उन्होंने शानदार वापसी करते हुए लगातार आठ अंक जुटाए और गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। वह सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई हैं।

मनीषा की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शनिवार को उन्हें बधाई दी। राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनने की उनकी उपलब्धि ने देश को गर्व और सम्मान का अवसर दिया है। खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी मनीषा की सफलता को भारतीय कुश्ती के लिए यादगार दिन बताते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी बधाई देते हुए कहा कि मनीषा ने विश्व खिताब जीतकर पूरे देश और हरियाणा का मान बढ़ाया है।

यह भी पढ़ें:MP: शराब दुकान बंद कराने मंत्री के पास पहुंची महिला, मंत्रीजी ने उसके पति को ही भेज दिया जेल

अमेरिकी पहलवान एबिगेल नेटे के खिलाफ खिताबी मुकाबले में मनीषा की शुरुआत अच्छी नहीं रही थी। नेटे ने लगातार अंक हासिल कर स्कोर 6-0 कर दिया था। इस स्थिति में अमेरिकी पहलवान की जीत लगभग तय मानी जा रही थी लेकिन मनीषा ने दबाव में धैर्य बनाए रखा। उन्होंने रणनीति बदलते हुए एक के बाद एक अंक हासिल किए और मुकाबले का रुख पलट दिया। आखिरी स्कोर 8-6 रहा और भारतीय पहलवान ने विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।

मनीषा ने खिताबी मुकाबले से पहले भी अपने प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ शानदार खेल दिखाया था। उन्होंने प्री क्वार्टर फाइनल में कनाडा की लॉरेंस ब्यूरेगार्ड को 6-2 से शिकस्त दी थी। इसके बाद सेमीफाइनल में मंगोलिया की बोलोरतुया खुरेलखु को हराकर फाइनल में जगह बनाई। लगातार मजबूत प्रदर्शन के बाद उन्होंने अमेरिकी पहलवान को हराकर अपने अभियान का अंत स्वर्ण पदक के साथ किया।

मनीषा की जीत इसलिए भी खास है क्योंकि विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में उनसे पहले किसी भारतीय महिला ने गोल्ड नहीं जीता था। पुरुष वर्ग में भारत के लिए यह उपलब्धि सबसे पहले सुशील कुमार ने हासिल की थी। उन्होंने 2010 में 66 किलोग्राम भारवर्ग में विश्व चैंपियनशिप का खिताब जीता था। इस तरह मनीषा विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला और सुशील कुमार के बाद दूसरी भारतीय पहलवान बन गई हैं।

यह भी पढ़ें:वनाधिकार पट्टों की मांग को लेकर नेपानगर में आदिवासियों का प्रदर्शन, SDM कार्यालय के बाहर दिया धरना

मनीषा की इस कामयाबी के पीछे संघर्ष की लंबी कहानी भी है। हरियाणा के जींद जिले के किसान परिवार से आने वाली मनीषा को साल 2022 में बड़ा व्यक्तिगत झटका लगा था। एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप के लिए रवाना होने से पहले उनके पिता सुरेश का अचानक निधन हो गया था। इस घटना से वह इतनी टूट गई थीं कि उन्होंने कुश्ती छोड़ने तक का मन बना लिया था। हालांकि, पिता के सपने को पूरा करने के संकल्प ने उन्हें दोबारा खेल में लौटने की प्रेरणा दी। आखिरकार उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वर्ण पदक जीतकर अपनी मेहनत को ऐतिहासिक उपलब्धि में बदल दिया।

इस चैंपियनशिप में भारतीय महिला पहलवानों का प्रदर्शन भी उल्लेखनीय रहा। मनीषा के स्वर्ण पदक के अलावा भारतीय टीम ने दो रजत और एक कांस्य पदक भी हासिल किया। नीलम सिरोही और काजल ढोचक ने अपने-अपने वर्गों में फाइनल तक पहुंचकर सिल्वर मेडल जीते। जबकि, तनु शर्मा ने महिलाओं के 72 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य पदक हासिल किया। इस तरह भारतीय टीम ने प्रतियोगिता में कुल चार पदक अपने नाम किए।