भारत में भी बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर पेरेंट्स की सहमति अनिवार्य करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

Updated: Sep 10, 2026, 01:24 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने 18 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्वतंत्र रूप से अकाउंट बनाने से रोकने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति और उनकी पहचान के सत्यापन जैसी अनिवार्य सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।

यह याचिका NGO जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस ने दाखिल की है। इसमें कहा गया है कि फेसबुक, स्नैपचैट (इंडिया) समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 13 साल की उम्र से अकाउंट बनाने की अनुमति देते हैं। याचिकाकर्ता के मुताबिक, यह व्यवस्था भारत की उस कानूनी स्थिति से मेल नहीं खाती है। इसमें 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति को नाबालिग माना जाता है।

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याचिका में केंद्र से इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स 2021 में जरूरी संशोधन करने या बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए अलग दिशा निर्देश जारी करने की मांग की गई है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति और सत्यापन के बिना 18 साल से कम उम्र के बच्चे के साथ सोशल मीडिया सेवा का अनुबंध न कर सके।

याचिका में यह भी कहा गया है कि नाबालिगों को डिजिटल सेवाओं तक पहुंच देने की स्थिति में अभिभावक की औपचारिक भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके लिए माता-पिता या कानूनी अभिभावक का वेरिफिकेशन या e-KYC कराया जा सकता है। याचिकाकर्ता ने यह प्रक्रिया संबंधित डिजिटल सेवा की प्रकृति और उससे जुड़े जोखिम के आधार पर तय करने की मांग की है।

याचिका में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल से जुड़े कई संभावित खतरों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें ऑनलाइन ग्रूमिंग, यौन शोषण, मानव तस्करी, साइबरबुलिंग, बच्चों के व्यवहार की प्रोफाइलिंग, निजी डेटा के दुरुपयोग और उम्र के लिहाज से अनुचित कंटेंट तक पहुंच जैसे जोखिम शामिल हैं।

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याचिकाकर्ता का तर्क है कि बच्चों को बिना किसी अभिभा वकीय निगरानी के डिजिटल प्लेटफॉर्म तक सीधी पहुंच देने से वे इन खतरों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट से बच्चों के लिए सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल सेवाओं के इस्तेमाल को लेकर ज्यादा सख्त सुरक्षा मानक तय करने का अनुरोध किया गया है।