MP राज्यसभा चुनाव: घंटों बाद कांग्रेस के विमान को मिली उड़ान की अनुमति, दो बार में शिफ्ट किए जाएंगे विधायक
कांग्रेस विधायकों को बेंगलुरु भेजने के लिए तैयार विमान को करीब 4 घंटे के इंतजार के बाद भोपाल एयरपोर्ट से उड़ान भरने की इजाजत मिल गई है।
भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी घमासान तेज हो गया है। एक तरफ कांग्रेस अपने विधायकों को सुरक्षित रखने के लिए बेंगलुरु भेजने की तैयारी में जुटी है, तो दूसरी ओर भोपाल में विधानसभा परिसर के अंदर ही हंगामे की तस्वीरें सामने आई हैं। उधर, भारी हंगामे के बाद आखिरकार भोपाल एयरपोर्ट पर कांग्रेस विधायकों को लेकर जाने वाले विशेष विमान को उड़ान भरने की अनुमति मिल गई है।
कांग्रेस विधायक अपने परिवार के साथ करीब 4 घंटे तक एयरपोर्ट पर ही इंतजार करते रहे। कांग्रेस ने दावा किया है कि विमान को अनुमति से संबंधित सारे डॉक्यूमेंट्स एयरपोर्ट अथॉरिटी को सौंपे गए। इसके बावजूद एयरपोर्ट ऑथोरिटी द्वारा विमान को उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। करीब चार घंटे के इंतजार के बाद विमान को उड़ान भरने की अनुमति दी गई। इसके बाद कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह खुद लिस्ट लेकर पार्टी विधायकों को बोर्ड कराते दिखे।
ईससे पहले कांग्रेस नेता सज्जन सिंह ने दावा किया था कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ने कांग्रेस के विशेष विमान को डिटेन कर लिया है। उधर, भोपाल विधानसभा में गहमा-गहमी का माहौल है। दरअसल, जब कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेता भोपाल एयरपोर्ट पर थे तभी खबर आई कि भाजपा ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन की चुनौती दी है। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह तत्काल विधानसभा पहुंचे।
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के विधानसभा पहुँचने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झूमाझटकी भी देखने को मिली। भाजपा का आरोप है कि मीनाक्षी ने तेलंगाना की हैदराबाद कोर्ट में लंबित एक मामले की जानकारी नामांकन पत्र में छिपाई है। इसी आधार पर भाजपा मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त करने की मांग कर रही है।
वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि मीनाक्षी के खिलाफ कोई आपराधिक प्रकरण नहीं है। उन्हें कोर्ट से केवल एक नोटिस मिला था। नामांकन की जांच के दौरान विधानसभा परिसर में दोनों दलों के नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामे की स्थिति भी बनी। बहरहाल, अब देखना दिलचस्प होगा कि रिटर्निंग अफसर द्वारा नामांकन को लेकर क्या फैसला लिया जाता है।




