श्रद्धालुओं की आस्था अक्षुण्ण रहे, शंकराचार्यों के बाद अग्निपीठाधीश्वर ने किया दिग्विजय सिंह की यात्रा का समर्थन

20 अक्टूबर को उज्जैन से अयोध्या के लिए शुरू होगी दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा

Updated: Oct 18, 2026, 02:49 PM IST

भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा को शंकराचार्यों के बाद अब अग्निपीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर ब्रह्मर्षि श्रीमद् रामकृष्णानंद जी महाराज का भी समर्थन मिला है। उन्होंने दिग्विजय सिंह को शुभाशीर्वाद संदेश भेजकर 20 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन उज्जैन से अयोध्या तक शुरू होने वाली यात्रा की सफलता की मंगलकामना की है।

रामकृष्णानंद जी महाराज ने अपने संदेश में दिग्विजय सिंह को गुरु भाई बताते हुए उनकी पैदल नर्मदा परिक्रमा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम सत्य, धर्म, न्याय और मर्यादा के सर्वोच्च आदर्श हैं। उनके नाम पर अर्पित प्रत्येक दान, चढ़ावा और समर्पण करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रतीक है। इस आस्था की पवित्रता की रक्षा करना और धार्मिक कार्यों में पारदर्शिता, शुचिता तथा उत्तरदायित्व सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े विषयों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके गुरुदेव परम पूज्य ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज ने इस विषय पर लंबे समय तक धार्मिक, सामाजिक और न्यायिक स्तर पर अपनी भूमिका निभाई। श्रीराम जन्मभूमि करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की श्रद्धा और समर्पण का केंद्र है।

रामकृष्णानंद जी महाराज ने कहा कि धर्म का वास्तविक स्वरूप सत्य, अहिंसा, सद्भाव और मर्यादा में निहित है। उन्होंने कामना की कि सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए शांतिपूर्ण, संयमित और धर्मसम्मत मार्ग का अनुसरण करे तथा समाज में जागरूकता, पारदर्शिता और सनातन मूल्यों के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत बनाए।

अपने शुभाशीर्वाद संदेश में उन्होंने शास्त्र वाक्य 'यतो धर्मस्ततो जयः' का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां धर्म है, वहीं विजय है। उन्होंने यात्रा के निर्विघ्न और शांतिपूर्ण संपन्न होने की कामना करते हुए कहा कि सनातन धर्म की शाश्वत परंपराएं सुदृढ़ हों, श्रद्धालुओं की आस्था अक्षुण्ण रहे और समाज में सत्य, न्याय तथा सद्भाव की प्रतिष्ठा हो।