जी भाईसाहब जी: खुरई की खुरपेंच, शक्ति प्रदर्शन के रंग में भंग
MP Politics: भूपेंद्र सिंह की पीड़ा यह है कि अब वे बुंदेलखंड की राजनीति का केंद्र नहीं है और खुद के इस कार्यक्रम में भी वे केंद्र नहीं रह पाए। महफिल उन्होंने सजाई और मजा कोई और लूट ले गया जैसे।
आखिरकार खुरई के विधायक और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह अपने क्षेत्र में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम करवाने में कामयाब हो ही गए। उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वि मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के क्षेत्र में जैसीनगर में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम हो चुका है। ऐसे में यह कार्यक्रम करवाना भूपेंद्र सिंह के लिए नाक का सवाल बन गया था। उन्होंने कई बार कोशिश की और मुख्यमंत्री का कार्यक्रम तय हो कर भी 2 बार टल गया था। यही कारण है कि जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जब खुरई पहुंचे तो भूपेंद्र सिंह ने पूरी ताकत के साथ शक्ति प्रदर्शन किया। 6 किलोमीटर के रोड शो के दौरान राह भर उनके जयकारे लगते रहे।
यह सब भूपेंद्र सिंह के लिए प्रसन्नता का विषय था लेकिन बार-बार रंग में भंग पड़ता देख भूपेंद्र सिंह कई बार असहज भी हुए। हुआ यूं कि जब वे भाषण दे रहे थे तब मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, पूर्व विधायक अरुणोदय चौबे आदि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा कर रहे थे। यह भूपेंद्र सिंह को असहज कर रहा था कि मंच पर सीएम डॉ. मोहन यादव उनकी बात सुनने से ज्यादा अन्य नेताओं को सुनने में व्यस्त रहे। इससे खीज कर भूपेंद्र सिंह ने कहा कि मैं कह रहा हूं उसे सुनिए। सीएम यहीं हैं, उनसे बाद में भी बात हो जाएगी। साफ दिख रहा था कि मुख्यमंत्री का ध्यान भटकाना भूपेंद्र सिंह को पसंद नहीं आ रहा है।
इतना ही नहीं, सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में प्रतिद्वंद्वी मंत्री गोविंद सिंह का रिएक्शन विधायक भूपेंद्र सिंह पर भारी पड़ गया। मुख्यमंत्री के जाने का समय हो रहा था और देरी का हवाला देते हुए भूपेंद्र सिंह मंच पर मौजूद गोविंद सिंह राजपूत को बोलने के लिए नहीं बुला रहे थे तभी मुख्यमंत्री ने इशारा किया। वे कुछ समझ पाते इसके पहले बोलने के लिए पीछे आ कर खड़े हो गए गोविंद सिंह ने मुस्कुराते हुए भूपेंद्र सिंह की पीठ पर थपकी थी। मानो कहना चाह रहे हो, रूको, रूको। मेरे बोलने तक सीएम रूकेंगे। उस वक्त भूपेंद्र सिंह के चेहरे पर उलझन भरे असहज भाव उभर आए। इस वीडियो में गोविंद सिंह के जेस्चर को पसंद किया गया।
भूपेंद्र सिंह की पीड़ा यह है कि अब वे बुंदेलखंड की राजनीति का केंद्र नहीं है और खुद के इस कार्यक्रम में भी वे केंद्र नहीं रह पाए। महफिल उन्होंने सजाई और मजा कोई और लूट ले गया जैसे।
गाय तो कट रही है अब राजनीति काटो
भोपाल में 26 टन गोमांस पकड़ा गया है। सरकारी स्लॉटर हाउस में गाय कटने के खुलासे के बाद दोष तो बीजेपी की महापौर और उनकी परिषद का ही है। जिस तरह इंदौर में दूषित पानी पीने से दो दर्जन मौतों के बाद बीजेपी नेता बयान वीर बने और सारा दोष अफसरों के सिर मढ़ दिया गया, वैसे ही बयान गाय मामले भी दिए जा रहे हैं। बीजेपी नेताओं ने ऐसे ही बयान भोपाल की गौशाला में गायों की मौत के समय भी दिए थे।
गोकशी के ताजा मामले में नगर निगम भोपाल के अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा दोषी का बख्शा नहीं जाएगा। असलम चमड़ा हो या कहीं का चमड़ा, उसकी चमड़ी उतार दी जाएगी। यह कहते हुए अध्यक्ष ने साफ किया कि स्लाटर हाउस का कोई प्रस्ताव परिषद में नहीं आया। इसका अर्थ है कि इस प्रस्ताव को महापौर परिषद यानी एमआईसी ने स्वीकृति दी थी। यही वजह है कि कांग्रेस सदस्य बीजेपी की मेयर मालती राय तथा मेयर इन काउंसिल के इस्तीफे के लिए अड़ गए। नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी का सख्त लहजे में बात करना बीजेपी की अंदरूनी राजनीति का भी हिस्सा है। असल में किशन सूर्यवंशी गोविंदपुरा क्षेत्र से आते हैं जहां कि विधायक कृष्णा गौर हैं। भोपाल की महापौर मालती राय को नरेला क्षेत्र से विधायक विश्वास सारंग का कट्टर समर्थक माना जाता है। गोविंदपुरा और नरेला क्षेत्र सीमावर्ती हैं। मालती राय पर हमला उनके आका मंत्री विश्वास सारंग को घेरने का मौका है।
