MPPSC के नए पाठ्यक्रम पर दिग्विजय सिंह ने जताई आपत्ति, सिविल राइट्स और एट्रोसिटी एक्ट को शामिल करने की मांग

राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान को लिखा पत्र, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के पाठ्यक्रम से दो अधिनियम हटाए जाने को बताया गलत

Updated: Jan 22, 2021, 07:54 AM IST

MPPSC के नए पाठ्यक्रम पर दिग्विजय सिंह ने जताई आपत्ति, सिविल राइट्स और एट्रोसिटी एक्ट को शामिल करने की मांग

भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राज्य लोक सेवा आयोग के पाठ्यक्रम को लेकर आपत्ति जताई है। राज्यसभा सांसद ने सीएम शिवराज को पत्र लिखकर इसमें किए गए बदलाव पर पुनः विचार करने की अपील की है। कांग्रेस नेता ने सिविल राइट्स एक्ट और एट्रोसिटी एक्ट को पाठ्यक्रम से हटाए जाने को अनुचित बताया है।

दिग्विजय सिंह ने सीएम शिवराज को संबोधित पत्र में लिखा है, '2019 में आयोजित राज्य सेवा की प्रारंभिक परीक्षा के पाठ्यक्रम में मध्यप्रदेश सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 और अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 को सिलेबस में शामिल किया गया था। ताकि राज्य की सिविल सेवा में चयनित होकर आने वाले अधिकारियों को इन दोनों प्रमुख क़ानूनों का विस्तृत ज्ञान रहे। हमें खेद है कि मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा वर्ष 2021 में आयोजित की जा रही सिविल सेवा परीक्षा के सिलेबस में से यह दोनों कानून हटा दिए गए हैं।'

दिग्विजय सिंह ने इन दोनों कानूनों को लोक प्रशासन में संवैधानिक संरक्षण का प्रतीक बताया है। साथ ही कहा है कि ये वंचित वर्ग के मानव अधिकारों और दलित समाज को अत्याचारों से निजात दिलाने वाले कानून हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अम्बेडकर का सपना था कि  सामाजिक भेदभाव के बिना राष्ट्र एकता के सूत्र में गुथकर उन्नति करे और सामाजिक समरसता समाज विश्व में भारत की पहचान बने।'

कांग्रेस नेता ने अपने पत्र में लिखा, 'मध्यप्रदेश देश के उन राज्यों में से एक है, जहाँ अनुसूचित जाति की 15.60 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति की 21.06 प्रतिशत आबादी निवासरत है। जिसकी प्रदेश में कुल आबादी तीन करोड़ से अधिक है। अभी भी सर्वधर्म समभाव, सामाजिक एकता और परिवर्तन के लिये पिछड़े तबके को कानूनी सहयोग, समर्थन और संरक्षण की दरकार है। कार्यपालिका में काम करने वाले अधिकारियों को इन कानूनों का ज्ञान होने से समाज के पिछडे़ वर्गों को कानूनी हक आसानी से मिलता है।'

कांग्रेस नेता ने सीएम शिवराज सिंह चौहान से अनुरोध किया है कि सामाजिक चेतना और शासन, प्रशासन के व्यापक हित में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा अप्रैल 2021 में आयोजित की जा रही राज्य सेवा की परीक्षा पाठ्यक्रम में इन दोनों अधिनियमों को शामिल कराने का निर्देश दें। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने राज्य सेवा परीक्षा 2021 के लिये दिनांक 28.12.2020 को विज्ञापन जारी कर अप्रैल 2021 में प्रारंभिक परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। साथ ही पाठ्ययक्रम भी घोषित किया है जिनमें इन दोनों कानूनों को शामिल नहीं किया गया है।