शराब में मिलाया जा रहा था आर्टिफिशियल फ्लेवर, FSSAI ने Old Monk, RC समेत इन ब्रांड्स की बिक्री पर लगाई रोक
नियमों के मुताबिक शराब में सिर्फ नेचुरल फ्लेवर की इजाजत है लेकिन कंपनियां मैच्योरिटी के लंबे प्रोसेस से बचने के लिए शॉर्टकट अपना रही थीं। ऐसे में FSSAI ने अब इन नामी ब्रांड्स पर सख्ती दिखाई है।
नई दिल्ली। फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (FSSAI) ने शराब बनाने वाली कई कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। इनमें ओल्ड मोंक, मैकडॉवेल्स, बैगपाइपर, एंटीक्विटी ब्लू और रॉयल चैलेंज जैसे लोकप्रिय ब्रांड बनाने वाली कंपनियां भी शामिल हैं। इन कंपनियों पर आरोप है कि इन्होंने बिना अनुमति वाले फ्लेवरिंग तरीकों का इस्तेमाल किया। साथ ही शराब की एज से जुड़े भ्रामक दावे करके फूड सेफ्टी और लेबलिंग नियमों का उल्लंघन हुआ।
दरअसल, शीरा, माल्ट और अंगूर का वो सदियों पुराना घूंट जिसे बनने में सालों-साल का सब्र लगता था, अब उसे लैब के महज कुछ बूंद कैमिकल्स से बनाया जा रहा था। यानी, जिस एंटीक्विटी, रॉयल चैलेंज और दशकों पुरानी ओल्ड मॉन्क को लोग ऑथेंटिक और प्रीमियम समझकर पी रहे थे, उसमें बोतल का असली स्वाद नहीं बल्कि ऊपर से मिलाया गया आर्टिफिशियल फ्लेवर घुल रहा था।
देश में जब इस खतरनाक शॉर्टकट और मिलावट के खेल से पर्दा उठा तो फूड सेफ्टी रेगुलेटर FSSAI के भी होश उड़ गए। शराब की दुनिया के सबसे बड़े दिग्गज यूनाइटेड स्पिरिट्स, इनब्रू और मोहन रॉकी के कई मशहूर ब्रांड्स पर FSSAI ने करारा चाबुक चलाया है। लैब टेस्ट की रिपोर्ट सामने आते ही व्हिस्की और रम के चुनिंदा वेरिएंट्स की बिक्री पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह कार्रवाई लैब टेस्ट में उत्पादों के सब-स्टैंडर्ड पाए जाने के बाद की गई है। FSSAI द्वारा जारी बयान में कहा गया कि लैब टेस्ट में पाया गया कि कुछ मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स शराब में प्राकृतिक मैच्योरिटी (परिपक्वता) और पारंपरिक निर्माण प्रक्रियाओं के बजाय बाहरी आर्टिफिशियल या नेचर-आइडेंटिकल फ्लेवर्स मिला रही थीं। हैरानी की बात यह है कि रम में रम का स्वाद और व्हिस्की में व्हिस्की का स्वाद देने के लिए ऊपर से फ्लेवर मिलाया जा रहा था। नियामक ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी कोई सिस्टम मान्य नहीं है जहां शराब में उसी पेय का आर्टिफिशियल फ्लेवर अलग से जोड़ा जाए।
खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार, अल्कोहलिक बेवरेजेस में केवल प्राकृतिक सुगंधित पदार्थों के इस्तेमाल की अनुमति है। FSSAI का आरोप है कि कंपनियां शीरा, माल्ट या अंगूर जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से स्वाभाविक रूप से स्वाद विकसित करने और उचित परिपक्वता की लंबी प्रक्रिया से बचने के लिए शॉर्टकट अपना रही थीं।




