MP में भर्ती परीक्षाओं के नाम पर छात्रों के साथ खिलवाड़, परीक्षा स्थगित होने से हजारों परीक्षार्थी परेशान: दिग्विजय सिंह
सिंह ने आरोप लगाया कि उक्त भर्ती परीक्षा के संचालन का कार्य आउटसोर्सिंग के माध्यम से एप्टेक (Aptech) कंपनी को सौंपा गया है। यह वही कंपनी है जिसे पूर्व में उत्तर प्रदेश एवं जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है।
भोपाल। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (पूर्व नाम व्यापम) द्वारा आयोजित वनरक्षक, क्षेत्र रक्षक, जेल प्रहरी एवं सहायक जेल अधीक्षक भर्ती परीक्षा-2026 की द्वितीय पाली को बिना पूर्व सूचना के स्थगित किए जाने से हजारों परीक्षार्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस संबंध में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए अभ्यर्थियों ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह से मिलकर अपनी व्यथा सुनाई और प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण हुए मानसिक एवं आर्थिक नुकसान की जानकारी दी।
परीक्षार्थियों ने बताया कि परीक्षा की द्वितीय पाली दोपहर 2:30 बजे से 4:30 बजे तक आयोजित होना थी। वे मुरैना, भिंड, दतिया, ग्वालियर, सागर, बालाघाट सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से लंबी दूरी तय कर समय से परीक्षा केंद्र पहुंचे थे। अधिकांश अभ्यर्थी दोपहर 12 बजे तक केंद्रों पर पहुंच गए थे। प्रवेश, पंजीयन एवं अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें केवल इतना बताया गया कि परीक्षा लगभग 10 मिनट की देरी से प्रारंभ होगी।
अभ्यर्थियों के अनुसार वे घंटों परीक्षा प्रारंभ होने की प्रतीक्षा करते रहे, लेकिन परीक्षा शुरू नहीं हुई। बाद में अचानक सुरक्षा कर्मियों द्वारा उन्हें परीक्षा केंद्र से बाहर जाने के लिए कहा गया तथा जानकारी दी गई कि द्वितीय पाली की परीक्षा स्थगित कर दी गई है। इस पूरे घटनाक्रम से परीक्षार्थियों में भारी आक्रोश और निराशा व्याप्त है। उनका कहना है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के घंटों इंतजार कराया गया और अंततः परीक्षा रद्द कर दी गई, जिससे वे स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल, जिसे पहले व्यापम के नाम से जाना जाता था, आज भी उसी कार्यप्रणाली पर चल रहा है जिसके कारण अतीत में प्रदेश की छवि को गंभीर क्षति पहुंची थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि उक्त भर्ती परीक्षा के संचालन का कार्य आउटसोर्सिंग के माध्यम से एप्टेक (Aptech) कंपनी को सौंपा गया है। सिंह ने कहा कि यह वही कंपनी है जिसे पूर्व में उत्तर प्रदेश एवं जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि ऐसी विवादित और ब्लैकलिस्टेड कंपनी को मध्य प्रदेश में पुनः परीक्षा संचालन का जिम्मा किस आधार पर सौंपा गया।
सिंह ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार तकनीकी और सॉफ्टवेयर संबंधी गड़बड़ियों के कारण परीक्षा आयोजित नहीं हो सकी और अभ्यर्थियों को बाद में बताया गया कि परीक्षा अब 20 जून को आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि अधिकांश विद्यार्थी आर्थिक रूप से साधारण परिवारों से आते हैं और परीक्षा देने के लिए उन्होंने हजारों रुपये खर्च कर यात्रा की है।
उन्होंने कहा कि कई छात्र-छात्राओं ने परिवहन, भोजन और आवास पर 1,000 से 2,000 रुपये तक खर्च किए हैं। परीक्षा स्थगित होने के कारण उनका आर्थिक नुकसान तो हुआ ही है, साथ ही मानसिक तनाव और समय की बर्बादी भी हुई है। सरकार और परीक्षा आयोजन एजेंसियों की लापरवाही का खामियाजा छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए।
दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि:
पहली मांग: परीक्षा संचालन का कार्य ब्लैकलिस्टेड या विवादित कंपनियों को किस आधार पर दिया गया, इसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
दूसरी मांग: जिन अभ्यर्थियों की परीक्षा तकनीकी कारणों से स्थगित हुई है, उन्हें उनके आने-जाने, भोजन एवं अन्य आवश्यक खर्चों की पूर्ण प्रतिपूर्ति राज्य सरकार द्वारा की जाए, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।
सिंह ने कहा कि भर्ती परीक्षाएं युवाओं के भविष्य से जुड़ी होती हैं। सरकार और परीक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे पारदर्शी, विश्वसनीय और व्यवस्थित परीक्षा प्रक्रिया सुनिश्चित करें। यदि बार-बार ऐसी घटनाएं होती रहीं तो युवाओं का भर्ती संस्थाओं और शासन व्यवस्था पर से विश्वास उठ जाएगा।
उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।




