देवास में जहरीली शराब से 20 दिन में 13 लोगों की मौत का दावा, प्रशासन ने किया इनकार

देवास जिले के चंदाना और बिंजाना गांवों में 20 दिनों के भीतर 13 लोगों की संदिग्ध मौत से हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि मौतें जहरीली शराब पीने से हुईं हैं।

Updated: Oct 24, 2026, 02:43 PM IST

देवास। मध्य प्रदेश के देवास जिले के चंदाना और बिंजाना गांवों में करीब 20 दिनों के भीतर 13 लोगों की मौत होने से हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों और मृतकों के परिजनों ने इन मौतों के पीछे जहरीली शराब को वजह बताया है। उनका दावा है कि शराब पीने के बाद कई लोगों को उल्टी, चक्कर आने, मुंह से झाग निकलने और आंखों की रोशनी कम होने जैसी समस्याएं हुई थी। हालांकि, जिला प्रशासन ने जहरीली शराब से सामूहिक मौतों के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि मौतों के पीछे अलग-अलग स्वास्थ्य संबंधी कारण हैं। ऐसे में गांवों में हुई मौतों को लेकर ग्रामीणों के आरोप और प्रशासन के दावों के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई है।

सामने आई जानकारी के मुताबिक, 27 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच चंदाना में 9 और बिंजाना में 4 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में ज्यादातर मजदूरी करने वाले और नियमित रूप से शराब का सेवन करने वाले लोग बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कम समय में लगातार मौतें होना और कई लोगों में एक जैसे लक्षण दिखना गंभीर जांच का विषय है।

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चंदाना गांव में 15 अक्टूबर को दीपक रावत (28), जितेंद्र (35), ओमप्रकाश (35) और भीमा (55) ने एक साथ शराब पी थी। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके अगले दिन चारों की मौत हो गई थी। एक ही दिन में चार लोगों की मौत होने से गांव में शराब की गुणवत्ता को लेकर आशंका और गहरा गई। इसके अलावा कैलाश प्रजापत (28) और संजय (25) की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दोनों का इंदौर के अरविंदो और अमलतास अस्पताल में इलाज चल रहा है। 

संजय के परिजनों के मुताबिक, शराब पीने के बाद उसकी आंखों की रोशनी प्रभावित हुई और उसे आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। ग्रामीणों ने चंदाना में मोहन (50), सुनील (30) और दरबार सिंह (60) की मौत का भी जिक्र किया है। उनका दावा है कि कई मृतकों की तबीयत शराब पीने के बाद बिगड़ी थी और उनके लक्षण भी मिलते जुलते थे।

गांव के मुकेश परमार ने दावा किया कि मृतकों की संख्या 13 से ज्यादा और कम से कम 17 है। उनके अनुसार, मरने वाले ज्यादातर लोग मजदूर वर्ग से थे और शराब पीने के आदी थे। उन्होंने कहा कि कई मृतकों के मुंह से झाग निकलने की बात भी सामने आई है।

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पूर्व सरपंच सुनील पटेल ने भी शराब सेवन को मौतों से जोड़ते हुए प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि मामले में प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय इसे दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि एक ही दिन में चार लोगों की मौत और उनमें समान लक्षणों का सामने आना गंभीरता से जांचे जाने की जरूरत है।

वहीं, राजेंद्र राव ने बताया कि उनके बड़े भाई मोहनलाल की मौत शराब पीने के बाद हुई थी। नेहा परमार के मुताबिक, गांव में कई लोगों की मौत से पहले उल्टी, चक्कर आने और कम दिखाई देने जैसी शिकायतें सामने आई थी। इन बयानों के आधार पर ग्रामीण मौतों की परिस्थितियों की जांच कराने की मांग कर रहे हैं।

देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने जहरीली शराब पीने से 15 से 20 लोगों की मौत होने संबंधी खबरों को असत्य और भ्रामक बताया है। प्रशासन के मुताबिक, 1 से 15 अक्टूबर के बीच हुई मौतों के पीछे सामान्य बीमारियां, वृद्धावस्था, ब्रेन हेमरेज और अत्यधिक शराब का सेवन जैसे कारण रहे हैं।

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कलेक्टर ने यह भी कहा कि उपलब्ध पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहरीले पदार्थ के कारण मौत होने की पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन का पक्ष ग्रामीणों के आरोपों से अलग है। जहां ग्रामीण शराब पीने के बाद सामने आए कथित लक्षणों और मौतों के बीच संबंध बता रहे हैं। वहीं, प्रशासन इन घटनाओं को जहरीली शराब से हुई सामूहिक मौतें मानने से इनकार कर रहा है।