कांग्रेस तो महापौर तथा उनके परिषद में शामिल पार्षदों के इस्तीफे मांग रही है। उधर, गुना से बीजेपी विधायक पन्नालाल शाक्य अपनी ही सरकार पर बरस रहे हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक पन्नालाल शाक्य गाय काटने और तस्करी से दु:खी हैं। उन्होंने मीडिया से चर्चा में कहा कि गाय के नाम पर राजनीति तो की जाती है, लेकिन न ही चरनोई भूमि बचाई जा रही है और न ही गाय बचाई जा रही हैं। गाय कुछ बोल नहीं सकती है इसलिए उसका लगातार दोहन हो रहा है। बीजेपी सरकार में राजधानी में रोजाना 300 गायों को काटा जाना एक तथ्य है तो गौ सरंक्षण की राजनीति में बीजेपी नेताओं का बयान वीर होना दूसरा सच है।
संकट से बचे मंत्री, अब जरा बचके, जरा हटके
एमपी बीजेपी के अनेक नेता पद पाने की आस में लंबे समय से केंद्रीय नेतृत्व की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। उन्हें उम्मीद है कि जहां राजनीतिक नियुक्तियों को हरी झंडी का इंतजार है वहीं मंत्रिमंडल विस्तार की भी आस हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा की गई विभागवार समीक्षा के बाद माना जा रहा है कि उपेक्षा से कमतर प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों की छुट्टी होगी। पार्टी को संकट में डाल चुके मंत्रियों को भी बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। इन कयासों के बीच मंत्री पद के दावेदारों को आस है कि मकर संक्रांति उनके जीवन में भी राजनीतिक बाजी बदलने वाली साबित होगी।
इन कयासों के बीच ऐसे मंत्री फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं जो बीते दिनों विवादों घिरे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विवादास्पद टिप्पणी कर चुके मंत्री विजय शाह ने मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली है। बीते दिनों रतलाम में बैठक के दौरान लाड़ली बहना योजना को लेकर दिया गया मंत्री विजय शाह का बयान भी विवाद का कारण बना था। यही कारण है कि बीजेपी कार्यालय में तय कार्यक्रम के अनुरूप जनसुनवाई में पहुंचे विजय शाह ने मीडिया से बात तक नहीं की। इंदौर में दूषित पानी से हुई मौत के बाद ‘घंटा’ बयान दे कर देशभर में चर्चा में आए नगरीय विकास एवं प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी मीडिया के सवालों पर सधी भाषा में बात कर रहे हैं। अपने भाई और बहनोई के मादक पदार्थ तस्करी में पकड़े जाने के बाद राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी मीडिया के साथ दुर्व्यवहार के कारण बयान के कारण विवाद से घिरी। फिर छवि सुधारने के लिए औचक निरीक्षण करने पहुंच गईं। इस पर भी सीएम डॉ. मोहन यादव से संयमित व्यवहार करने की हिदायत मिली।
अपने ही बयानों से जले ये मंत्री अब कोई विवाद नहीं चाहते हैं इसलिए फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। जबकि राकेश सिंह, नरेंद्र शिवाजी पटेल जैसे मंत्री छवि चमकाने का मौका नहीं छोड़ रहे। पीडब्ल्यूडी का कार्यक्रम रवींद्र भवन में आयोजित था लेकिन मंत्री राकेश सिंह, सीएम और पीएम मोदी के कटआउट चार इमली में लगाए गए। उधर, नरेंद्र शिवाजी पटेल फिर औचक निरीक्षण पर निकल पड़े। प्रभार के जिले बैतूल में मंडी निरीक्षण पर पहुंचे मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने किसान की शिकायत पर मंडी के प्रभारी सचिव को ऐसा फटकारा कि खबर बन गए।
पानी से ‘पानी’ बचाने की चुनौती
इंदौर में दूषित पानी से होने वाली मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। इस मामले पर बीजेपी की अंदरूनी राजनीति भी चरम पर है। कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को छोड़ा नहीं है। कांग्रेस नेता लगातार बीजेपी के जिम्मेदारों को घेर रहे हैं। इस मामले पर निकाली गई न्याय यात्रा में बहुत दिनों बात कांग्रेस प्रभावी प्रदर्शन कर पाई।
इंदौर के बाद अब प्रदेश के अन्य शहरों में वॉटर ऑडिट शुरू कर दिया है। भोपाल में पानी की जांच के लिए पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि नागरिकों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन भोपाल नगर निगम और बीजेपी सरकार इस गंभीर जन स्वास्थ्य मुद्दे के प्रति उदासीन है। जब तक लोगों के लिए स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित नहीं किया जाता, कांग्रेस का आंदोलन तब तक जारी रहेगा। सैलाना में भी आदिवासी विधायक कमलेश्वर डोडियार मोर्चा खोल चुके हैं।
भागीरथपुरा में जनता की मौत के बाद हुई किरकिरी के बाद सरकार का पानी उतरा हुआ है। नगरीय विकास एवं प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जनता के नाम खत लिख कर माहौल बदलने का जतन कर चुके हैं। कांग्रेस के लिए एसआईआर के बाद अब पानी ऐसा मौका है जब पार्टी अपनी जमीनी ताकत बढ़ा सकती है।




