MRP से ज्यादा कीमत पर बिक रहा खाद, दिग्विजय सिंह ने सीएम मोहन से की कार्रवाई की मांग

दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह मामला केवल मूल्य वृद्धि का नहीं, बल्कि किसानों के उपभोक्ता अधिकारों, पारदर्शिता तथा कानून के संभावित उल्लंघन से भी जुड़ा हुआ है।

Updated: Jun 11, 2026, 01:55 PM IST

भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर प्रदेश में डीएपी, एसएसपी तथा विभिन्न कॉम्प्लेक्स उर्वरकों के वितरण और बिक्री में सामने आ रही गंभीर अनियमितताओं पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

सीएम मोहन यादव को संबोधित अपने पत्र में सिंह ने कहा है कि मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से किसानों एवं किसान संगठनों द्वारा शिकायतें प्राप्त हो रही हैं कि सहकारी समितियों, विपणन संस्थाओं तथा निजी विक्रेताओं के माध्यम से उर्वरकों का विक्रय मुद्रित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से अधिक दरों पर किया जा रहा है। किसानों की यह भी शिकायत है कि पुराने स्टॉक में उपलब्ध उर्वरकों, जिनकी खरीद एवं मुद्रित कीमत कम थी, उन्हें पीओएस (POS) एवं ई-टोकन प्रणाली में प्रदर्शित नई एवं बढ़ी हुई दरों पर बेचा जा रहा है।

दिग्विजय सिंह ने उदाहरण देते हुए कहा कि 20:20:0:13 उर्वरक की 50 किलोग्राम की एक बोरी, जिसकी पूर्व निर्धारित कीमत लगभग 1450 रुपये थी, उसे कई स्थानों पर 2100 रुपये तक में बेचे जाने की शिकायतें मिली हैं। इससे किसानों पर प्रति बैग लगभग 650 रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इसी प्रकार एसएसपी एवं अन्य उर्वरकों के संबंध में भी अनियमितताओं की शिकायतें प्राप्त हुई हैं।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह मामला केवल मूल्य वृद्धि का नहीं, बल्कि किसानों के उपभोक्ता अधिकारों, पारदर्शिता तथा कानून के संभावित उल्लंघन से भी जुड़ा हुआ है। Fertilizer (Control) Order, 1985 एवं Essential Commodities Act, 1955 के प्रावधानों के अनुसार किसी भी उर्वरक की बिक्री उसके मुद्रित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से अधिक दर पर नहीं की जा सकती।

उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रदेशभर में उर्वरक वितरण एवं विक्रय व्यवस्था की विशेष और स्वतंत्र जांच कराई जाए, पुराने स्टॉक पर नई दरों की वसूली की शिकायतों की जिला स्तर पर जांच हो, किसानों से अधिक वसूली गई राशि वापस कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विक्रेताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।

सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है और किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ऐसे समय में जब किसान बढ़ती लागत, प्राकृतिक आपदाओं और बाजार की अनिश्चितताओं का सामना कर रहे हैं, तब उर्वरकों की कीमतों एवं वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों के हितों की रक्षा हेतु त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई करने का आग्रह किया है।