आरा में महानंदा एक्सप्रेस के दो कोच पटरी से उतरे, स्टेशन मास्टर सस्पेंड

बिहार के आरा में रविवार तड़के 15483 महानंदा एक्सप्रेस के दो कोच पटरी से उतर गए। प्रारंभिक जांच में गलत सिग्नल के कारण ट्रेन के गलत लाइन पर जाने की बात सामने आई है। हादसे में कोई यात्री घायल नहीं हुआ।

Updated: Sep 06, 2026, 01:39 PM IST

आरा। बिहार के आरा रेलवे स्टेशन पर रविवार तड़के 15483 अलीपुरद्वार-दिल्ली महानंदा एक्सप्रेस के दो कोच पटरी से उतर गए। हादसा पंडित दीनदयाल उपाध्याय-दानापुर रेलखंड पर सुबह करीब 4 बजे हुआ। ट्रेन का एक जनरल कोच (SLR) और AC कोच H-1 डिरेल हुए। हादसे में किसी यात्री के हताहत होने की सूचना नहीं है। घटना के बाद आरा स्टेशन के स्टेशन मैनेजर एनके राय को निलंबित कर दिया गया है।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, महानंदा एक्सप्रेस आरा के प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर पहुंची थी और उसे दिल्ली की दिशा में आगे जाना था। इसी दौरान ट्रेन गलत दिशा में सासाराम लाइन की ओर बढ़ गई। लोको पायलट ने स्थिति भांपकर ट्रेन रोक दी। बाद में ट्रेन को रिवर्स करते समय SLR और H-1 कोच के पहिए पटरी से उतर गए। रेलवे की तकनीकी टीम अब सिग्नल और पॉइंट सिस्टम की जांच कर रही है।

बताया गया है कि करीब 3 बजकर 52 मिनट पर महानंदा एक्सप्रेस आरा स्टेशन पहुंची थी। उसी समय अप मेन लाइन पर ग्रीन सिग्नल 22587 अमृत भारत एक्सप्रेस के लिए दिया गया था। अमृत भारत एक्सप्रेस पटना से 3:16 बजे रवाना होकर करीब 3:58 बजे आरा से गुजर गई। यह ट्रेन स्टेशन पर नहीं रुकती है। इसी दौरान महानंदा एक्सप्रेस के लोको पायलट ने ग्रीन सिग्नल को अपनी ट्रेन के लिए समझ लिया और ट्रेन आगे बढ़ा दी।

ट्रेन के आगे बढ़ने पर इंजन के साथ SLR और H-1 कोच सासाराम की ओर जाने वाले पॉइंट को पार कर गए। लोको पायलट उमाशंकर पांडेय के अनुसार, उन्होंने कुछ दूरी पर देखा कि ट्रेन का पॉइंट दूसरी दिशा में बना हुआ है। उन्होंने तुरंत ट्रेन रोककर स्टेशन मास्टर से संपर्क किया। पायलट का कहना है कि स्टेशन मास्टर ने बताया कि ग्रीन सिग्नल उनकी ट्रेन के लिए नहीं था।

इसके बाद ट्रेन को पीछे लेने के निर्देश दिए गए। रिवर्स करते समय तकनीकी समस्या सामने आई और गार्ड से संपर्क कर ट्रेन को धीरे-धीरे पीछे किया गया। इसी दौरान जनरल कोच और H-1 के दो-दो पहिए पटरी से उतर गए। घटना में ट्रैक के पांच क्लिप और पॉइंट को भी नुकसान पहुंचा।

हादसे की जानकारी मिलने के बाद रेलवे कर्मचारियों ने यात्रियों को प्लेटफॉर्म नंबर-4 पर शिफ्ट किया। डिरेल हुए दोनों कोचों को ट्रेन से अलग किया गया और दूसरे इंजन की मदद से बाकी ट्रेन को दूसरे ट्रैक पर लाया गया। करीब 6:35 बजे दोनों कोचों को वापस पटरी पर चढ़ाने का काम पूरा किया गया। इसके बाद ट्रेन को रवाना कर दिया गया। हादसे के करीब साढ़े तीन घंटे बाद महानंदा एक्सप्रेस अपने गंतव्य की ओर चली।

स्टेशन मास्टर एनके राय ने बताया कि उन्हें सुबह करीब 4:20 बजे ट्रेन के डिरेल होने की सूचना मिली थी और वह करीब 10 मिनट में मौके पर पहुंच गए थे। उन्होंने कहा कि उनकी नजर में गलती लोको पायलट की थी। निलंबन के बाद राय ने अपनी ओर से किसी लापरवाही से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कर्तव्य के अनुसार काम किया और घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी किसकी है यह जांच के बाद स्पष्ट होगी।

महानंदा एक्सप्रेस के डिरेल होने से दिल्ली-हावड़ा रेल रूट पर परिचालन प्रभावित हुआ। वंदे भारत, विभूति एक्सप्रेस, गांधीधाम, कैपिटल एक्सप्रेस, इंटरसिटी, गरीब रथ, पैसेंजर और उधना एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनें प्रभावित हुईं और देरी से चलीं।