जी भाईसाहब जी: दतिया में 1 और 111, नरोत्तम मिश्रा के लिए कुआं और खाई
MP Politics: आशुतोष तिवारी की जीत के बाद संभव है कि बीजेपी नरोत्तम मिश्रा को कोई जिम्मेदारी दे दे मगर समर्थक जानते हैं कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद मंसूबे तो कई बंधे लेकिन बीते तीन सालों में डॉ. नरोत्तम मिश्रा को पार्टी ने कोई जिम्मेदारी नहीं दी है।
आमतौर पर उपचुनाव में सत्ताधारी दल के विजयी होने की संभावना ज्यादा होती है मगर दतिया विधानसभा उपचुनाव में बहुत विश्वास से यह नहीं कहा जा सकता है कि बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी जीत ही रहे हैं। इसके पीछे का बड़ा कारण पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट न मिलने से उपजी नाराजगी है। यही कारण है कि दतिया में जीते कोई भी मगर फैसला पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के भविष्य का होगा।
दतिया उपचुनाव के लिए मंगलवार को प्रचार बंद हो गया। 30 जुलाई को मतदान होगा। 3 अगस्त को आने वाले परिणाम में अगर बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी की हार होती है तो इसमें एक कारण बीजेपी द्वारा डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट न देने से उपजी नाराजगी को भी माना जाएगा। हालांकि, ब्राह्मण वोटों को देखते हुए नरोत्तम मिश्रा के बदले दूसरे ब्राह्मण को ही टिकट दिया गया है। टिकट न मिलने के बाद दतिया में नरोत्तम मिश्रा समर्थकों न हंगामा किया मगर फिर पार्टी का कहा मान कर डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के लिए प्रचार तो शुरू किया मगर मंच पर उनकी ठसक और रोष अक्सर दिखाई देता रहा।
दतिया में उनके महत्व को जानते जुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभाओं में इतना जरूर कहा कि आशुतोष तिवारी और डॉ. नरोत्तम मिश्रा मिल कर एक और एक 11 हैं। इनके साथ सीएम मोहन यादव मिल कर 111 होते हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव एक और एक मिला कर ग्यारह होने की बात कह जरूर रहे हैं लेकिन सच तो यह भी है कि आशुतोष तिवारी के जीतने पर 1 और 111 यानी विधायक और मुख्यमंत्री की जुगलबंदी होगी जबकि 11 यानी नरोत्तम मिश्रा स्थानीय राजनीति में किनारे होते जाएंगे।
एक आकलन यह भी है कि आशुतोष तिवारी की जीत के बाद संभव है कि बीजेपी नरोत्तम मिश्रा को कोई जिम्मेदारी दे दे मगर समर्थक जानते हैं कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद मंसूबे तो कई बंधे लेकिन बीते तीन सालों में डॉ. नरोत्तम मिश्रा को पार्टी ने कोई जिम्मेदारी नहीं दी है। इसलिए समर्थक चाहते हैं कि नरोत्तम मिश्रा को टिकट न देने पर मतदाता बीजेपी को सबक सीखाए। ऐसा हुआ तो बीजेपी अपनी हार का जिम्मेदार मानते हुए डॉ. नरोत्तम मिश्रा को वैसे ही साइडलाइन कर देगी। डॉ. नरोत्तम मिश्रा के लिए एक तरफ कुंआ है और दूसरी तरफ खाई। उप चुनाव के बाद नया रोल ही कुछ कर पाएगा अन्यथा दतिया के दादा यानी नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक किले के 1–1 तिनके को बिखरने से रोकना मुश्किल होगा।
किसानों की रणनीति, भटक न जाए आंदोलन
मूंग की खरीद सहित विभिन्न मांगों को लेकर हरदा-नर्मदापुरम क्षेत्र के किसान आंदोलन कर रहे हैं। सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के लिए किसान गांवों से निकल गए थे। इसबीच तीन बार समय बदला गया फिर मुलाकात रद्द हो गई। प्रशासन की ओर से बताया गया कि सीएम डॉ. मोहन यादव दिल्ली चले गए हैं। इसके बाद किसानों ने सोमवार को नर्मदापुरम में नर्मदा किनारे सेठानी घाट से आंदोलन की घोषणा की थी। प्रशासन की योजना थी कि किसानों को स्थानीय स्तर पर रोक कर आक्रोश शांत करवाया जाए। इस दौरान 39 किसान नेताओं एवं पदाधिकारियों को हिरासत में लिया गया या नजरबंद किया गया है।
