दफ्तर दरबारी: मंत्री को कैसा डर, अफसरों और कर्मचारियों पर क्यों लगा बैन

MP IAS: कर्मचारियों की नाराजगी अपनी जगह है लेकिन कारण तलाशे जा रहे हैं कि सहज उपलब्ध होने की जगह मंत्री ने अपने विभाग के अमले से दूरी क्यों चुनी? उन्हें किस बात का डर है?

Updated: Sep 19, 2026, 03:39 PM IST

मंत्री अपने विभाग का मुखिया होता है। अपने विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के सुख-दु:ख से सीधे मंत्री का नाता होता है। इसी नाते को गाढ़ा कर कई मंत्रियों ने अपने कार्यकाल को सफल बनाया है लेकिन ऐसा क्या हुआ कि प्रदेश के कैबिनेट मंत्री से विभाग के अफसरों और कर्मचारियों का मिलना बैन कर दिया गया है? ऐसा कौन सा डर है कि एक आदेश जारी कर कहना पड़ा कि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट से मिलने भोपाल स्थित विभागीय कार्यालय नहीं जाएगा। मंत्री से मुलाकात के लिए प्रशासनिक चैनल के जरिए पहले अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है।

यह निर्देश विभाग के अधीन आने वाले सभी मुख्य अभियंताओं और परियोजना संचालकों के माध्यम से मैदानी अमले तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश की अवहेलना करने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। एग्जीक्यूटिव इंजीनियर आशीष महाजन ने यह आदेश प्रमुख अभियंता कार्यालय की ओर से जारी किया है। एक तरफ, बीजेपी अपने प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों की तय दिन और समय पर मौजूदगी को परंपरा बना रही है ताकि कार्यकर्ताओं के लिए मंत्रियों से मिलना आसान हो सके। दूसरी तरफ, जल संसाधन विभाग के कर्मचारियों और अफसरों के लिए अपने आका मंत्री से मुलाकात दूभर हो गई है। इस आदेश को प्रशासनिक पारदर्शिता और संवाद के विरूद्ध बताया जा रहा है। अपनी बात मंत्री के समक्ष सीधे रख पाने की लोकतांत्रिक सुविधान छीन जाने से विभाग के कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों में नाराजगी है। 

कर्मचारियों की नाराजगी अपनी जगह है लेकिन कारण तलाशे जा रहे हैं कि सहज उपलब्ध होने की जगह मंत्री ने अपने विभाग के अमले से दूरी क्यों चुनी? उन्हें किस बात का डर है कि मुलाकात के पहले प्रभारी अफसर से अनुमति की शर्त लगा दी गई है? सवाल तो यह भी कि जब अफसर की शिकायत हो तो मंत्री से मुलाकात की अनुमति कैसे मिलेगी? बहरहाल, प्रदेश में जन विश्वास अभियान जारी है और मंत्री तुलसीराम सिलावट से मुलाकात और संवाद का रास्ता बंद कर दिया गया है। 

आक्रोश शांत करना था, अफसर मशाल जलवा बैठे

सागर शराब कांड के बाद स्थिति संभालने भेजे गए संभाग आयुक्त दिलीप कुमार के कथित बयान से नया आक्रोश पनप गया है। उनके इस बयान के कारण केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगांव बांध और ललितपुर-सिंगरौली रेल मार्ग से बेदखल हो रहे ग्रामीणों का ‘चिता आंदोलन’ मशाल आंदोलन में बदल गया।  

ग्रामीणों के चिता आंदोलन के सातवें दिन सागर संभाग के कमिश्नर दिलीप कुमार पन्ना दौरे पर पहुंचे। ग्रामीणों ने शिकायत की कि उनके घरों में पानी भर रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री की ओर से घोषित 12.50 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता 2 महीने बाद भी मिली नहीं है। कई परिवारों को 8 साल पुराना 5 लाख का मुआवजा तक नहीं मिला है। अधिकार मांगने पर बिजली-पानी काट दी गई है। इसी कारण ग्रामीण चिता आंदोलन कर रहे हैं। इस दौरे के दौरान का एक बयान तेजी से चर्चा में आया। बताया गया कि कमिश्नर दिलीप कुमार ने आंदोलनकार कर रहे ग्रामीणों को “गैर-विस्थापित” कह दिया। इस एक बयान से ऐसा आक्रोश फैला कि प्रदर्शनकारियों की उपस्थित 500 से बढ़कर 1300 होने का दावा किया गया। विस्थापितों ने रात में भी आंदोलन जारी रखते हुए मशाल जुलूस निकाल दिया है।

