महाकाल दर्शन के लिए AI से बनाया फर्जी VIP पास, सुरक्षा जांच में तीन युवक धराए

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भोपाल के तीन लड़कों ने AI टूल से फर्जी वीआईपी पास बनाकर प्रवेश किया। ढाई साल से बंद गर्भगृह दर्शन का जिक्र होने पर सुरक्षाकर्मियों को शक हुआ और वे पकड़े गए।

Publish: Jul 15, 2026, 02:10 PM IST

उज्जैन। महाकाल नगरी उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के जरिए चकमा देने की कोशिश का मामला सामने आया है। भोपाल से आए एक 19 वर्षीय युवक और उसके दो नाबालिग साथियों ने एआई टूल का इस्तेमाल कर वीआईपी प्रवेश पास जैसा फर्जी पास तैयार किया और उसी के आधार पर मंदिर परिसर में प्रवेश कर लिया। हालांकि, सुरक्षा जांच के दौरान पास में गड़बड़ी पकड़ में आने पर तीनों को हिरासत में ले लिया गया।

महाकाल थाना प्रभारी गगन बादल ने बताया कि जांच के दौरान सुरक्षाकर्मियों की नजर पास पर लिखे गर्भगृह दर्शन पर पड़ी जिससे उन्हें संदेह हुआ। दरअसल, पिछले करीब ढाई सालों से श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह में प्रवेश पूरी तरह बंद है। इसके बाद पास पर मौजूद बारकोड और अन्य विवरणों का सत्यापन किया गया। जिसमें दस्तावेज पूरी तरह फर्जी निकला।

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पुलिस जांच में मुख्य आरोपी की पहचान भोपाल के कोलार रोड निवासी 19 वर्षीय भरत उइके के रूप में हुई है। उसके साथ मौजूद दोनों साथी नाबालिग हैं। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने मंगलवार दोपहर एआई टूल की मदद से वीआईपी पास जैसा डिजाइन तैयार किया था और उसी का उपयोग कर मंदिर में प्रवेश का प्रयास किया।

पुलिस ने भरत उइके के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है। जबकि, दोनों नाबालिगों के मामले में किशोर न्याय अधिनियम के तहत कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। कार्रवाई पूरी होने के बाद तीनों को नियमानुसार सामान्य श्रद्धालुओं की कतार से बाबा महाकाल के दर्शन कराए गए।

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इस घटना के बाद महाकाल मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और प्रवेश पास की डिजिटल सत्यापन प्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई जैसी आधुनिक तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल और उनके संभावित दुरुपयोग को देखते हुए धार्मिक और संवेदनशील स्थलों पर डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम को अधिक सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।