MP: बैरिकेडिंग तोड़ भोपाल में दाखिल हुआ किसानों का काफिला, सैकड़ों ट्रैक्टरों के साथ CM हाउस घेराव को बढ़े

संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में प्रदेश के 19 किसान संगठन इस आंदोलन में शामिल हैं। सुबह किसानों को औबेदुल्लागंज टोल प्लाजा के पास कुछ देर रोका गया था। प्रशासन ने किसान नेताओं से बातचीत कर उन्हें इंतजार करने का आग्रह किया, लेकिन बाद में किसान पैदल मार्च पर निकल पड़े।

Updated: Jul 28, 2026, 05:20 PM IST

भोपाल। मध्य प्रदेश में मूंग की शत प्रतिशत सरकारी खरीदी और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर किसान आंदोलित हैं। नर्मदापुरम, हरदा, इटारसी समेत अन्य जिलों के किसान संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले 'किसान क्रांति पैदल यात्रा' निकाल रहे हैं। यात्रा मंगलवार को अपने दूसरे दिन भोपाल में प्रवेश कर गया। किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने कई लेयर की बैरिकेडिंग की थी। हालांकि, वे बैरिकेड्स को रौंदते हुए आगे बढ़ गए।

मंडीदीप स्थित भोपाल सीमा पर कलियासोत नदी के ब्रिज के पास पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़कर किसान राजधानी में दाखिल हो गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब दो हजार किसान पैदल मार्च करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। जबकि उनके पीछे सैंकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों का काफिला भी चल रहा है। किसानों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे और मांगें पूरी होने तक वापस नहीं लौटेंगे।

भोपाल में प्रवेश के बाद किसान हाथों में तिरंगा लेकर आगे बढ़ रहे हैं। इस दौरान वे लगातार 'जय जवान-जय किसान' के नारे लगा रहे हैं। किसानों का पैदल मार्च जारी है, जबकि उनके पीछे ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों का काफिला भी आगे बढ़ रहा है। भोपाल कूच में शामिल किसान लंबी लड़ाई की तैयारी के साथ आए हैं। वे ट्रैक्टर-ट्रॉली में सात दिन का राशन और पानी लेकर पहुंचे हैं। कई किसान पहले से दाल-बाटी बनाकर भी साथ लाए हैं। उनका कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा और वे किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में प्रदेश के 19 किसान संगठन इस आंदोलन में शामिल हैं। सुबह किसानों को औबेदुल्लागंज टोल प्लाजा के पास कुछ देर रोका गया था। प्रशासन ने किसान नेताओं से बातचीत कर उन्हें इंतजार करने का आग्रह किया, लेकिन बाद में किसान पैदल मार्च पर निकल पड़े। अब आंदोलनकारी भोपाल में प्रवेश कर चुके हैं और तेजी से मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे हैं।

किसान नेता केदार सिरोही ने कहा कि प्रदेश में जहां अधिकांश उर्वरकों के लिए ई-टोकन व्यवस्था लागू है, वहीं सिंगल सुपर फॉस्फेट के संबंध में अलग व्यवस्था होने पर भी कई प्रश्न उठ रहे हैं। यदि इस व्यवस्था के कारण सब्सिडी वितरण, बिलिंग अथवा निगरानी प्रणाली में किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना है, तो केंद्र एवं राज्य सरकार को इसकी स्वतंत्र फोरेंसिक एवं वित्तीय जांच करानी चाहिए ताकि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग रोका जा सके। हमारा आरोप है की एसएसपी उर्वरक को बिना ई-टोकन व्यवस्था के कई जिलो में लागु करने का मतलब कम्पनियों को फर्जी तरीके से सब्सिडी देने का रास्ता है जो एक बड़ा घोटाला हो सकता है।

 किसानों की मांग

 1. मध्य प्रदेश की संपूर्ण उर्वरक वितरण व्यवस्था का स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच आयोग गठित किया जाए।

2. पिछले 20 वर्षों में उर्वरक वितरण, आवंटन एवं जिलावार आपूर्ति का श्वेत पत्र जारी किया जाए।

3. सेवानिवृत्त अधिकारियों को संविदा पर दी गई नियुक्तियों की समीक्षा कर पारदर्शी नीति लागू की जाए।

4. उर्वरक गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं का स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय ऑडिट कराया जाए।

5. ई-टोकन प्रणाली की वैज्ञानिक समीक्षा कर किसानों के हित में संशोधन किए जाएँ।

6. उर्वरक वितरण प्रणाली को पूर्णतः डिजिटल, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाया जाए ताकि किसी एक व्यक्ति पर निर्भरता समाप्त हो।