MSP पर मूंग खरीदी की मांग को लेकर किसान संगठनों का भोपाल मार्च, पुलिस ने औबेदुल्लागंज टोल प्लाजा पर रोका

भोपाल की ओर बढ़ रहे किसानों के पैदल मार्च को पुलिस ने औबेदुल्लागंज से पहले टोल प्लाजा के पास रोक दिया है। किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है।

Updated: Jul 28, 2026, 01:04 PM IST

भोपाल। मध्य प्रदेश में मूंग की शत प्रतिशत सरकारी खरीदी और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर किसान आंदोलित हैं। नर्मदापुरम, हरदा, इटारसी समेत अन्य जिलों के किसान संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले 'किसान क्रांति पैदल यात्रा' निकाल रहे हैं। यात्रा मंगलवार को अपने दूसरे दिन बरखेड़ा से राजधानी भोपाल की ओर बढ़ी लेकिन पुलिस ने किसानों को भोपाल से पहले ही औबेदुल्लागंज टोल प्लाजा पर रोक दिया।

औबेदुल्लागंज टोल प्लाजा पर बड़ी संख्या में किसान मौजूद हैं और पुलिस के सामने नारेबाजी कर रहे हैं। आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाले नहीं हैं और भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। वहीं, प्रशासन ने उन्हें शाम पांच बजे तक इंतजार करने का आश्वासन दिया है।

इससे पहले 27 जुलाई यानी सोमवार को यात्रा के पहले ही दिन प्रशासन और किसानों के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। प्रशासन ने किसानों को रोकने के लिए कई जगह नाकेबंदी की थी। नर्मदापुरम जिले की सीमा पर नर्मदा ब्रिज से पहले लगाए गए बैरिकेड्स को आक्रोशित किसानों ने उखाड़ फेंका। इसके बाद बुधनी क्षेत्र में पुलिस के एक के बाद एक 5 बैरिकेड्स को हटाते हुए किसानों ने गड़रिया नाला पार किया। औबेदुल्लागंज-बैतूल फोरलेन से होते हुए किसान देर रात बरखेड़ा पहुंचे और वहीं पड़ाव डाला। इस दौरान हरदा में 40 किसान नेताओं को हिरासत में भी लिया गया।

क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष हरपाल सिंह सोलंकी ने रायसेन जिला प्रशासन पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि किसानों की औबेदुल्लागंज स्थित गुरुद्वारे में रुकने की योजना थी, लेकिन रायसेन प्रशासन ने गुरुद्वारे को ही बंद करा दिया। इसके चलते किसानों को मजबूरन बरखेड़ा में जैसे-तैसे रात काटना पड़ी।

किसान नेता केदार सिरोही ने कहा कि प्रदेश में जहां अधिकांश उर्वरकों के लिए ई-टोकन व्यवस्था लागू है, वहीं सिंगल सुपर फॉस्फेट के संबंध में अलग व्यवस्था होने पर भी कई प्रश्न उठ रहे हैं। यदि इस व्यवस्था के कारण सब्सिडी वितरण, बिलिंग अथवा निगरानी प्रणाली में किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना है, तो केंद्र एवं राज्य सरकार को इसकी स्वतंत्र फोरेंसिक एवं वित्तीय जांच करानी चाहिए ताकि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग रोका जा सके। हमारा आरोप है की एसएसपी उर्वरक को बिना ई-टोकन व्यवस्था के कई जिलो में लागु करने का मतलब कम्पनियों को फर्जी तरीके से सब्सिडी देने का रास्ता है जो एक बड़ा घोटाला हो सकता है।

 किसानों की मांग

 1. मध्य प्रदेश की संपूर्ण उर्वरक वितरण व्यवस्था का स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच आयोग गठित किया जाए।

2. पिछले 20 वर्षों में उर्वरक वितरण, आवंटन एवं जिलावार आपूर्ति का श्वेत पत्र जारी किया जाए।

3. सेवानिवृत्त अधिकारियों को संविदा पर दी गई नियुक्तियों की समीक्षा कर पारदर्शी नीति लागू की जाए।

4. उर्वरक गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं का स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय ऑडिट कराया जाए।

5. ई-टोकन प्रणाली की वैज्ञानिक समीक्षा कर किसानों के हित में संशोधन किए जाएँ।

6. उर्वरक वितरण प्रणाली को पूर्णतः डिजिटल, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाया जाए ताकि किसी एक व्यक्ति पर निर्भरता समाप्त हो।