2 हज़ार रुपए प्रति क्विंटल तक गिरे सोयाबीन के दाम, सोयामील के संभावित आयात ने बढ़ाई चिंता

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केन्द्र सरकार जल्द ही भारत में 15 लाख टन सोयाबीन के आयात को मंज़ूरी दे सकती है, इन कयासों के शुरु होने के बाद से ही सोयबीन उत्पादों के दाम तेज़ी से गिरने लगे हैं

Updated: Aug 11, 2021, 04:56 PM IST

2 हज़ार रुपए प्रति क्विंटल तक गिरे सोयाबीन के दाम, सोयामील के संभावित आयात ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार द्वारा विदेशों से सोयामील के आयात की आशंका के बीच सोयाबीन के दामों में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। मंगलवार को ऑनलाइन कमोडिटी ट्रे़डिंग एक्सचेंज, नेशनल कमोडिटी डेरेवेटिव्स एक्सचेंज में वायदा सोयाबीन की कीमतों में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार को NCDEX में सोयाबीन का सितंबर अनुबंध 7,618 रुपए के लोअर सर्किट पर जा पहुंचा। 

इससे पहले सोमवार को सोयाबीन के सितंबर अनुबंध का कारोबार 8,104 रुपए प्रति क्विंटल पर जा कर बंद हुआ था। बीते दस दिनों में सोया कीमतों में प्रति क्विंटल दो हज़ार रुपए की गिरावट देखी गई है। इससे पहले 2 अगस्त को अनुबंंध अपने उच्चतम स्तर पर था। 2 अगस्त को NCDEX में सोयाबीन अनुबंध 9,544 प्रति क्विंटल के अपने उच्चतम स्तर पर था।    

सोयाबीन के दामों में भारी गिरावट उस आशंका के बाद शुरु हुई है, जिसके मुताबिक पोल्ट्री इंडस्ट्री को सोयामील सस्ते दाम पर मुहैया कराने के इरादे से सरकार जल्द ही विदेशों से करीब 15 लाख टन सोयामील का आयात कर सकती है। जो कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कम दामों पर उपलब्ध होते हैं। सोयामील, सोयाबीन के बीजों से तैयार किए जाने वाले उत्पादों को कहते हैं जिनका उपयोग पोल्ट्री इंडस्ट्री में पशुओंं के आहार के मुख्य रूप में किया जाता है।  

कयासों के मुताबिक आने वाले दो से तीन दिनों में सोयामील के आयात की मंज़ूरी औपचारिक तौर पर मिल सकती है। जल्द ही सरकार इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर सकती है। ऑल इंडिया पोल्ट्री ब्रीडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बहादुर अली के दावों के मुताबिक अगस्त के अंत तक सोयामील की पहली खेप भारत पहुंच सकती है। ऑल इंडिया पोल्ट्री ब्रीडर्स एसोसिएशन पहले ही सरकार से सोयामील के आयात की मांग कर चुकी है। 

खरीफ फसल को बाज़ार में पहुंचने में अब बस दो महीने से भी कम का समय बचा रह गया है। ऐसे समय में सोयामील के संभावित आयात को लेकर किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। सोयामील के आयात के लिए पोल्ट्री उद्योग की मांग का समर्थन करने वाले सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) का कहना है किआयात को केवल एक छोटी अवधि के लिए अनुमति दी जानी चाहिए। इकॉनोमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक एसईए के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता ने कहा है कि पोल्ट्री उद्योग के सामने आने वाले संकट से निपटने के लिए सोयामील के आयात को केवल 3 महीने की अवधि के लिए अनुमति दी जानी चाहिए। और इस मसले पर स्थिति स्पष्ट होना बेहद ज़रूरी है। 

कमोडिटी एनलिस्ट रितेश साहु ने इकॉनोमिक टाइम्स को बताया कि भोजन के रूप में उपयोग होने के कारण सोयाबीन की मांग अधिक है, और अगले सीजन में घरेलू बाजार में इसका स्टॉक सीमित है। सोयाबीन का नया सीजन अक्टूबर के महीने के बाद आएगा। भारत में किसानों ने 115 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बुआई की है। जो कि सामान्य बआई क्षेत्र की तुलना में अधिक ज़रूर है, लेकिन पिछले साल के क्षेत्र में 3 लाख हेक्टेयर से कम है। अगर आयात की अनुमति दी जाती है, तो इससे बीजों की घरेलू पेराई पर निर्भरता कम हो जाएगी।   

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हालांकि 15 लाख टन सोयामील के आयात की खबर ने सोयाबीन के किसानों ने चिंता में डाल दिया है। बुआई के समय पहले किसानों को सोयाबीन के बीज के लिए प्रति क्विंटल दस से बारह हज़ार रुपए चुकाने पड़े। कई किसानों ने अमानक बीज मिलने की शिकायत भी की। और अब सोयामील आयात की संभावनाएं किसान के लिए समस्याओं की आशंका में परिवर्तित हो गई हैं।  

सोयाबीन के गिरते भाव का सबसे ज़्यादा खामियाज़ा सोयास्टेट कहे जाने वाले मध्य प्रदेश को उठाना पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञ केदार शंकर सिरोही इस पूरे प्रकरण को मध्य प्रदेश से सोयास्टेट का तमगा छीनने की साजिश बताते हैं। केदार शंकर सिरोही ने कहा कि अब सोयाबीन की फसल तैयार होने की कगार पर है। ऐसे समय में सोयामील का इंपोर्ट कर सरकार किसानों के अरमानों पर न सिर्फ पानी फेरने का काम कर रही है बल्कि सरकार का यह फैसला किसानों को कर्ज़ के दलदल में फंसाने की एक तैयारी है। कोरोना काल में किसानों की आय प्रभावित हुई है। इस बार अधिकतर किसानों ने कर्ज़ा लेकर सोयाबीन की खेती की है। सोयाबीन किसान अब तक सोयाबीन पर प्रति क्विंटल दस हज़ार रुपए मिलने की उम्मीद लगाए बैठा था। लेकिन सरकार के इस फैसले ने एक बार फिर किसानों कि कमर तोड़कर रख दी है।