MP में सामान्य से 16 प्रतिशत कम बारिश, किसानों को सता रहा फसल नष्ट होने का डर

मध्य प्रदेश में मानसून कमजोर पड़ने से अब तक 16% कम बारिश हुई है। 39 जिले सामान्य से कम बारिश की चपेट में हैं। मौसम विभाग ने आज दमोह, मंडला और डिंडौरी में भारी बारिश तथा भोपाल-इंदौर समेत 47 जिलों में आंधी और गरज-चमक का अलर्ट जारी किया है।

Updated: Jul 20, 2026, 02:58 PM IST

मध्य प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय तो है लेकिन प्रदेशभर में अभी तक सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, 23 जुलाई तक राज्य के करीब 90 फीसदी हिस्से में हल्की बारिश और गरज-चमक का सिलसिला जारी रहेगा। सोमवार को दमोह, मंडला और डिंडौरी में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। जबकि, राजधानी भोपाल, इंदौर समेत 47 जिलों में हल्की बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का अनुमान है। दूसरी ओर नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन और आगर-मालवा में बादल छाए रहने की संभावना है। हालांकि, वहां फिलहाल बारिश का अलर्ट नहीं है।

मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक, प्रदेश में पिछले करीब 12 दिनों से व्यापक और तेज बारिश का दौर नहीं चला है। इसका असर मानसून के कुल आंकड़ों पर भी दिखाई दे रहा है। अब तक मध्य प्रदेश में 261.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है। जबकि, इस अवधि में सामान्य औसत 311.8 मिमी होना चाहिए था। यानी प्रदेश में फिलहाल 16 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में स्थिति और कमजोर है। वहां सामान्य से 23 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। जबकि, पश्चिमी हिस्से में यह कमी 10 प्रतिशत है।

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सोमवार के लिए जारी पूर्वानुमान के अनुसार, दमोह, मंडला और डिंडौरी में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। वहीं, भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में गरज-चमक, तेज हवा और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है।

बारिश के मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश के 39 जिले अब भी सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में हैं। इनमें अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, दतिया, धार, गुना, झाबुआ, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी और विदिशा शामिल हैं। वहीं, निवाड़ी, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, देवास, ग्वालियर, हरदा, इंदौर, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, सीहोर और उज्जैन ऐसे जिले हैं जहां सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

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सामान्य से कम बारिश का असर अब खेती पर भी दिखाई देने लगा है। प्रदेश के कई जिलों में अल्प वर्षा के कारण खरीफ फसलों पर संकट गहराने लगा है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से सोयाबीन, धान, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की बढ़वार प्रभावित हो रही है। किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि अगले कुछ दिनों तक केवल हल्की बारिश का अनुमान है। यदि जल्द व्यापक और अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसलों पर इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, वर्तमान मौसमीय परिस्थितियां मानसून के लिए अनुकूल बनी हुई हैं। उत्तर-पश्चिम भारत से बंगाल की खाड़ी तक मानसून ट्रफ सक्रिय है। इसके अलावा झारखंड-बिहार, दक्षिण-पश्चिम मध्य प्रदेश और उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश-दक्षिण छत्तीसगढ़ के ऊपर बने ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण के कारण बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी मध्य भारत की ओर पहुंच रही है। इसी वजह से पूर्वी मध्य प्रदेश में संवहनीय बादलों का लगातार विकास हो रहा है। जबकि, पश्चिमी हिस्सों में अपेक्षाकृत कम बारिश देखने को मिली है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मौसमीय तंत्र पश्चिम की ओर खिसकते हैं तो आने वाले दिनों में पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

मौसम विभाग का कहना है कि जून में कमजोर मानसून के बाद जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश हुई थी। जिसकी वजह से बारिश का घाटा कुछ हद तक कम हो गया था। हालांकि, पिछले कई दिनों से तेज बारिश नहीं होने के कारण प्रदेश फिर से सामान्य बारिश से पीछे हो गया है। जुलाई मानसून का सबसे महत्वपूर्ण महीना माना जाता है और इसी दौरान पूरे सीजन की करीब 40 प्रतिशत बारिश होती है। भोपाल में जहां सामान्य वार्षिक बारिश करीब 39 इंच है उसमें लगभग 14 इंच बारिश जुलाई में होती है। वहीं, जबलपुर ऐसा प्रमुख शहर है जहां जुलाई में 17 इंच से अधिक सामान्य बारिश दर्ज की जाती है।

प्रदेश की औसत सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े जिलों में सामान्य बारिश 38 से 39 इंच के बीच रहती है। अब तक के आंकड़ों में देवास सबसे आगे है जहां सामान्य से 102 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है और करीब 18 इंच पानी बरस चुका है। हरदा में 15 इंच, इंदौर और सीहोर में करीब 14 इंच तथा भोपाल में 13.1 इंच बारिश दर्ज की गई है। 

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इसके अलावा आगर-मालवा, अशोकनगर, बैतूल, बुरहानपुर, गुना, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, उज्जैन, विदिशा, अनूपपुर, बालाघाट, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, मंडला, पांढुर्णा, पन्ना, सागर, सिवनी और उमरिया में भी बारिश की स्थिति संतोषजनक बनी हुई है। दूसरी ओर, आलीराजपुर सबसे अधिक बारिश की कमी झेल रहा है। वहां अब तक केवल करीब सवा दो इंच वर्षा हुई है जो सामान्य से 74 प्रतिशत कम है।