गाजियाबाद में सीवेज सैंपल में मिला पोलियो वायरस, 160 स्वास्थ्य टीमें करेंगी 1.5 लाख से अधिक बच्चों का सर्वे

गाजियाबाद के सीवेज में खतरनाक पोलियोवायरस मिलने से हड़कंप मच गया है। स्वास्थ्य विभाग ने एहतियातन 12 संवेदनशील इलाकों में करीब डेढ़ लाख बच्चों का सर्वे अभियान शुरू कर दिया है।

Updated: Jun 10, 2026, 07:02 PM IST

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में सीवेज के नमूने में वैक्सीन डिराइव्ड पोलियोवायरस टाइप 1 (VDPV-1) की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। डूंडाहेड़ा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से लिए गए दूषित पानी के नमूने की जांच में वायरस की मौजूदगी सामने आई है। हालांकि, अब तक जिले में किसी भी बच्चे में पोलियो संक्रमण या उससे जुड़े लक्षण नहीं पाए गए हैं लेकिन संभावित जोखिम को देखते हुए बड़े स्तर पर निगरानी और सर्वे अभियान शुरू कर दिया गया है।

रिपोर्ट सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गाजियाबाद के 12 संवेदनशील शहरी क्षेत्रों में विशेष सर्वे शुरू किया है। इसके लिए को तैनात किया गया है। जबकि, कुछ क्षेत्रों में 107 टीमों के जरिए भी घर-घर निगरानी अभियान चलाया जा रहा है। इन टीमों को पांच साल तक की आयु के बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति की जांच, उनके टीकाकरण रिकॉर्ड का सत्यापन और जरूरत पड़ने पर पोलियो ड्रॉप्स पिलाने की जिम्मेदारी दी गई है। विभाग ने करीब सवा लाख से लेकर डेढ़ लाख से अधिक बच्चों को सर्वे के दायरे में शामिल किया है।

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गाजियाबाद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. सचिन ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग नियमित रूप से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से नमूने लेकर उनकी जांच कराता है। हाल ही में डूंडाहेड़ा एसटीपी से लिया गया नमूना जांच के लिए भेजा गया था। इसकी रिपोर्ट में वैक्सीन व्युत्पन्न पोलियोवायरस टाइप-1 की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने एहतियाती कदम उठाते हुए प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे और निगरानी अभियान शुरू कर दिया है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिन क्षेत्रों में विशेष निगरानी की जा रही है उनमें राजनगर, शास्त्री नगर, बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र, दौलतपुरा, न्यू पंचवटी कॉलोनी, घूकना, हिंडन विहार, कैला भट्ठा, मिर्जापुर, विजय नगर-1, विजय नगर-2 और खैराती नगर शामिल हैं। इन इलाकों में स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर यह जानकारी जुटा रहे हैं कि बच्चों को पोलियो की सभी निर्धारित खुराकें मिली हैं या नहीं और कहीं कोई बच्चा नियमित टीकाकरण से वंचित तो नहीं रह गया।

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शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के नोडल अधिकारी डॉ. आर.के. गुप्ता ने बताया कि सर्वे के दौरान विशेष रूप से एसटीपी के आसपास स्थित कॉलोनियों पर ध्यान दिया जा रहा है। टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि पांच साल तक के सभी बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन किया जाए और किसी भी प्रकार के संदिग्ध लक्षण मिलने पर तुरंत सूचना दी जाए।

अधिकारियों का मानना है कि नियमित टीकाकरण में कमी या कुछ बच्चों के टीकाकरण अभियान से छूट जाने के कारण इस प्रकार के वायरस की मौजूदगी सामने आ सकती है। यही वजह है कि विभाग अब टीकाकरण कवरेज की भी समीक्षा कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी बच्चा पोलियो रोधी खुराक से वंचित न रहे।

सीएमओ डॉ. सचिन ने स्पष्ट किया कि यह वैक्सीन डिराइव्ड वायरस है। जो पोलियो वैक्सीन में मौजूद कमजोर जीवित वायरस से विकसित हो सकता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है और इससे तत्काल किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि इसी तरह का वायरस पिछले वर्ष वाराणसी में और उससे पहले मेघालय में भी पाया जा चुका है।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पोलियो एक गंभीर वायरल बीमारी है। यह व्यक्ति से व्यक्ति में फैल सकती है और गंभीर मामलों में स्थायी लकवा या जानलेवा जटिलताओं का कारण बन सकती है। हालांकि, सीवेज में वायरस का पाया जाना किसी प्रकोप की सीधी पुष्टि नहीं करता लेकिन यह संकेत जरूर देता है कि वायरस किसी स्तर पर समुदाय में मौजूद हो सकता है। इसी कारण सीवेज या वेस्टवॉटर निगरानी को सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसके जरिए बीमारी के लक्षण सामने आने से पहले ही वायरस की मौजूदगी का पता लगाया जा सकता है।

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में किसी बच्चे में पोलियो संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। बावजूद इसके एहतियात के तौर पर व्यापक सर्वे, निगरानी और टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके और गाजियाबाद में पोलियो मुक्त अभियान की उपलब्धियों को सुरक्षित रखा जा सके।

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