उर्दू के मशहूर शायर बशीर बद्र ने दुनिया को कहा अलविदा, 91 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र का गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे भोपाल में निधन हो गया। बद्र लंबे समय से डिमेंशिया नामक बीमारी से घिरे थे और उनकी याददाश्त जा चुकी थी।

Updated: May 28, 2026, 02:49 PM IST

भोपाल। उर्दू के मशहूर शायर डॉ बशीर बद्र का गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे भोपाल में निधन हो गया है। उन्होंने 91 साल की उम्र में अंतिम सांस ली।  वे लंबे समय से डिमेंशिया नामक बीमारी से घिरे थे और उनकी याददाश्त जा चुकी थी। बशीर बद्र के निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

बशीर बद्र का जन्म 15 फरवरी 1935 को यूपी के अयोध्या में हुआ था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) से अपनी उच्च शिक्षा और पीएचडी पूरी की और वहां उर्दू के प्रोफेसर के रूप में भी सेवाएं दीं। बद्र साहब को आम बोलचाल की सरल, रूमानी और बेहद प्रभावशाली भाषा में गजलें लिखने के लिए जाना जाता है। उन्होंने गजल विधा में कई नए और ठेठ शब्दों को शामिल किया।

बशीर बद्र की शायरी की सबसे बड़ी खासियत इसकी सरलता और सहजता है। उन्होंने ग़ज़ल में ऐसे रोजमर्रा के शब्दों का बखूबी इस्तेमाल किया, जिन्हें पारंपरिक उर्दू शायरी में जगह नहीं मिलती थी। उन्होंने कई प्रसिद्ध किताबें लिखीं, जिनमें 'इमकान', 'आहटें', 'कुल्लियात-ए-बशीर बद्र' और 'उजाले अपनी यादों के' शामिल हैं।

उर्दू शायरी के जरिए मोहब्बत की बातें करने वाले बशीर बद्र को साल 1987 में मेरठ के सांप्रदायिक दंगों में नफरत का सामना करना पड़ा था। इन दंगों में उनका घर जला दिया गया था। इस हादसे में उनकी कई ऐतिहासिक अप्रकाशित रचनाएं और कविताएं हमेशा के लिए नष्ट हो गईं। इस घटना के बाद ही वे हमेशा के लिए भोपाल शिफ्ट हो गए थे।

बशीर बद्र ने भारत के बंटवारे के वक्त भी कई शायरी लिखीं, जो आज तक लोगों के जहन में हैं। शिमला समझौते के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के जुल्फिकार अली भुट्टो को बशीर बद्र की बंटवारे के वक्त लिखा एक शेर सुनाया था।
ये शेर था  
"दुश्मनी जमके करो लेकिन ये गुंजाइश रहे 
जब कभी हम दोस्त बन जाएं तो शर्मिन्दा ना हों।"

बशीर बद्र के निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। मशहूर लेखक जावेद अख्तर ने उनके निधन पर दुख जताया है। उन्होंने एक एक्स पोस्ट में लिखा, 'आज हमारी जबान उर्दू थोड़ी और गरीब हो गई है। बशीर बद्र एक बेहद सुरीले शायर हमेशा के लिए हमारी महफ़िल से रुख़सत हो गए हैं। यह शायर और इनकी शायरी हमारी यादों में हमेशा ज़िंदा रहेंगे।'