केंद्रीय मंत्री शिवराज और सीएम मोहन की बंद कमरे में बैठक, आधे रास्ते से लौटा आदिवासियों का भोपाल मार्च
कोसमी के आदिवासियों के मुद्दे पर शिवराज और मोहन यादव के बीच पनपे विवाद का पटाक्षेप हो गया है। दोनों नेताओं में बंद कमरे में हुई बैठक के बाद आदिवासियों का भोपाल मार्च स्थगित हो गया।
भोपाल। सीहोर में आदिवासी परिवारों का घर गिराए जाने का विरोध भोपाल की ओर बढ़ रहा था। इसके जरिए मोहन सरकार पर प्रेशर क्रिएट करने की तैयारी थी। हालांकि, देर रात इसका पटाक्षेप हो गया है। भोपाल की ओर पैदल मार्च कर रहे आदिवासी आधे रास्ते से वापस लौट गए। मगर इस पूरे घटनाक्रम में शिवराज सिंह चौहान ने जिस तरीके अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है, उससे मध्य प्रदेश में बीजेपी की स्थिति असहज हो गई है।
कोसमी गांव में घर तोड़े जाने के बाद वन विकास निगम के मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे आदिवासियों को कोई हल नहीं मिला था। पांच दिनों बाद आदिवासियों ने भोपाल मार्च का फैसला किया था। कोसमी बुधनी विधानसभा क्षेत्र में आता हैं, यहां से शिवराज सिंह चौहान विधायक रहे हैं। साथ ही विदिशा लोकसभा क्षेत्र है, जहां से वर्तमान में शिवराज सांसद हैं। कोसमी गांव में 11 अक्टूबर को वन विभाग की कार्रवाई में 12 परिवारों के मकान तोड़े गए थे।
इसके विरोध में आदिवासी परिवार धरने पर बैठे थे। इस दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान धरनास्थल पहुंचकर उनके साथ बैठ गए थे। शिवराज ने ध्वस्तीकरण कार्रवाई को अमानवीय करार दिया था। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा था, 'मेरे क्षेत्र में जुल्म की इंतिहा हुई है। बच्चों की चीखें और महिलाओं की कराह सुनी है। मासूमों को बिलखते देखा है।' शिवराज के बेटे कार्तिकेय भी अगले दिन धरनास्थल पहुंचे थे।
वन विकास निगम और सीहोर कलेक्टर की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में वन विकास निगम ने 135 हेक्टेयर क्षेत्र में 3.37 लाख से ज्यादा सागौन के पौधे लगाए थे। रिपोर्ट में 78,700 पौधे काटे जाने और आरक्षित वन क्षेत्र के कंपार्टमेंट 426 में 31.48 हेक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण का दावा किया गया है। रिपोर्ट में गूगल अर्थ की पुरानी तस्वीरों और ड्रोन फुटेज का हवाला देते हुए कहा गया है कि 2021 तक जमीन खाली थी। 2022 से वहां झोपड़ियां बनाने और खेती करने की गतिविधियां शुरू हुईं। इसके बावजूद शिवराज सिंह चौहान द्वारा सरकार पर दबाव बनाया जा रहा था।
5 हजार से ज्यादा आदिवासियों ने भोपाल की ओर पैदल मार्च शुरू किया था। गुरुवार रात उनका जत्था कोनाझिर में रुका था। इसी बीच गुरुवार देर रात मुख्यमंत्री निवास पर आदिवासी प्रतिनिधिमंडल से बातचीत से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, शिवराज सिंह चौहान और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच एक घंटे बैठक हुई। इस दौरान सीएम मोहन और शिवराज के बीच सुलह कराया गया। इसके बाद शिवराज के निर्देश पर आदिवासियों ने मार्च छोड़ने का निर्णय लिया और बसों में बैठकर अपने-अपने गांव वापस लौट गए।




