वाहन चेकिंग के दौरान चाबी छीनना गलत, जबलपुर हाईकोर्ट ने पुलिस को दी नसीहत
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस और अधिवक्ता के विवाद पर दोनों पक्षों को कानून का सम्मान करने की नसीहत दी। कोर्ट ने कहा कि अभद्र व्यवहार, अनावश्यक बहस और वाहन की चाबी छीनना उचित नहीं है।
वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस और एक अधिवक्ता के बीच हुए विवाद के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कानून के पालन पर पुलिस और वकीलों दोनों की जिम्मेदारी तय की है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि वाहन जांच के समय अभद्र व्यवहार, अनावश्यक बहस या वाहन की चाबी छीनने जैसी शिकायतों की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। साथ ही जबलपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को लंबित शिकायत पर कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
यह मामला बीते 11 जुलाई का है। याचिका के अनुसार, ट्रैफिक चेकिंग अभियान के दौरान एक अधिवक्ता को रोका गया था। आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, गाली-गलौज की, मारपीट की और आपराधिक धमकी भी दी थी। घटना के बाद अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल जबलपुर एसपी सम्पत उपाध्याय से मिला और शिकायत सौंपी लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित अधिवक्ता दो अन्य लोगों के साथ एक ही मोटरसाइकिल पर सवार थे। तीन सवारी बैठाना और बिना हेलमेट वाहन चलाना मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन है। सरकार के अनुसार, चालान की प्रक्रिया के दौरान ही दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बन गई थी। कोर्ट को यह भी जानकारी दी गई कि 13 जुलाई को दी गई शिकायत अभी भी जबलपुर एसपी के समक्ष विचाराधीन है और मामले की जांच शुरू की जा चुकी है।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने कहा कि अधिवक्ताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे विधि के शासन और कानूनी व्यवस्था का सर्वोच्च सम्मान करें। कानून की रक्षा करने वाले लोगों को स्वयं भी नियमों का पालन करना चाहिए क्योंकि कानून की प्रतिष्ठा केवल शब्दों से नहीं बल्कि आचरण से कायम रहती है।
अदालत ने पुलिस अधिकारियों को भी जिम्मेदारी का एहसास कराते हुए कहा कि कानून लागू करते समय धैर्य, शालीनता और संयम बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि वाहन चेकिंग के दौरान अनावश्यक कहासुनी, अभद्र भाषा का प्रयोग या वाहन की चाबियां छीनने जैसी शिकायतें सामने आती रहती हैं जो किसी भी स्थिति में उचित नहीं मानी जा सकती।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता की मुख्य आपत्ति उसकी शिकायत पर कार्रवाई न होने को लेकर है। चूंकि मामला पुलिस अधिकारी के समक्ष लंबित है और जांच जारी है इसलिए अदालत ने जबलपुर एसपी को विधि के अनुसार जांच पूरी कर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।




