कुलगाम में टारगेट किलिंग, आतंकियों ने नाम पूछकर मारी गोली, छत्तीसगढ़ के दो युवकों की मौत
दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में शुक्रवार रात आतंकियों ने ईंट भट्ठे पर हमला कर छत्तीसगढ़ के दो हिंदू मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी। हमलावरों ने नाम पूछकर ताबड़तोड़ फायरिंग की।
दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में शुक्रवार रात आतंकियों ने प्रवासी हिंदू मजदूरों को निशाना बनाते हुए एक ईंट भट्ठे पर हमला कर दिया। रात करीब 8:30 बजे हुए इस हमले में छत्तीसगढ़ के रहने वाले दो मजदूरों को नाम पूछने के बाद गोली मार दी गई। एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया और शनिवार सुबह श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (SKIMS) में इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। इस घटना को हाल के महीनों में गैर स्थानीय लोगों पर हुए सबसे गंभीर आतंकी हमलों में माना जा रहा है।
मृतकों की पहचान 24 वर्षीय दीपक रात्रे और 28 वर्षीय भूपेंद्र के रूप में हुई है। अधिकारियों के अनुसार, हमला कुलगाम से करीब 20 किलोमीटर दूर केलाम क्षेत्र स्थित एक ईंट भट्ठे पर हुआ। वारदात के समय वहां कई प्रवासी मजदूर मौजूद थे लेकिन हमलावरों ने केवल दोनों हिंदू मजदूरों को निशाना बनाया। स्थानीय लोगों ने घटना के दौरान 10 से 12 राउंड गोलियां चलने की आवाज सुनने की जानकारी दी।
यह भी पढ़ें:CNG Prices Hike: सीएनजी की कीमतों में फिर हुई बढ़ोतरी, 4 रुपए प्रति किलो बढ़े दाम
हमले के बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर करीब दो किलोमीटर के दायरे को सील कर दिया है। आतंकियों की तलाश के लिए व्यापक तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, दो आतंकी बाइक पर सवार होकर आए थे और वारदात को अंजाम देने के बाद फरार हो गए।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस हमले के पीछे प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की सहयोगी इकाई द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का हाथ हो सकता है। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस संगठन का रिकॉर्ड गैर स्थानीय मजदूरों और नागरिकों को निशाना बनाने का रहा है। शुरुआती जांच में एक स्थानीय आतंकी और एक पाकिस्तानी आतंकी की संलिप्तता की आशंका जताई गई है। जांच का फोकस मोहम्मद लतीफ नामक संदिग्ध पर भी है। जानकारी सामने आई है कि वह पिछले साल TRF में शामिल हुआ था।
यह भी पढ़ें:CWG 2026: नीरज-यशवीर ने जेवलिन में रचा इतिहास, एक ने सिल्वर तो दूसरे ने जीता ब्रॉन्ज
घटनास्थल पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। दरअसल पिछले दो-तीन सालों में कश्मीर के ईंट भट्ठों पर इसी तरह के हमलों के बाद पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाने और निगरानी के लिए CCTV लगाने के निर्देश दिए थे। जिस ईंट भट्ठे पर हमला हुआ वहां भी कैमरे लगे थे और अब उनकी रिकॉर्डिंग की विस्तृत जांच की जा रही है। इस इलाके में 20 से अधिक ईंट भट्ठे हैं। वहां बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर काम करते हैं।
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हमले की निंदा करते हुए मृतकों के परिजनों को पहले से निर्धारित 6 लाख रुपये की अनुग्रह राशि के अतिरिक्त मुख्यमंत्री राहत कोष से 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
यह भी पढ़ें:MP: सरकारी मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति को HC में चुनौती, केवल ब्राह्मणों को अवसर देने का आरोप
इससे पहले 22 जुलाई को अनंतनाग के लाल चौक क्षेत्र में आतंकियों ने पुलिस दल पर हमला किया था। जिसमें अमरनाथ यात्रा ड्यूटी पर तैनात हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन शहीद हो गए थे। उस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने घाटी में व्यापक अभियान चलाकर करीब 3,000 लोगों से पूछताछ की थी। हालांकि, बाद में अधिकांश लोगों को रिहा कर दिया गया था।




