धर्म के नाम पर नफरत फैलाने वाले सनातन को नहीं समझते, जहां प्रेम, सद्भाव, सत्य और अहिंसा है वहीं धर्म है: दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे सनातन का पालन करते हैं और सनातन धर्म की मूल भावना प्रेम, सद्भाव, सत्य और अहिंसा है। जहां ये नहीं है, वहां धर्म नहीं है।
भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे सनातन का पालन करते हैं और सनातन धर्म की मूल भावना प्रेम, सद्भाव, सत्य और अहिंसा है। सिंह ने कहा कि जहां ये नहीं है, वहां धर्म नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों का मूल सिद्धांत इंसानियत है और कोई भी धर्म नफरत की पैरवी नहीं करता।
दिग्विजय सिंह रविवार को भोपाल के गांधी भवन में लेखक दयाशंकर मिश्र की पुस्तक ‘अखलाक’ के विमोचन और चर्चा कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने देश में बढ़ते नफरत के माहौल, धर्म के नाम पर राजनीति और अखलाक व पुलिस अधिकारी सुबोध कुमार सिंह की हत्या का जिक्र करते हुए अपनी बात रखी।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि 2002 के बाद देश की राजनीति में एक सांप्रदायिक भूचाल आया। उन्होंने कहा कि उस समय जिस दृढ़ता से इसके खिलाफ लड़ाई लड़नी चाहिए थी, हम नहीं लड़ पाए और आज उसी का नतीजा भुगत रहे हैं। उन्होंने कहा कि हजारों लोगों को घर से बेदखल किया गया, सैकड़ों लोगों की हत्या हुई और मकान जला दिए गए।
उन्होंने कहा कि पीपुल्स रिप्रेजेंटेटिव एक्ट और चुनाव आचार संहिता में साफ है कि धर्म के नाम पर वोट नहीं मांगा जा सकता, लेकिन इसके बावजूद प्रधानमंत्री धर्म के नाम पर वोट मांगते हैं। चुनाव के दौरान उनके भाषणों में हेट स्पीच बढ़ती जाती है। उन्होंने कहा कि न तो चुनाव आयोग और न ही न्यायपालिका इस पर कार्रवाई करती है।
दिग्विजय सिंह ने पुस्तक ‘अखलाक’ में दिए गए दो उदाहरणों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अखलाक की हत्या इसलिए कर दी गई क्योंकि उस पर झुठा आरोप लगाया गया कि उसके फ्रिज में गोमांस रखा है। वहीं पुलिस अधिकारी सुबोध कुमार सिंह की हत्या इसलिए कर दी गई क्योंकि वे नफरत के खिलाफ खड़े हुए और दोनों पक्षों के बीच समझौते का प्रयास कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि दुख की बात यह है कि आज भी सुबोध कुमार सिंह के साथ न्याय नहीं हुआ और उनकी पत्नी को न्याय नहीं मिला। उन्होंने कहा कि जो लोग संविधान की शपथ लेकर पद पर बैठे हैं, वही आज संविधान, कानून और स्थापित मान्यताओं का उल्लंघन कर रहे हैं।
दिग्विजय सिंह ने बताया कि इससे पहले दयाशंकर मिश्र ने राहुल गांधी पर पुस्तक लिखने का फैसला किया था। मना करने के बावजूद वे नहीं माने और वर्षों पुरानी नौकरी छोड़ना स्वीकार किया, लेकिन अपने आदर्शों और विचारों के साथ समझौता नहीं किया। उनकी दूसरी पुस्तक ‘अखलाक’ उससे भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन वे अपने विचारों पर अडिग रहे।
उन्होंने कहा कि आज माहौल ऐसा बना दिया गया है कि लोगों के मन में डर है कि कुछ बोलेंगे तो नुकसान हो जाएगा। ऐसे समय में ‘अखलाक’ जैसी किताब लिखने का साहस दिखाने वाले दयाशंकर मिश्र को वे बधाई देते हैं।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने भगवद्गीता, कुरान, बाइबल और गुरु ग्रंथ साहब पढ़ा है तथा बौद्ध और जैन धर्म के आदर्शों को भी देखा है। सभी में मानवता ही मूल सिद्धांत है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की मान्यताएं अनंत हैं और नफरत के माहौल को मोहब्बत के माहौल में बदलना ही हमारी कोशिश होनी चाहिए।
इस दौरान अखलाक पुस्तक के लेखक दयाशंकर मिश्र ने कहा कि दिग्विजय सिंह इस देश में सबसे ज्यादा मिसइंफॉर्मेशन के शिकार हुए हैं। उन्हें लेकर क्या कुछ नहीं कहा गया। तमाम प्रोपेगेंड फैलाए गए। लेकिन वे अपनी विचारधारा पर अडिग हैं। दिग्विजय सिंह जैसे लोगों से ही मुझ जैसे पत्रकारों को नौकरी छोड़ पुस्तक लिखने की साहस मिलती है।




