बाढ़ प्रभावित 450 गांवों में 8 दिनों से बिजली गुल, सैंकड़ों सड़कें क्षतिग्रस्त, पीड़ितों को नहीं मिल रहा सरकारी राहत

बाढ़ प्रभावित ग्वालियर-चंबल अंचल में दर्जनभर पूल बहने से लोगों को लगाना पड़ रहा है अतिरिक्त चक्कर, सैंकड़ों गांवों का संपर्क टूटा, 450 गांवों में 8 दिन से बिजली नहीं आई

Updated: Aug 11, 2021, 09:36 AM IST

बाढ़ प्रभावित 450 गांवों में 8 दिनों से बिजली गुल, सैंकड़ों सड़कें क्षतिग्रस्त, पीड़ितों को नहीं मिल रहा सरकारी राहत
Photo Courtesy: Bhaskar

ग्वालियर/दतिया। मध्य प्रदेश के आधा दर्जन जिलों में बाढ़ ने जमकर तबाही मचाई है। बाढ़ के कारण सिंध और चंबल नदी के किनारे बसे इन 6 जिलों के करीब 450 गांवों में अबतक बिजली नहीं आई है। आठ दिन गुजरने के बाद भी बिजली गुल है। ग्वालियर-चंबल संभाग में बाढ़ के कारण 100 से ज्यादा सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं हैं वहीं दर्जनों पूल और छोटे पुलिया टूट चुके हैं। नतीजतन लोगों को एक जगह से दूसरे जगह जाने के लिए अतिरिक्त चक्कर काटना पड़ रहा है।

प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के गृहक्षेत्र दतिया में सर्वाधिक तीन पूल बह गए हैं। यहां सेंवढ़ा का ग्वालियर से सीधा संपर्क कट गया है। इस वजह से 60 किलोमीटर अधिक चक्कर लगाना पड़ रहा है। जिले में करीब 36 गांव बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। यहां 8 राहत शिविर चलाए जा रहे हैं। अबतक जिले के किसी भी बाढ़ प्रभावित गांव में बिजली की सुविधा बहाल नहीं हो सकी है।

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उधर मुरैना में 25 जगह चंबल दाहिनी नहर टूट गई है। इससे कई गांवों में पानी भरा हुआ है। श्योपुर में पार्वती नदी के किनारे बसे गांवों में पानी भरा हुआ है। मकान टूट जाने के कारण लोग बारिश में सड़कों पर रहने को मजबूर हैं। श्योपुर के करीब डेढ़ सौ गांव बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों के मुताबिक यहां 11 राहत शिविर चलाए जा रहे हैं। 

बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित शिवपुरी जिले में 514 गांव बाढ़ और अतिवृष्टि के चपेट में आए हैं। इनमें करीब 125 गांव ऐसे हैं जहां बिजली की सुविधा बहाल नहीं हो सकी है। मगरौनी, कांकर व सीहोर सब स्टेशन भी बंद पड़े हैं। प्रदेश के अधिकांश गांवों में बिजली न होने का कारण ये है कि ट्रांसफॉर्मरों में पानी भर गए हैं और फॉल्ट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इन गांवों में बिजली की सुविधाएं बहाल होने में कितने समय लगेंगे ये कह पाना मुश्किल है।