किसानों संगठनों ने महसूस किया कि हरदा में किसान नेताओं को गिरफ्तार इसलिए किया गया ताकि हरदा में आंदोलन हो और नर्मदापुरम से शुरू होने वाला पैदल मार्च अपनी ताकत खो दे। इसके बाद भी किसानों नेताओं ने अपनी रणनीति साफ रखते हुए तय किया कि उनका फोकस भोपाल तक पैदल मार्च ही होगा। वे अलग-अलग आंदोलन कर अपनी ताकत को बंटने नहीं देंगे। इस रणनीति पर काम करते हुए मंगलवार को जगह-जगह से किसान भोपाल पहुंच गए। किसान नेता केदार सिरोही ने कहा है कि यह लड़ाई सिर्फ मूंग उत्पादक किसानों की नहीं है पूरे मध्य प्रदेश के किसानों के स्वाभिमान और आजादी की लड़ाई बन गई है। किसान शक्ति का एहसास करवाने के लिए भोपाल पहुंचने में तो किसान नेताओं की रणनीति ने प्रशासन को गच्चा दे दिया है।
ये कौन सीजेपी है जो ज्योतिरादित्य सिंधिया के पीछे पड़ी है
देश में सीजेपी यानी कॉकरोच जनता पार्टी तथा जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन की धूम है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब अलग-अलग नेता सीजेपी के निशाने पर है। इस बीच मध्यप्रदेश में सोशल मीडिया पर एक सीजेपी मध्यप्रदेश चर्चा में है। यह सीजेपी मध्यप्रदेश सोशल मीडिया पर लगातार केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर पोस्ट कर रहा है।
बीते सप्ताह जब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दतिया में सभी की और विकास का वादा किया तो सीजेपी मध्यप्रदेश ने पोस्ट कर कटाक्ष किया। इस पोस्टर में सिंधिया के हवाले से कहा गया था कि दतिया को विकसित करेंगे! जनता की ओर से जवाब दिया गया, महाराज पहले अपना घर संभालो, फिर दतिया का ख्याल रखना। इस पोस्टर में सिंधिया के लोकसभा क्षेत्र की हकीकत बताते हुए लिखा गया कि सड़कें गड्ढों में, पेयजल की किल्लत, स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल, शिक्षा व्यवस्था कमजोर, युवाओं को रोजगार नहीं, किसान परेशान, कर्ज में डूबे।
यूथ आंदोलन के बाद मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ। इस पर मीम में सीजेपी मध्यप्रदेश ने मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के फोटो के साथ लिखा कि बीजेपी में शामिल हुआ था कि यहां मंत्रियों के इस्तीफे नहीं होते। मेरे आते ही बीजेपी में भी इस्तीफे होने लगे। ऐसा न हो कि जेन जी रिचार्ज को लेकर जंतर-मंतर आ जाए। इसके बाद किस पार्टी में जाऊंगा।
सीजेपी मध्यप्रदेश का पूरा नाम सिटीजन जस्टिस पोस्ट मध्यप्रदेश है। असल में, दिल्ली के आंदोलन के बाद अब हर जगह विरोध की अवाज उठाने के लिए इस तरह के प्लेटफार्म सक्रिय हो गए हैं।
शिवराज के आंगन में मोर, रास्ते में नाराज लोग
कुछ बरस पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास पर सुबह की सैर के दौरान मोरों के साथ बिताए गए पलों की पोस्ट वायरल हुई थी। ऐसी ही एक पोस्ट बीते सप्ताह वायरल हुई। इस पोस्ट के कारण केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान फिर चर्चा में आ गए। खुद शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली के अपने बंगले के आँगन में घूमते हुए मोर का फोटो पोस्ट किया। इस फोटो के साथ उन्होंने लिखा कि हम जब प्रकृति की गोद में बैठते हैं, तो सारे भेद-भाव मिट जाते हैं। ऐसा लगता है कि हम सभी मनुष्य पेड़-पौधे, पशु-पक्षी एक ही चेतना के अंग हैं, कोई दूसरा नहीं। उसी आत्मीय भाव से आज मैंने मोर को देखा, शायद मोर भी मुझे ही देख रहा है, ऐसा लगा हम एकात्म हो गए। अदभुत आनंद।
उनके बंगले पर जितना सुकून दिखाई दे रहा है, उतना सड़क या कहिये जनता में नहीं है। किसान तो उनसे एमएसपी की मांग कर ही रहे हैं। इस बीच दतिया चुनाव के लिए जाते ग्रामीणों ने उनका काफिला रोक लिया। लोगों ने उन्हें पिछोर को जिला बनाने का वादा याद दिलाते हुए पूछा कि वादा कब पूरा होगा? अपने चिरपरिचित अंदाज में शिवराज ने सिर पर हाथ रख कर फिर आश्वासन दिया है कि मैं ऊपर बात करूंगा कि पिछोर को जिला बनाया जाए।




