भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट का विरोध, धरने पर बैठे 66 गांवों के किसान

भोपाल विकास योजना 2047 के ड्राफ्ट के विरोध में किसानों और मिसरोद के रहवासियों ने प्रदर्शन किया। 66 गांवों की कृषि भूमि को ग्रीन बेल्ट में बदलने और पुरानी आबादी से 45 मीटर चौड़ी सड़क प्रस्तावित करने पर टीएनसीपी को आपत्तियां सौंपी गई।

Updated: Oct 22, 2026, 05:54 PM IST

भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट को लेकर गुरुवार को किसानों और स्थानीय रहवासियों ने विरोध दर्ज कराया। मुगालिया छाप के किसानों ने 66 गांवों की कृषि भूमि को रिवरफ्रंट, फॉरेस्ट और ग्रीन बेल्ट जैसी श्रेणियों में शामिल किए जाने पर सवाल उठाए। जबकि, मिसरोद के रहवासियों ने पुरानी आबादी के बीच से प्रस्तावित 45 मीटर चौड़ी सड़क को हटाने की मांग की। दोनों पक्षों ने नगर तथा ग्राम निवेश (टीएनसीपी) विभाग को अपनी आपत्तियां सौंपते हुए कहा कि विकास योजना तैयार करते समय खेती-किसानी, पुराने आवासीय क्षेत्रों, सार्वजनिक संस्थानों और पर्यावरण के संरक्षण का ध्यान रखा जाना चाहिए।

मुगालिया छाप के किसान अपनी मांगों के समर्थन में पैदल मार्च करते हुए भोपाल पहुंचे थे। वे मास्टर प्लान के ड्राफ्ट पर आपत्तियां दर्ज कराने टीएनसीपी कार्यालय जाना चाहते थे लेकिन नीलबड़ में पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इसके बाद किसानों ने सड़क पर बैठकर धरना दिया और प्रस्तावित योजना के खिलाफ नारेबाजी की।

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किसानों का कहना है कि भोपाल विकास योजना 2047 के प्रस्तावों में 66 गांवों की कृषि भूमि को रिवरफ्रंट, फॉरेस्ट, ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल किया जा रहा है। इससे हजारों किसानों की जमीन और खेती पर असर पड़ने की आशंका है। किसानों के मुताबिक, कृषि भूमि से जुड़े इन प्रावधानों के कारण उनकी आजीविका प्रभावित हो सकती है। उन्होंने संबंधित प्रस्तावों की दोबारा समीक्षा करने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान टीएनसीपी की सहायक संचालक आयुक्त इंदू त्रिपाठी किसानों से बातचीत करने नीलबड़ पहुंची। उन्होंने बताया कि नियमों के तहत मास्टर प्लान पर आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराने के लिए 30 दिन का समय निर्धारित किया गया है। विभाग को मिलने वाली आपत्तियों को ऑनलाइन पोर्टल पर डिजिटाइज किया जाएगा। इसके बाद संबंधित पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा।

हालांकि, किसानों ने मौजूदा समयसीमा को अपर्याप्त बताते हुए इसे एक महीने और बढ़ाने की मांग की। उनका कहना है कि अतिरिक्त समय मिलने से प्रभावित गांवों के किसान प्रस्तावों को समझकर अपनी आपत्तियां और सुझाव व्यवस्थित तरीके से दर्ज करा सकेंगे।

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दूसरी ओर ग्राम मिसरोद के रहवासियों ने विकास योजना में खसरा नंबर 205 से होकर पुरानी आबादी के बीच प्रस्तावित 45 मीटर चौड़ी सड़क पर आपत्ति जताई है। उन्होंने गुरुवार को टीएनसीपी विभाग को लिखित आवेदन देकर इस मार्ग को योजना से हटाने की मांग की। रहवासियों का कहना है कि प्रस्तावित सड़क से सालों पुराने मकानों और सैकड़ों परिवारों के प्रभावित होने की आशंका है। इसके अलावा क्षेत्र के प्राचीन मंदिरों और सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान पर भी असर पड़ सकता है। उनका तर्क है कि सड़क की योजना बनाते समय मौजूदा बस्ती की स्थिति और वहां रहने वाले लोगों के हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

मिसरोद के रहवासियों ने सड़क के प्रस्ताव पर आपत्ति के साथ क्षेत्र में स्थित सार्वजनिक और सामुदायिक संस्थानों के संरक्षण की मांग भी रखी है। इनमें शासकीय अस्पताल मिसरोद, सेवा सहकारी समिति, लोक निर्माण विभाग का गेस्ट हाउस, राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित कार्यालय और पाटीदार समाज का सामाजिक एवं मांगलिक प्रांगण शामिल हैं। रहवासियों ने क्षेत्र में मौजूद लगभग 10 से 15 पुराने पीपल और बरगद के पेड़ों को सुरक्षित रखने की मांग की है। 

उनका कहना है कि सड़क निर्माण की प्रस्तावित योजना पर निर्णय लेने से पहले मौके की वास्तविक स्थिति का आकलन जरूरी है। इसके लिए उन्होंने प्रस्तावित मार्ग का संयुक्त स्थल निरीक्षण कराने और पुरानी आबादी तथा सार्वजनिक संस्थानों को कम से कम प्रभावित करने वाले वैकल्पिक रास्ते का तकनीकी सर्वे कराने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि वैकल्पिक मार्ग की संभावनाओं की जांच से विकास और स्थानीय हितों के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।

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भोपाल विकास योजना 2047 के ड्राफ्ट पर सामने आई दोनों आपत्तियों में अलग-अलग क्षेत्रों की समस्याएं उठाई गई हैं। मुगालिया छाप के किसान कृषि भूमि के प्रस्तावित उपयोग में बदलाव और दावे-आपत्तियों के लिए अतिरिक्त समय की मांग कर रहे हैं। वहीं, मिसरोद के रहवासी आबादी के बीच से प्रस्तावित सड़क हटाने और वैकल्पिक मार्ग की तकनीकी जांच कराने पर जोर दे रहे हैं। मिसरोद के रहवासियों ने यह भी कहा है कि उनकी मांगों पर विचार नहीं किए जाने की स्थिति में वे विधिक कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखेंगे। उन्होंने अपनी मांग को ग्राम मिसरोद की ग्राम आबादी बचाओ, हमारा गांव–हमारा अधिकार के नारे के साथ सामने रखा है।