नेता अमित भटनागर का कहना है कि जब स्वयं प्रशासनिक टीम ने मौके पर 150 से अधिक प्रभावितों के नाम दर्ज किए हैं, तो इतने बड़े अधिकारी का यह बयान संवेदनहीनता और छुपाव की पराकाष्ठा है। जब तक हर प्रभावित परिवार को पारदर्शी सर्वे, पूर्ण मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास नहीं मिल जाता, तब तक यह लड़ाई थमने वाली नहीं है। हालांकि, कमिश्नर दिलीप कुमार ने मुआवजा अधिकतम एक माह में सभी में खाते में पहुंच जाएगा। मगर यह आश्वासन भी उनके कथित बयान के घाव पर मरहम साबित नहीं हुआ। 

आईएएस अफसरों का भक्ति भाव चर्चा में...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल, भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह सहित कई जिलों के कलेक्टर और आईपीएस अफसर दीपक जलाते हुए तथा नदी की आरती करते हुए नजर आए। उनकी यह भक्ति भाव चर्चा में रहा लेकिन श्योपुर पहुंचे गरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे अलग कारणों से चर्चा में आ गए। प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर श्योपुर में नदी के संगम पर गंगा आरती आयोजित की गई थी। आरती का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर आईएएस संकेत भोंडवे की आलोचना होने लगी।

वीडियो में नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे गंगा आरती करते हुए नजर आ रहे हैं, लेकिन इस दौरान उनके पैरों में जूते दिखाई दे रहे हैं। जबकि कलेक्टर शीला दाहिमा सहित अन्य लोगों ने जूते उतार दिए थे। मान्यतानुसार देवी-देवताओं और पवित्र नदियों की आरती के दौरान जूते-चप्पल उतारने की परंपरा है। ऐसे में आयुक्त का जूते पहनकर आरती करते हुए वीडियो सामने आने के बाद सवाल उठना तय थे। जब आईएएस संकेत भोंडवे की आलोचना तेज हुई तो सोशल मीडिया पर फोटो क्रॉप कर पोस्ट किया गया ताकि आरती करते हुए पहने गए जूते दिखाई न दे। 

छह दर्जन मौत और आईएएस का कनेक्शन

सागर और इंदौर में हुई करीब 80 मौतों का एक महिला आईएएस का अजीब कनेक्शन है। दोनों ही मामलों में महिला आईएएस पर कार्रवाई न होना चर्चा में है। मार्च 2025 को रामनवमी पर इंदौर में हुए बावड़ी हादसे में 36 लोगों की जान गई थी। स्थानीय लोगों का आरोप था कि इस हादसे के लिए नगर निगम जिम्मेदार है। उस समय निगम की मुखिया आईएएस प्रतिभा पाल थीं। 36 लोगों की जान जाने के बाद सरकार ने सिर्फ दो लोगों को सस्पेंड किया था लेकिन निगम आयुक्त प्रतिभा पाल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। बार में सरकार ने आईएएस प्रतिभा पाल को रीवा कलेक्टर बनाया गया था। कलेक्टर बनाए जाने पर सोशल मीडिया पर कई सवाल उठ थे कि उन्हें सजा मिली है या प्रमोशन मिला है। 

आईएएस प्रतिभा पाल अभी सागर में कलेक्टर हैं। इंदौर में बावड़ी हादसे में तीन दर्जन लोगों की जाग गई थी तो सागर में जहरीली शराब से भी इतने ही लोगों के मरने की जानकारी सामने है। यहां भी मौत की संख्या पर मतभेद है। सागर में जहरीली शराब धड़ल्ले से बेच पाना प्रशासनिक अक्षमता माना गया। इस कारण कलेक्टर और एसपी पर कार्रवाई और उन्हें हटाने की मांग हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दौरे के बाद सागर के कमिश्नर आईजी बदले गए, दो निचले अफसर सस्पेंड हुए मगर कलेक्टर कायम है।