भोपाल में मास्टर प्लान की 27 सड़कें निरस्त, 66 गांवों को ग्रीन जोन में शामिल करने के विरोध में उतरे किसान

मास्टर प्लान में 66 गांवों को VIZ-2 ग्रीन जोन में शामिल कर कैचमेंट क्षेत्र का दायरा बढ़ाए जाने के विरोध में ग्रामीण किसान लामबंद हो गए हैं।

Updated: Oct 19, 2026, 09:18 AM IST

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भोपाल। राजधानी भोपाल के 1995 के मास्टर प्लान में प्रस्तावित 27 सड़कों को 31 साल बाद निरस्त कर दिया गया है। नगर तथा ग्राम निवेश विभाग (टीएंडसीपी) ने इन सड़कों को मास्टर प्लान से हटाने की आधिकारिक सूची जारी की है। हैरानी की बात यह है कि इनमें से 15 सड़कों की डीपीआर, कंसल्टेंसी और आंशिक निर्माण पर करीब 500 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद ये परियोजनाएं जमीन पर पूरी नहीं उतर सकीं।

मास्टर प्लान में शामिल इन सड़कों का उद्देश्य शहर में आवागमन को सुगम बनाना था, लेकिन वर्षों तक जमीन का अधिग्रहण और प्रस्तावित मार्गों का संरक्षण नहीं होने के कारण योजनाएं अटकती रहीं। इस दौरान कई जगह सड़क के प्रस्तावित अलाइनमेंट पर मकान, कॉलोनियां, धार्मिक स्थल और अन्य संस्थान बन गए। वहीं, कुछ मार्गों पर आंशिक निर्माण के बाद आगे के लिए जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी।

तकनीकी और भौगोलिक बाधाएं भी इन परियोजनाओं के निरस्त होने की वजह बनीं। कई प्रस्तावित सड़कों के रास्ते में हाईटेंशन लाइनें, पहाड़ियों की खड़ी ढलान और औद्योगिक इकाइयां थीं, जिनके चलते निर्माण व्यावहारिक नहीं रह गया। आलम ये है कि कई ग्रामीण सड़कों को पूरी तरह गायब कर दिया गया है।

निरस्त किए गए प्रमुख मार्गों में गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र की 24 मीटर चौड़ी सड़क, पिपलानी-रायसेन रोड और सिद्धार्थ लेक सिटी से रायसेन-अयोध्या बायपास तक प्रस्तावित 60 मीटर चौड़ी सड़क शामिल हैं। सिद्धार्थ लेक सिटी वाले मार्ग की लंबाई 1.95 किलोमीटर थी। वहीं, आशिमा मॉल से रायसेन रोड बायपास तक प्रस्तावित सड़क पर करीब 3 किलोमीटर निर्माण के बाद शेष 4 किलोमीटर के लिए जमीन नहीं मिल सकी।

इसके अलावा एम्स से खोरी कला बायपास तक आरआरएल के रास्ते प्रस्तावित सड़क, चूनाभट्टी से खुशीलाल शर्मा अस्पताल तक का मार्ग और नयापुरा कोलार मार्ग से सनखेड़ी-चीचली तक प्रस्तावित सड़क भी निरस्त कर दी गई हैं। सनखेड़ी-चीचली मार्ग के अलाइनमेंट पर बड़ी संख्या में पक्के मकान बन चुके थे।

किसान करेंगे पैदल मार्च

मास्टर प्लान में 66 गांवों को VIZ-2 ग्रीन जोन में शामिल कर कैचमेंट क्षेत्र का दायरा बढ़ाए जाने के विरोध में ग्रामीण किसान लामबंद हो गए हैं। किसानों का कहना है कि तालाब के नाम पर पहले ही उनकी जमीनें ली जा चुकी हैं और अब बची हुई जमीन पर भी सरकार प्रतिबंध लगाना चाहती है। ग्रीन जोन में शामिल होने के बाद किसान अपनी जमीन पर न तो व्यावसायिक या आवासीय गतिविधियां कर सकेंगे और न ही खेती-किसानी से जुड़े फैसले अपनी मर्जी से ले पाएंगे।

किसानों ने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि एक ओर बड़े संस्थानों, गार्डन और होटलों के निर्माण की अनुमति दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर किसानों को अपनी ही जमीन पर घर बनाने तक की छूट नहीं है। इसके विरोध में ग्रामीणों ने 'खेत बचाओ, किसान बचाओ' आंदोलन का ऐलान किया है। आंदोलन के तहत बड़ी संख्या में ग्रामीण 22 अक्टूबर को पैदल मार्च करते हुए नगर निगम संचालनालय पहुंचेंगे और मास्टर प्लान में किए गए बदलावों के खिलाफ लिखित आपत्ति दर्ज कराएंगे।