सनातन धर्म का मूल उद्देश्य प्रेम और सद्भाव, धर्मांधता नफरत और कटुता फैलाती है: दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह ने कहा कि हम धर्म कर साथ हैं। लेकिन RSS धर्मांधता के साथ है। हम प्रेम और सद्भाव की बातें करते हैं जबकि RSS कटुता और नफरत फैलाती है।
शाजापुर। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा है कि सनातन धर्म का मूल उद्देश्य प्रेम, सत्य, सद्भाव, करुणा और दया है। उन्होंने कहा कि वह हमेशा सांप्रदायिक सद्भाव के पक्षधर रहे हैं और कभी अपने इस विचार से नहीं डिगे। दिग्विजय सिंह ने ये बातें सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के छठवें दिन शाजापुर में कही।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म सभी धर्मों का सम्मान करना सिखाता है, जबकि धर्मांधता नफरत और कटुता को जन्म देती है। दिग्विजय सिंह रविवार सुबह शाजापुर में प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उनकी सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा शनिवार को शाजापुर पहुंची थी और रविवार को यहां से आगे बढ़ी। दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनकी मां ने उन्हें सनातन धर्म का मूल उद्देश्य सर्वधर्म समभाव बताया था। सनातन धर्म में प्रेम, सद्भाव, करुणा और दया का संदेश है। इसके विपरीत धर्मांधता में कटुता और नफरत होती है, जिससे हिंसा पनपती है। उनके मन में धर्म और धर्मांधता के बीच यह अंतर शुरू से स्पष्ट रहा है।
उन्होंने कहा कि वह हिंदुत्व के समर्थक नहीं हैं और न रहेंगे, क्योंकि हिंदुत्व का सनातन धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म हजारों वर्ष पुराना है, जबकि हिंदुत्व की अवधारणा को सावरकर ने राजनीतिक विचारधारा के रूप में सामने रखा। दिग्विजय सिंह ने कहा कि लगभग सभी धर्म प्रेम और सद्भाव का संदेश देते हैं। धर्म के नाम पर नफरत फैलाना और लोगों को आपस में लड़ाना सनातन धर्म की मूल भावना के विपरीत है।
दिग्विजय सिंह ने महात्मा गांधी की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि यह समझना जरूरी है कि गांधी को गोली क्यों मारी गई, किसने मारी और इसके पीछे क्या उद्देश्य था। उन्होंने कहा कि गांधी की हत्या के पीछे नफरत की विचारधारा थी। उनके अनुसार, अंग्रेजों ने फूट डालो और राज करो की नीति अपनाई थी, जिसका इस्तेमाल समाज में विभाजन पैदा करने के लिए किया गया।
उन्होंने कहा कि सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा का उद्देश्य भी प्रेम, सद्भाव और सत्य के मूल्यों को सामने लाना है। उन्होंने कांग्रेस की विचारधारा को भी इन मूल्यों से जोड़ते हुए कहा कि सभी धर्मों का सम्मान और सामाजिक सद्भाव भारतीय समाज की बुनियादी विशेषताएं हैं। दिग्विजय सिंह ने कहा कि सनातन धर्म का मूल आधार और भारतीय संविधान की भावना एक-दूसरे के अनुरूप हैं। संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज संविधान खतरे में है और नागरिकों के अधिकारों पर प्रश्नचिह्न खड़े किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि देश के नागरिकों को मतदान का अधिकार सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। चुनाव आयोग का काम नागरिकों के मताधिकार की रक्षा करना है, न कि उनके अधिकारों को सीमित करना। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके आने के बाद चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं रहा है। दिग्विजय सिंह ने ज्ञानेश कुमार पर 'नोट चोरी और वोट चोरी' दोनों में शामिल होने के आरोप भी लगाए।
दिग्विजय सिंह ने राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण और उससे जुड़े ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भगवान राम उनके इष्ट देव हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण से जुड़े ट्रस्ट में विश्व हिंदू परिषद से जुड़े लोगों को प्रमुखता दी गई। उन्होंने सवाल किया कि विश्व हिंदू परिषद को हिंदू धर्म का ठेकेदार किसने बनाया।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि आवंटन और ट्रस्ट गठन की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल हैं। उनके मुताबिक, तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव के कार्यकाल में मंदिर निर्माण के लिए भूमि आवंटित की गई थी और उस समय ट्रस्ट में कांग्रेस के किसी नेता को शामिल नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में साधु-संतों को जगह दी गई थी।
दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे और सोने-चांदी की ईंटों का हिसाब सार्वजनिक किए जाने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के नाम पर लोगों ने श्रद्धा के साथ दान दिया, इसलिए यह जरूरी है कि दान में मिली रकम और सामग्री का पूरा हिसाब सामने आए।
उन्होंने विश्व हिंदू परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सोने-चांदी की ईंटें कहां गईं, इसका हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जानकारी ट्रस्ट के पदाधिकारियों को थी। दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर समिति के पूर्व अकाउंटेंट महिपाल सिंह का भी जिक्र किया, जिन्होंने सबसे पहले अनियमितताओं की शिकायत की थी। उन्होंने कहा कि शिकायत करने के बाद महिपाल सिंह को नौकरी से निकाल दिया गया। उनके अनुसार, ये गड़बड़ियां वर्ष 2021 से हो रही थीं।
बता दें कि दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा विजयादशमी के दिन 20 अक्टूबर को उज्जैन से शुरू हुई थी। यात्रा का उद्देश्य सनातन धर्म के मूल्यों, धार्मिक स्थलों पर चढ़ावे में पारदर्शिता और सामाजिक सद्भाव का संदेश देना है। यात्रा के दौरान दान और चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई जा रही है। शनिवार को यात्रा शाजापुर पहुंची थी। रविवार सुबह प्रेस वार्ता के बाद यात्रा शाजापुर से आगे रवाना हुई। यात्रा में दिग्विजय सिंह के साथ बड़ी संख्या में उनके समर्थक और अन्य सहभागी भी शामिल हैं। यात्रा के माध्यम से धार्मिक आस्था, पारदर्शिता और सामाजिक सौहार्द से जुड़े मुद्दों को लोगों के बीच उठाया जा रहा है।




