MP: 9 दिन बाद फिर बदला मौसम, बालाघाट-डिंडौरी में भारी बारिश का अलर्ट, 31 जिलों में हल्की बारिश के आसार

मध्य प्रदेश में नौ दिन बाद मानसून फिर सक्रिय होने जा रहा है। IMD ने बालाघाट और डिंडौरी में भारी बारिश तथा 31 जिलों में गरज-चमक और हल्की बारिश का अलर्ट जारी किया है।

Updated: Jul 17, 2026, 12:02 PM IST

भोपाल। मध्य प्रदेश में करीब नौ दिन के अंतराल के बाद एक बार फिर तेज बारिश का दौर लौटने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के भोपाल केंद्र ने शुक्रवार के लिए बालाघाट और डिंडौरी जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा प्रदेश के 31 जिलों में गरज-चमक, तेज हवा और हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हो रहे कम दबाव के क्षेत्र और प्रदेश के ऊपर बने तीन साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 19 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस भी सक्रिय होगा। इसके प्रभाव से मध्य प्रदेश में मानसून फिर रफ्तार पकड़ सकता है और कई इलाकों में अच्छी बारिश होने की उम्मीद है।

प्रदेश में पिछले नौ दिनों से कहीं भी व्यापक स्तर पर भारी बारिश दर्ज नहीं हुई है। इसका असर मानसूनी आंकड़ों पर भी दिखाई दे रहा है। अब तक राज्य में 243.3 मिमी (9.6 इंच) वर्षा रिकॉर्ड की गई है। जबकि, इस अवधि में सामान्य रूप से 281.3 मिमी (11.1 इंच) बारिश होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में औसत वर्षा सामान्य से 13 प्रतिशत कम रही है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी सबसे अधिक 26 प्रतिशत दर्ज की गई है। जबकि, पश्चिमी हिस्से में यह कमी 2 प्रतिशत रही।

मौसम विभाग ने बताया कि बालाघाट और डिंडौरी में भारी बारिश हो सकती है। वहीं, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, इंदौर, खरगोन, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, बैतूल, नर्मदापुरम, रायसेन, सागर, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, दमोह, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, भिंड, दतिया, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, जबलपुर, सिवनी, मंडला, अनूपपुर और उमरिया में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है।

इसके विपरीत ग्वालियर, भोपाल, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, सीहोर, राजगढ़, शाजापुर, आगर-मालवा, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम और झाबुआ में गर्मी और उमस का असर बना रह सकता है।

मानसूनी स्थिति पर नजर डालें तो प्रदेश के 35 जिलों में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। इनमें अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आलीराजपुर, बड़वानी, बैतूल, दतिया, धार, झाबुआ, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन, श्योपुर, शिवपुरी और विदिशा शामिल हैं। दूसरी ओर निवाड़ी, आगर-मालवा, अशोकनगर, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, देवास, गुना, ग्वालियर, हरदा, इंदौर, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर और उज्जैन ऐसे जिले हैं जहां सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक का कहना है कि फिलहाल प्रदेश में मानसून की स्थिति संतोषजनक बनी हुई है लेकिन हाल के दिनों में बारिश की कमी कृषि और जल संसाधनों के लिए चिंता का विषय है। उनके अनुसार, बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रही निम्न दबाव प्रणाली की दिशा और तीव्रता तय करेगी कि मानसून कितनी तेजी से दोबारा सक्रिय होता है। यदि मौसम प्रणालियां अनुकूल रहीं तो जुलाई के दूसरे पखवाड़े में मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।